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मिलिट्री इंटेलिजेंस ने चलाया 'ऑपरेशन स्टाम्प'... देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों पर बड़ी कार्रवाई

मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ और दानापुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने दानापुर कैंट क्षेत्र से एक शातिर स्टाम्प तस्कर को गिरफ्तार किया है. आरोपी बिना किसी वैध लाइसेंस या अनुमति के भारतीय सेना अर्धसैनिक बलों, बैंक, स्कूलों और कई अन्य सरकारी-निजी संस्थानों के फर्जी रबर स्टाम्प बनाता और सप्लाई करता था. इसे देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की तरह देखा जा रहा है. फिलहाल आगे की कार्वाई जारी है.

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देश की सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डाल सकने वाली एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है. मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ और दानापुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. संयुक्त टीम ने दानापुर कैंट क्षेत्र से एक शातिर स्टाम्प तस्कर को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान रवींद्र जीत वडेरा के रूप में हुई है. वडेरा पर आरोप है कि वह बिना किसी वैध लाइसेंस या अनुमति के भारतीय सेना अर्धसैनिक बलों, बैंक, स्कूलों और कई अन्य सरकारी-निजी संस्थानों के फर्जी रबर स्टाम्प बनाता और सप्लाई करता था.

6 महीने से था मिलिट्री के राडार पर
मिलिट्री इंटेलिजेंस सूत्रों ने बताया कि, वडेरा पिछले छह महीनों से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था. फिर आखिरकार समय रहते कार्रवाई कर इस संभावित खतरे को रोका गया. गिरफ्तारी के बाद टीम ने 20 से अधिक अत्यंत संवेदनशील आर्मी स्टाम्प, 100 से अधिक अन्य सरकारी-निजी संस्थानों के फर्जी स्टाम्प बरामद किए हैं.

स्टाम्प से देश को नुकसान पहुंचाने की साजिश
बता दें कि ये स्टाम्प देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाला था. इन स्टाम्पों का उपयोग फर्जी सेना भर्ती, दस्तावेजों की कोटिंग, यहां तक कि देश विरोधी गतिविधियों में भी किया जा सकता था. वहीं पहलगाम टेरर अटैक के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया जिसके बाद पाक के कई जासूसों की गिरफ़्तारी हुई. इन गिरफ्तारियों के बाद ऐसी आशंकाएं और बढ़ गई थी कि राष्ट्रविरोधी तत्व ऐसे स्टाम्प के जरिए सेना की प्रतिष्ठा और देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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नेटवर्क को खंगालने की कोशिश जारी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है. फॉरेंसिक स्तर पर स्टाम्पों की जांच, संबंधित संस्थानों को अलर्ट भेजना, और आरोपी के नेटवर्क की पहचान की प्रक्रिया शुरू हो गई है. पुलिस इसे एक राष्ट्रविरोधी साजिश के एंगल से भी देख रही है. यह मामला न केवल एक आपराधिक गतिविधि है, बल्कि राष्ट्र की सामरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाली एक गंभीर साजिश का हिस्सा माना जा सकता है. सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और समय पर कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया गया.

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