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राजस्थान के राजसमंद में 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा बनकर तैयार, नया चार धाम बनाने की योजना

राजस्थान के राजसमंद में बालाजी की प्रतिमा का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है. अरावली की पहाड़ी पर 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा का निर्माण किया गया है, जो जमीनी स्तर से 500 फीट ऊपर बनी है.

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राजस्थान में राजसमंद जिले के नाथद्वारा में वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ अब नया चार धाम बनाने जा रहा है. नाथद्वारा में पहले से ही भगवान श्रीनाथजी की बड़ी प्रतिमा मौजूद है, लेकिन अब पीठ 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा का निर्माण कर रहा है, जो लगभग पूरा हो चुका है. 

131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा का निर्माण किया गया है

इससे पहले नाथद्वारा में भगवान शिव की 179 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया गया था, लेकिन अब लगभग बालाजी की प्रतिमा का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है. अरावली की पहाड़ी पर 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा का निर्माण किया गया है, जो जमीनी स्तर से 500 फीट ऊपर बनी है.

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प्रतिमा को बनाने का काम तकरीबन 5 महीने पहले शुरू हुआ था

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प्रतिमा को फाइबर की अत्याधुनिक तकनीक से बनाया गया है. इस तकनीक में प्रतिमा के सांचे को जटिल तरीके से बनाया जाता है और सांचे पर फाइबरग्लास की परतें लगाई जाती हैं, जिससे प्रतिमा को मजबूती मिल सके, इस प्रक्रिया के बाद मूर्ति का निर्माण शुरू किया जाता है. अरावली की पहाड़ी पर होने की वजह से प्रतिमा को बनाने का काम आसान नहीं था, क्योंकि दुर्गम रास्ते पर सामान ले जाने में बहुत कठिनाई हुई. प्रतिमा को बनाने का काम तकरीबन 5 महीने पहले शुरू हुआ था, लेकिन अब प्रतिमा बनकर तैयार है.

किसी आज्ञा से प्रतिमा का निर्माण किया गया था

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नाथद्वारा के गिरिराज परिक्रमा में निर्माणाधीन यह श्रीजी के हनुमान जी का स्वरूप अनूठा है और इसकी सबसे खास बात ये है कि ये तीनों अद्भुत प्रतिमा एक दूसरे के आमने-सामने हैं और एक दूसरे को निहार रही हैं. मुंबई के उद्योगपति गिरीश भाई शाह ने इसकी कल्पना की थी और श्रीनाथजी मंदिर के तिलकायत गोस्वामी राकेश बाबा और युवराज विशाल बाबा की आज्ञा से इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ. 

इंजीनियर राजदीपसिंह ने क्या कहा?

श्रीजी के हनुमान के इंजीनियर राजदीपसिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हमसे कहा गया कि हनुमान जी की प्रतिमा का निर्माण करना है लेकिन पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए. इसके लिए पहले हमने क्रेन लगाई और फिर प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरू किया. यह प्रतिमा इंडिया और अमेरिकन स्टैंडर्ड्स को ध्यान में रखते हुए की गई है.

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‘मुझे विचार आया भगवान हनुमान जी की प्रतिमा होनी चाहिए’

श्रीजी के हनुमान के मुख्य संचालक गिरीश भाई शाह ने प्रतिमा निर्माण पर बात करते हुए भावुक नजर आए. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि शास्त्रों में साफ-साफ लिखा है कि जहां श्री नाथजी मौजूद हैं, वहां भगवान हनुमान जी और भगवान शिव का होना अनिवार्य है. ये भावना एक भक्त की है और ये विचार मुझे आया कि यहां भगवान हनुमान जी की प्रतिमा होनी चाहिए, जो श्री नाथ जी के सामने हो. अपने सेवा भाव को पूरा करते हुए हमने गोस्वामी राकेश बाबा और युवराज विशाल बाबा से आज्ञा ली और काम शुरू किया.

मूर्ति बनाने में किसका योगदान रहा

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प्रतिमा को बनाने में दिल्ली के प्रसिद्ध मूर्ति कारीगर नरेश भाई कुमावत, शरद गुप्ता, आर्किटेक्ट शिरीश सनाढय, और राजदीप सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इससे पहले नरेश भाई कुमावत ने 379 फीट ऊंची शिव प्रतिमा का कार्य भी करवाया है. 

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