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UP में बड़ा बदलाव! अब फिंगर नहीं, रेटीना से भी होगा रजिस्ट्री का प्रमाणीकरण

UP: अब तक रजिस्ट्री कार्यालयों में खरीदार, विक्रेता और गवाहों की पहचान सिर्फ उंगलियों के निशान यानी फिंगरप्रिंट से की जाती थी. लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है.

Image Source: Social Media
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UP Registry Rules: संपत्ति की रजिस्ट्री को आसान और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए निबंधन विभाग एक नया कदम उठाने जा रहा है. अब तक रजिस्ट्री कार्यालयों में खरीदार, विक्रेता और गवाहों की पहचान सिर्फ उंगलियों के निशान यानी फिंगरप्रिंट से की जाती थी. लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है. आने वाले समय में फिंगरप्रिंट के साथ-साथ रेटीना स्कैन (आंखों की स्कैनिंग) के जरिए भी पहचान की पुष्टि की जाएगी. इससे पहचान प्रक्रिया और मजबूत होगी और रजिस्ट्री में धोखाधड़ी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी.

फिंगरप्रिंट से जुड़ी समस्या क्या थी?

अब तक की व्यवस्था में सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों को होती थी. उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों की उंगलियों की रेखाएं हल्की पड़ जाती हैं या मिट जाती हैं. इसी तरह खेतों, फैक्ट्रियों या निर्माण कार्य में काम करने वाले मजदूरों की उंगलियों के निशान लगातार मेहनत के कारण घिस जाते हैं. जब ऐसे लोग रजिस्ट्री के लिए कार्यालय पहुंचते थे, तो बायोमीट्रिक मशीन उनके फिंगरप्रिंट को पहचान नहीं पाती थी. मशीन बार-बार निशान रिजेक्ट कर देती थी, जिससे पूरी प्रक्रिया बीच में रुक जाती थी. इसके बाद लोगों को कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे और मैन्युअल सत्यापन में भी काफी समय लग जाता था.

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आईजी स्टांप सतीश कुमार त्रिपाठी ने जानकारी दी है कि अभी सदर, पूरनपुर और बीसलपुर के रजिस्ट्री कार्यालयों में फिंगरप्रिंट से ही काम हो रहा है. लेकिन अब वहां रेटीना स्कैनर मशीनें लगाई जाएंगी.
यह व्यवस्था आधार प्रमाणीकरण की तरह काम करेगी. यानी व्यक्ति की आंखों की पुतली (रेटिना) को स्कैन करके उसकी पहचान की पुष्टि की जाएगी. चूंकि हर व्यक्ति की रेटिना अलग होती है, इसलिए इसमें गलती या धोखाधड़ी की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है. इससे पहचान प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बन जाएगी.

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बुजुर्गों और मजदूरों को बड़ी राहत

अक्सर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों और खेत-खलिहान या कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के फिंगरप्रिंट मैच नहीं हो पाते थे. सॉफ्टवेयर उन्हें स्वीकार नहीं करता था, जिससे रजिस्ट्री अटक जाती थी.
अब रेटीना स्कैन की सुविधा मिलने से उन्हें बार-बार परेशान नहीं होना पड़ेगा. अगर उंगलियों के निशान काम नहीं करेंगे, तो तुरंत आंखों के स्कैन से पहचान की जा सकेगी. इससे समय भी बचेगा और अनावश्यक भागदौड़ भी खत्म होगी.

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तीनों तहसीलों में नई व्यवस्था

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सदर तहसील के साथ-साथ पूरनपुर और बीसलपुर के निबंधन कार्यालयों को नए सॉफ्टवेयर और मशीनों से लैस किया जा रहा है. उप-निबंधकों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी भी पक्षकार का फिंगरप्रिंट मशीन में नहीं आ रहा है, तो तुरंत रेटीना स्कैनर का उपयोग किया जाए.
इस नई व्यवस्था से रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान, तेज और सुरक्षित हो जाएगी. खासकर बुजुर्गों और श्रमिकों के लिए यह बदलाव बड़ी राहत साबित होगा.

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