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बिहार से दिल्ली आईं, बौद्ध दर्शन से MA, झुग्गी में पढ़ाया... कौन हैं DUSU की ज्वाइंट सेक्रेटरी दीपिका झा?

DUSU Election 2025: बिहार से निकलीं, दिल्ली आईं, बौद्ध दर्शन में MA की पढ़ाई... पैसे की तंगी रही, झुग्गी के बच्चों को पढ़ाया, महिलाओं के बीच कार्य किया. कौन हैं DUSU की ज्वाइंट सेक्रेटरी दीपिका झा, जिनकी आगामी विधानसभा चुनाव में होगी अहम भूमिका और बीजेपी करेगी सक्रिय रूप से जमीन पर इस्तेमाल.

बिहार से दिल्ली आईं, बौद्ध दर्शन से MA, झुग्गी में पढ़ाया... कौन हैं DUSU की ज्वाइंट सेक्रेटरी दीपिका झा?
Image: Deepika Jha / X (File Photo)
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू ) चुनाव के परिणामों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भगवा झंडा लहराते हुए केंद्रीय इकाई की चार पदों में से तीन प्रमुख पदों अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पर कब्जा जमा लिया. वहीं NSUI को उपाध्यक्ष पद से संतोष करना पड़ा है. अध्यक्ष पद पर आर्यन मान की जीत हुई है. इस जीत के बाद ABVP ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के जेन-जी वाले पोस्ट पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत के जेन-जी ने डूसू चुनावों में राष्ट्र निर्माण में अपना समर्थन दिया है. 

पैनल में संयुक्त सचिव पद पर बिहार की बेटी दीपिका झा ने 4,445 मतों के अंतर से जीत दर्ज की है. उनकी भी काफी चर्चा हो रही है. कहा जा रहा है कि दीपिका की बिहार चुनाव में काफी अहम भूमिका हो सकती है. उनका तीन तरह से इस्तेमाल हो सकता है. पहला तो ये कि वो युवा हैं, दूसरा कि वो बिहार की हैं और आने वाले दिनों में चुनाव भी है और तीसरा कि वो एक महिला भी हैं. ऐसे में पार्टी, संघ, भाजयुमों उनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल कर सकता है. 

कौन हैं बिहार की दीपिका झा, बनीं DU में ABVP का चेहरा?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में संयुक्त सचिव के पद पर चुनाव जीतने वालीं दीपिका झा की संघर्ष की कहानी बड़ी रोचक है. बिहार के मिथिला प्रक्षेत्र के जिले मधुबनी से आने वालीं दीपिका का परिवार खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है. राज्य में कृषि पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों की आर्थिक स्थिति कुछ खास होती नहीं है, वैसी ही कुछ उनकी भी रही. दीपिका ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लक्ष्मीबाई कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. फिलहाल वो दिल्ली यूनिवर्सिटी के बौद्ध अध्ययन विभाग (Department of Buddhist Studies) से मास्टर्स कर रही हैं. बताया जाता है कि उनकी सामाजिक कार्यों में उनकी गहरी रुचि रही है.

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जानकारी के मुताबिक दीपिका का जीवन संघर्ष से भरा रहा, जिसने उन्हें दूसरों की मदद के लिए भी प्रेरित किया. और इसमें उनकी मदद उनके बौद्ध दर्शन कोर्स ने की, जहां उनका जीवन बौद्ध दर्शन के मूल्यों से और मजबूत हो गया. दीपिका अपनी शिक्षा-दीक्षा के साथ-साथ गरीब बच्चों की मदद के लिए सदैव आगे रहीं. इतना ही नहीं वो अपनी पढ़ाई के दौरान भी दिल्ली में झुग्गियों के गरीब बच्चों को पढ़ाया करती थीं. इसी जन सरोकारी सोच का फायदा उन्हें अपने सियासी सफर में मिल रहा है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार DU की तरफ से छात्रसंघ चुनाव लड़ने वालीं दीपिका इससे पहले दीपिका Students for Sewa नामक संगठन से भी जुड़ी रहीं. यहां उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए झुग्गी-झोपड़ी में ‘बस्ती की पाठशाला' जैसे प्रोजेक्ट्स भी चलाए, जिसका गरीब बच्चों को काफी फायदा हुआ..

किन मुद्दों पर दीपिका का रहेगा फोकस?

