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बिहार ही नहीं देश में गूंज रहे ये छठ गीत, लोक गायिका नीतू नवगीत ने बताए इनसे जुड़े दिलचस्प किस्से

सोशल मीडिया से लेकर हर जुबां पर छठ गीत छाए हुए हैं. बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू नवगीत ने छठ और इस पर्व से जुडे गीतों के बारें में बताया.

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बिहार का लोकपर्व छठ देश ही नहीं विदेशों में भी बिहारी संस्कृति की पहचान बना है. महापर्व छठ बिहार और पूर्वी UP के साथ साथ पूरे देश में आस्था का पर्व बन रहा है. सोशल मीडिया से लेकर हर जुबां पर छठ गीत छाए हुए हैं. बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू नवगीत ने छठ और इस पर्व से जुडे गीतों के बारें में बताया. 

लोक गायिका नीतू नवगीत ने कहा, पूरी दुनिया में जहां-जहां बिहार के लोग गए हैं, अपना पारंपरिक त्योहार अपने साथ ले गए हैं. यही वजह कै कि छठ अब मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और त्रिनिदाद जैसे देशों में भी मनाया जा रहा है. प्रकृति से जुड़ा हुआ यह महा उत्सव हमें प्रकृति के मूल रूप से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करता है. 

छठ पर लोकगीतों का क्या है महत्व?

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नीतू नवगीत ने बताया कि, यह पर्व संदेश देता है कि, जीवन में उदय और अस्त दोनों ही अहम हैं. जो डूबता है उसका पुनः उदय जरूर होता है. छठ एक लोक उत्सव है इसमें स्वाभाविक रूप से लोकगीत पारंपरिक महत्व रखते हैं. इस त्योहार से जुड़े हर अनुष्ठान और विधान के लिए दर्जनों लोकगीत हैं ये गीत छठी मईया की महिमा और पर्व की पवित्रता दो दर्शाता है.

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छठव्रती महिलाएं गीतों से घर की साफ-सफाई से लेकर गेहूं धोने और दउरा उठाने तक का वर्णन करते हुए सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करती हैं. नीतू नवगीत कहती हैं कि, छत से जुड़े हुए गीतों में छठ महानुष्ठान की आत्मा बसती है. इन गीतों के माध्यम से कोई अपने लिए धन-धान्य मांगता है, तो कोई अपने लिए संतान. 

छठ के गीतों में ‘बेटी बचाओ’ का संदेश

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नीतू नवगीत कहती हैं कि, छठ गीतों में संतान का कोई भेदभाव नहीं है. एक लोकगीत में तो छठव्रती महिलाएं छठी मैया से रुनकी झुनकी बेटी मांगती हैं. पुरुष प्रधान समाज में पुत्री की आकांक्षा का यह अद्भुत उदाहरण है. इस गीत के बोल, ‘रुनकी झुनकी बेटी मांगी ला, पढ़लो पंडितवा दामाद, हे छठी मैया’ बेटी बचाओ का संदेश देते हैं. 

स्वच्छता से जुड़ा छठ गीत 

छत से जुड़े हुए कई गीत ऐसे हैं, जिसमें स्वच्छता और पवित्रता को दर्शाया जाता है. वो भी बेहद दिलचस्प अंदाज में. नीतू नवगीत ने बताया कि, एक गीत में छठव्रती महिलाएं एक तोते से अनुरोध करती हैं. वह कहती हैं सुखाए जा रहे गेहूं छठ महापर्व के लिए हैं तो वह इन्हें झूठा न करे. 

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इस गीत के बोल हैं- मारबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरझाए…

कुछ गीतों में छठव्रती महिलाएं अपने पिता, पति और भाई से छठ अनुष्ठान की सामग्री लाने की गुहार लगाती हैं. लोकगीत में पटना के हाट से नारियल लाने की मांग की जाती है तो हाजीपुर से केला लाने के लिए कहा जाता है. इस महापर्व में पूजा की हर सामग्री प्रकृति से जुड़ी हुई है चाहे वह सूप हो या दउरा, घी हो या दीप, नारियल, केला, गन्ना, गाजर, अदरक, सुथनी और मूली. ये सभी प्रकृति के उपहार ही हैं. 

छठ की हर विधि पर बना है लोकगीत 

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सूर्य देव और छठी मैया को अर्घ्य देने से लेकर छठ की हर छोटी बड़ी बात पर गीत बने हुए हैं. छठ घाट पर जाने के लिए भी लोकगीत हैं. एक लोकगीत, ‘कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए होई ना बलम जी कहरिया बहंगी घाटे पहुंचाए’ इसी पर है. 

कई लोकगीत ऐसे हैं जिसमें छठव्रती महिलाएं बताती है कि यह महा अनुष्ठान वह किसलिए कर रही हैं. ‘हम करीला छठ बरतिया से उनके लागी, हमरो जे बेटा कउनो अइसन बेटा से उनके लागी हम करीला छठ बरतिया से उनके लागी’ जैसे छठ के अधिकांश गीत पारंपरिक हैं और पारंपरिक धुन संस्कृति को खास तौर से दर्शाती हैं. इस दौरान नीतू नवगीत बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा को याद करती हैं. वह कहती हैं, शारदा सिन्हा की आवाज के गुंजित हुए बिना तो छठ पर्व अधूरा ही होता है. अनुराधा पौडवाल ने भी छठ के कई गीत गाए हैं. इनके साथ-साथ विंध्यवासिनी देवी ने भी छठ के कई गीत गाए हैं. 

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भगवान भवन भास्कर और छठी मैया की आराधना का यह पर्व गीतों के साथ ही प्रारंभ होता है और गीतों के साथ ही समाप्त होता है. दूसरे शहर और विदेश से आए छठ के निवासी इन गानों को अपने दिल में बसाकर लेकर जाते हैं. लोकगीतों की धुन उन मन में बस जाती है. छठ की छठा, बिहारी संस्कृति और लोकगीत बिहार के वासियों को हर साल ऐसे ही छठ घाट तक खींच लाते हैं. ये लोकगीत ही हैं जो बिहार के बाहर बसे समृद्ध लोगों को भी बिहार से दूर नहीं रख पाते. इस साल भी तन मन और प्रकृति के समर्पित छठ महापर्व धूमधाम से मनाया गया. 

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