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चुनाव से पहले केजरीवाल ने किया BJP पर बड़ा हमला, शायराना अंदाज में मिला जवाब

Delhi में चुनावों से पहले किसानों का मुद्दा गर्मा गया. BJP-AAP के बीच चिट्ठी वार शुरू हो गया. इस बीच CM केजरीवाल ने BJP पर कृषि कानूनों की वापसी का बड़ा आरोप लगा दिया

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महिला सम्मान योजना, ऑटो वालों के लिए बड़े ऐलान, फ्री इलाज समेत दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने चौथी बार जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। समाज के हर वर्ग को साधने में केजरीवाल कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। एक के बाद एक कई ऐलान पार्टी की ओर से किए जा रहे हैं। दिल्ली की इस सियासी लड़ाई में अब किसानों पर दांव की बारी है। AAP का अगला दांव किसानों पर हो सकता है। इसका संकेत खुद केजरीवाल ने दे दिया है।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने तीन साल पहले खत्म हो चुके कृषि कानूनों का ना केवल जिक्र किया है बल्कि इनके सहारे बीजेपी को आईना दिखाने की कोशिश की। केजरीवाल ने पंजाब के किसानों का सहारा लेकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की मंशा तीन काले कानूनों को वापस लाने की है। सरकार उन्हें दोबारा लागू करने की तैयारी कर रही है। केजरीवाल ने X पोस्ट पर लिखा,

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पंजाब में किसान कई दिनों से धरने और अनिश्चित अनशन पर बैठे हैं। इनकी वही मांगे हैं जो केंद्र सरकार ने तीन साल पहले मान ली थी, लेकिन अभी तक लागू नहीं की। बीजेपी सरकार अब अपने वादे से मुकर गई। सरकार ने किसानों से बात तक नहीं की। उनसे बात तो करो। हमारे ही देश के किसान हैं। बीजेपी को इतना ज़्यादा अहंकार क्यों है कि किसी से बात भी नहीं करते? पंजाब में जो किसान अनशन पर बैठे हैं, भगवान उन्हें सलामत रखें, लेकिन अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए बीजेपी जिम्मेदार होगी। देशभर के किसानों की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि जो तीन काले कानून केंद्र ने तीन साल पहले किसानों के आंदोलन की वजह से वापस लिए थे, उन्हें “पॉलिसी” कहकर केंद्र सरकार पिछले दरवाजे से दोबारा लागू करने की तैयारी कर रही है। इस पॉलिसी की कॉपी उनके विचार जानने के लिए केंद्र ने सभी राज्यों को भेजी है।

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दरअसल, दिल्ली की सियासत में किसानों का चैप्टर अचानक नहीं जुड़ा है। इसकी शुरुआत कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक चिट्ठी से हुई है, जो उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को लिखी थी। चिट्ठी में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा,

दिल्ली सरकार, केंद्र की ओर से जारी किसान कल्याणकारी योजनाओं को लागू नहीं कर रही, जिससे किसान भाई-बहन इनके लाभ से वंचित हो रहे हैं। मैंने पहले भी आपको पत्र लिखकर दिल्ली के किसानों की समस्याओं के बारे में बताया है, लेकिन यह चिंता का विषय है कि आपकी सरकार ने इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP की सरकार किसानों के प्रति बेहद उदासीन है। किसानों के लिए दिल्ली सरकार में कोई संवेदना नहीं है। 10 वर्षों से दिल्ली में AAP की सरकार है, लेकिन पूर्व CM केजरीवाल ने हमेशा किसानों के साथ केवल धोखा किया है।

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आतिशी को लिखी चिट्ठी में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि AAP सरकार दिल्ली में किसानों से ज्यादा रेट में बिजली बिल वसूल कर रही है। कृषि मंत्री के इन आरोपों पर CM आतिशी भी चुप नहीं रहीं। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “बीजेपी का किसानों के बारे में बात करना वैसे ही है जैसे दाऊद अहिंसा पर प्रवचन दे रहा हो। जितना बुरा हाल किसानों का बीजेपी ने किया है, उतना कभी नहीं हुआ। पंजाब में किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं, बीजेपी राज में किसानों पर गोलियां और लाठियां चलाईं गईं।”

आतिशी के बाद अब अरविंद केजरीवाल ने भी बीजेपी को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। केजरीवाल ने कृषि कानूनों की वापसी का आरोप लगाते हुए नई बहस को जन्म दे दिया। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि दिल्ली के चुनावी दंगल में किसानों के नाम की रोटी भी खूब सेकी जाएगी। वहीं, किसानों पर कृषि मंत्री शिवराज और AAP के बीच ये वार-पलटवार यहीं नहीं रुका। शिवराज सिंह ने एक बार फिर जवाब दिया। लेकिन इस बार उनका अंदाज थोड़ा शायराना था। उन्होंने X पोस्ट पर एक शायरी के साथ लिखा,

तू इधर-उधर की न बात कर,

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ये बता कि क़ाफ़िले क्यूं लुटे

शिवराज ने पूछा, “आखिर क्यों केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को आप सरकार ने दिल्ली में लागू करने से रोका? क्यों दिल्ली के किसान भाई-बहनों की परेशानी से आप को फर्क नहीं पड़ता? किसान कल्याणकारी योजनाओं का फायदा AAP दिल्ली के किसानों को क्यों नहीं देना चाहते? आखिर क्यों AAP दिल्ली के किसानों के प्रति इतना संवेदनहीन हैं?” हालांकि, शिवराज के पोस्ट में कहीं भी केजरीवाल के कृषि कानूनों की वापसी के आरोप का कोई जवाब नहीं दिया गया। इसे इधर-उधर की बात कहकर टाल दिया गया।

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वहीं, दिल्ली में चुनाव से पहले एक-एक कर कई ऐलान कर चुकी आम आदमी पार्टी की सरकार अब किसानों को भी साधने की ताक में है। वहीं, पंजाब में किसानों के धरने के बाद AAP की भगवंत मान सरकार भी सवालों के घेरे में आ गई। खासकर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की तबीयत खराब होने के बाद मान सरकार पर किसानों की अनदेखी के आरोप लगे। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई। ऐसे में केजरीवाल नहीं चाहते पंजाब में AAP की छवि का खामियाजा दिल्ली में भुगतना पड़े। वे मान सरकार को तो बचा ही रहे हैं, साथ ही उन्होंने किसानों का पूरा मामला बीजेपी की ओर मोड़ दिया और कृषि कानूनों की वापसी का आरोप लगाकर बीजेपी के लिए नए मुद्दे को भी हवा दे दी।

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