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'अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन...खुद को पार्टी से बड़ा न समझें', MLA बृजभूषण के पिता ने किया पोस्ट, लिखा- महादेव मेरे बेटे को सद्बुद्धि दें

यूपी की राजनीति में बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत विवादों में हैं. मंत्री का काफिला रोकने के बाद पार्टी ने नोटिस जारी किया है. इस बीच विधायक के पिता का सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने बेटे को अहंकार छोड़ने और सद्बुद्धि देने की बात कही.

Brijbhushan Rajput/ Ganga Charan Rajput
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत अपने बयानों और व्यवहार को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं. मामला सिर्फ एक मंत्री के काफिले को रोकने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह पार्टी अनुशासन, राजनीतिक मर्यादा और पारिवारिक सीख तक पहुंच गया है. बीजेपी के भीतर इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया जा रहा है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस मामलें में विधायक के खिलाफ नोटिस जारी किया है. इस बीच पार्टी के विधायक के पिता का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें उन्होंने अपने बेटे को नसीहत देते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है, भगवान मेरे बेटे को सदबुद्धि दे

क्या है पूरा मामला?

पूरा मामला 30 जनवरी का बताया जा रहा है. उस दिन उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह महोबा जिले के दौरे पर थे. दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अचानक मंत्री का काफिला रोक दिया गया. आरोप है कि बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत करीब 100 ग्राम प्रधानों और समर्थकों के साथ सड़क पर उतर आए. सड़क पर लगभग 30 कारें और 20 मोटरसाइकिलें खड़ी कर दी गईं, जिससे मंत्री का काफिला आगे नहीं बढ़ सका. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रशासन को असहज किया, बल्कि पार्टी नेतृत्व को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. विधायक और उनके समर्थकों का कहना था कि उनकी विधानसभा के कई गांवों में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोद दी गईं. काम अधूरा छोड़ दिया गया और सड़कों की मरम्मत भी नहीं कराई गई. बृजभूषण राजपूत का आरोप था कि करीब 100 गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित है. क्षेत्र की जनता रोज उनसे जवाब मांगती है, लेकिन अधिकारी और विभागीय तंत्र जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है. इसी नाराजगी के चलते उन्होंने मंत्री के सामने खुलकर विरोध दर्ज कराया.

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प्रदेश अध्यक्ष ने जारी किया नोटिस 

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इस विरोध का तरीका पार्टी को रास नहीं आया. बीजेपी नेतृत्व ने इसे संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन माना. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बृजभूषण राजपूत को नोटिस जारी कर दिया. उनसे सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है. साथ ही प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ मिलकर पूरे मामले की रिपोर्ट भी तलब की गई है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने साफ कहा कि बीजेपी एक संगठन-आधारित पार्टी है. जनहित के मुद्दों पर मतभिन्नता हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक रूप से अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जा सकती. पार्टी के भीतर हर बात रखने के लिए मंच और प्रक्रिया तय है. उन्होंने संकेत दिए कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आगे कड़ी कार्रवाई भी संभव है.

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विधायक के पिता ने पोस्ट में क्या लिखा?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और पहलू सामने आया, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया. विधायक बृजभूषण राजपूत के पिता और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा की. उन्होंने फेसबुक पर लिखा- महादेव मेरे विधायक बेटे को सद्बुद्धि दें. उन्होंने आगे लिखा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है. चाहे वह जप, तप, यश या कीर्ति का हो. कोई भी व्यक्ति अपने आप को पार्टी से बड़ा न समझे. यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई. समर्थकों और आलोचकों दोनों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. हालांकि, कुछ समय बाद गंगाचरण राजपूत ने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया. बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटे की लड़ाई किसी मंत्री से नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों से है. उन्होंने यह भी कहा कि विधायक का कर्तव्य होता है कि वह क्षेत्र की समस्याओं को सामने लाए.

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स्वतंत्र देव सिंह हमारे मंत्री हैं: गंगाचरण राजपूत

पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र देव हमारे सम्मानित मंत्री हैं. वे मेरे बेटे के बड़े भाई जैसे हैं. उन्होंने ही मेरे बेटे को बीजेपी में लाने में अहम भूमिका निभाई. वे मेरा बहुत सम्मान करते हैं और मैं भी उन्हें आशीर्वाद देता हूं. हमारा बेटा भी उनका सम्मान करता है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कहीं पानी की टंकी से लीकेज हो, सड़कें खराब हों या पाइपलाइन का काम अधूरा हो, तो जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है कि वह सवाल उठाए. लेकिन सवाल उठाने का तरीका मर्यादित और संगठन के भीतर होना चाहिए.

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बहरहाल, इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. बीजेपी नेतृत्व अनुशासन पर सख्त नजर आ रहा है. वहीं बृजभूषण राजपूत का अगला कदम और उनका जवाब पार्टी के भीतर उनकी राजनीतिक दिशा तय कर सकता है. यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सत्ता, संगठन और संस्कार के संतुलन की परीक्षा बन चुका है.

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