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"100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली" संभल हिंसा पर भाजपा का तीखा वार

उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा ने चार लोगों की जान ले ली, जिसके बाद सियासत गरमा गई। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पुलिस पर फायरिंग का आरोप लगाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

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संभल, उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर है, लेकिन बीते दिनों से यह भीषण हिंसा की घटना का गवाह बना हुआ है। जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई इस हिंसा में चार लोगों की जान चली गई, जिसके बाद राज्य की सियासत गर्मा गई। इस घटना ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया, बल्कि प्रदेश और देश की राजनीति में भी तीखी बहस छेड़ दी।

हिंसा के तुरंत बाद, सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बयान दिया कि इस घटना के लिए पुलिस जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने ही फायरिंग की, जिससे लोगों की मौत हुई। मसूद ने यह भी मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो। उनका यह बयान सत्ताधारी दल भाजपा और खासकर अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के निशाने पर आ गया।

जमाल सिद्दीकी का पलटवार

जमाल सिद्दीकी ने इमरान मसूद के बयान को तीखे शब्दों में खारिज किया। उन्होंने मसूद पर निशाना साधते हुए कहा, "100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।" उनके अनुसार, इमरान मसूद का राजनीतिक इतिहास ही दंगों से शुरू हुआ है, और उनके द्वारा दिया गया बयान न केवल गलत है, बल्कि समाज को बांटने की साजिश का हिस्सा है। सिद्दीकी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में हर वर्ग के साथ समानता का व्यवहार हो रहा है। उन्होंने सपा, कांग्रेस और बसपा पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन दलों का उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी और मुस्लिम समुदाय के बीच खाई पैदा करना है। जमाल सिद्दीकी ने संभल हिंसा पर प्रतिक्रिया देने के साथ ही अजमेर के हालिया विवाद को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रहे हैं। सिद्दीकी के मुताबिक, अब भाजपा के नेतृत्व में देश इस तरह की राजनीति को खारिज कर रहा है और सभी धर्मों को एक साथ लेकर चलने की दिशा में बढ़ रहा है।

जमाल सिद्दीकी ने कहा कि भाजपा “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों पर नफरत फैलाने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाली भाजपा को बदनाम करने के लिए हिंसा और दंगे जैसे मुद्दों को उठाया जा रहा है।
क्या है संभल हिंसा की पृष्ठभूमि?
संभल में जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर विवाद उस समय भड़क उठा जब सर्वे के दौरान हिंसा हुई और पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। इस दौरान कई लोगों की जान गई और प्रशासन पर सवाल उठे। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। इमरान मसूद ने इस घटना को लेकर कहा कि सरकार की गलत नीतियां और पुलिस की कार्रवाई इस हिंसा के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई।

संभल हिंसा का प्रभाव स्थानीय समाज पर गहरा पड़ा है। हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर भाजपा जहां गंगा-जमुनी तहजीब का जिक्र कर रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्तारूढ़ दल की विफलता के रूप में देख रहा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या धार्मिक स्थलों का राजनीतिक इस्तेमाल रोक पाना संभव होगा?

संभल हिंसा केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह उस बड़े राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है जिसमें धर्म और राजनीति का मेल होता है। इसे लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच जो बयानबाजी हो रही है, वह न केवल इस घटना की गंभीरता को दिखाती है, बल्कि यह भी उजागर करती है कि सामाजिक एकता और राजनीतिक लाभ के बीच संतुलन बनाना कितना कठिन है।
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