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छिपी अलमारियों से बरामद कैश, BSP विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों से 9 करोड़ जब्त; जानें क्या है पूरा मामला?

आयकर विभाग ने बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर छापेमारी में 9 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और अहम दस्तावेज जब्त किए हैं. जांच में बिना हिसाब लेनदेन और वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले हैं.

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उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की पार्टी के यूपी में इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह (Umashankar Singh) के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी ने प्रदेश की राजनीति और कारोबारी जगत में हलचल मचा दी है. करीब 30 घंटे तक चली कार्रवाई में नौ करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं. बरामद कागजातों में बड़े पैमाने पर बिना हिसाब के लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिससे जांच का दायरा अब और बढ़ सकता है.

सूत्रों के मुताबिक तलाशी के दौरान कच्चे कागजात, डायरी और हस्तलिखित दस्तावेज मिले हैं, जिनमें आय और खर्च के आंकड़ों में भारी अंतर दिखाई दे रहा है. आयकर टीमों ने कुछ स्थानों पर छिपी अलमारियों को खोजकर नकदी बरामद की. देर रात तक बैंक कर्मचारियों को बुलाकर मशीनों से कैश गिनती कराई गई। अधिकारियों ने बरामद 20 लाख रुपये स्टेट बैंक की शाखा में जमा भी कराए हैं.

कई जिलों में एक साथ छापेमारी

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कार्रवाई का दायरा पश्चिम यूपी से एनसीआर तक फैलाया गया है. लखनऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशाम्बी, सोनभद्र और वाराणसी समेत सात जिलों में स्थित आवास और कार्यालयों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया. लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास पर भी आयकर टीमों ने पुलिस बल के साथ तलाशी ली। रिजर्व पुलिस लाइन से सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली मुख्यालय, मुरादाबाद और लखनऊ से पहुंचे अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई की. सोनभद्र के राबर्ट्सगंज, ओबरा और चोपन में भी दस्तावेज खंगाले गए. बलिया के रसड़ा और पैतृक गांव खनवर स्थित आवास व प्लांट में जांच की गई.अयोध्या के पूरा बाजार स्थित प्लांट पर भी 24 घंटे से अधिक समय तक अधिकारी डटे रहे.

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फर्मों और खातों पर शिकंजा

आयकर विभाग ने विधायक से जुड़ी सीएस इंफ्राकंस्ट्रक्शन लिमिटेड और अन्य संबद्ध संस्थाओं के ठिकानों पर भी तलाशी ली. वाराणसी में अब तक छह बैंक खाते फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है. जांच एजेंसी बैंक ट्रांजेक्शन और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर नई जगहों पर भी सर्च ऑपरेशन चला रही है. सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने संबंधित फर्मों में निवेश किया था। इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से पड़ताल की जा रही है.

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खनन कार्यों की भी जांच

जब्त दस्तावेजों के आधार पर अब कंपनी द्वारा किए गए खनन कार्यों की भी गहन जांच शुरू हो गई है. यह देखा जा रहा है कि लीज एरिया की निर्धारित सीमा के भीतर ही खनन हुआ या तय सीमा से अधिक खुदाई की गई. पिछले पांच से सात वर्षों में कंपनी को मिले टेंडरों की भी समीक्षा की जा रही है. कुल कितने करोड़ के कार्य मिले और वास्तविक कामकाज कितना हुआ, इसकी पड़ताल जारी है. आयकर विभाग ने बताया कि तलाशी के दौरान विधायक की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरती गई। खनवर गांव में उनके छोटे भाई और कंपनी के डायरेक्टर रमेश सिंह से भी पूछताछ की गई।

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बहरहाल, जांच एजेंसी का मानना है कि बरामद दस्तावेजों से और बड़े नाम सामने आ सकते हैं. यदि कागजातों में दर्ज लेनदेन और वास्तविक कामकाज में अंतर साबित होता है तो कार्रवाई और तेज हो सकती है. फिलहाल आयकर विभाग दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहा है और संबंधित पक्षों से पूछताछ जारी है. इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में एजेंसियां अब सख्त रुख अपना रही हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

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