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दीपिका झा अपनी मुखरता और छात्रों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाने के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में भी महिला सुरक्षा को एक महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए लगातार काम किया है. इसके अलावा, उन्होंने डीयू प्रशासन और डूटा (DU Teachers' Association) के साथ मिलकर रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और कैंपस में सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी प्रयास किया.

जीत के बाद क्या बोलीं दीपिका झा?

डूसू की नवनिर्वाचित सह-सचिव दीपिका झा ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दशकों से छात्राओं को न केवल सशक्त प्रतिनिधित्व देती रही है, बल्कि उनकी जीत भी सुनिश्चित करवाती आई है. मेरी जीत भी संगठन की कुशल रणनीति और कार्यकर्ताओं के समर्पण का परिणाम है. पिछले दस वर्षों पर दृष्टि डालें तो डूसू में लगातार विद्यार्थी परिषद की ही छात्रा प्रत्याशी निर्वाचित होती रही हैं, और यह परंपरा इस बार भी कायम रही. इसके अलावा दीपिका 'ऋतु मती अभियान' से भी जुड़ी रही हैं, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है.

डूसू चुनाव जीतने के बाद, दीपिका ने साफ किया कि उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी. उन्होंने कहा कि वह कैंपस में महिलाओं का सशक्त प्रतिनिधित्व करेंगी, छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी, और फीस संरचना को समान बनाने के साथ-साथ बेहतर प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराने पर भी काम करेंगी.

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बिहार चुनाव में बीजेपी का चेहरा बनेंगी दीपिका?

बिहार देश में सर्वाधिक युवा आबादी वाला राज्य है.  यहाँ करीब 60 प्रतिशत लोग 25 वर्ष से कम आयु वर्ग के हैं. बिहार के युवाओं में असीम क्षमता है. वहीं बिहार में महिला मतदाताओं की संख्या 4.07 करोड़ है जो कुल मतदाताओं का 47.7% है. ये दोनों बिहार की NDA सरकार, पीएम मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के टॉप फोकस में है. जहां बीजेपी मोदी के सहारे अपने कैडर, युवा और नीतीश के सहारे महिलाओं को टार्गेट कर रही है.

ऐसे में दीपिका जैसे युवा चेहरों को बीजेपी संपर्क अभियान में इस्तेमाल कर सकती है. संघ की अनुषांगी इकाई ABVP वैसे भी जमीनी स्तर पर, छात्रों और युवाओं के बीचे में काम करती है. जिसके बाद इनकी भाजयुमो में एंट्री होती है फिर बीजेपी. ऐसे में अगर दीपिका जैसे चेहरे हैं तो जाहिर है पार्टी उनका इस्तेमाल जेन जी, महिला और स्विंग वोटर्स के रूप में इस्तेमाल कर सकती है.

कब हो सकता है बिहार चुनाव?

बिहार विधानसभा चुनाव में बस कुछ ही महीने बचे हैं. कहा जा रहा है कि दुर्गा पूजा के बाद अक्टूबर के पहले या दूसरे हफ्ते में चुनाव का ऐलान कर सकता है. वहीं चुनाव नवंबर में छठ के बाद होने की संभावना है, जहां पर हर हाल में 22 नवंबर से पहले सरकार का गठन करना है. ऐसे में इन युवा चेहरों की इस जीत के बाद काफी महती भूमिका होने वाली है.

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ABVP की मतों के अंतर से यह दूसरी सबसे बड़ी जीत!

आपको बता दें कि ABVP की ओर से बताया गया है कि डूसू अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के आर्यन मान ने 16,196 मतों के अंतर से, सचिव पद पर कुणाल चौधरी ने 7,662 मतों के अंतर से, तथा संयुक्त सचिव पद पर दीपिका झा ने 4,445 मतों के अंतर से जीत दर्ज की है. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है. इस जीत ने यह तय कर दिया है कि आज के विद्यार्थी राष्ट्र निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभाने वाले विचार के साथ हैं तथा विध्वंसक तथा नकारात्मक विचार की यह बड़ी हार है.

DUSU के नए अध्यक्ष ने क्या कहा?

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डूसू के नवनिर्वाचित अध्यक्ष आर्यन मान ने कहा कि यह विजय जेन-जी पीढ़ी की उस राष्ट्रनिष्ठ चेतना की प्रतिध्वनि है, जो भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को सर्वोपरि मानती है. दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे देशविरोधी और भारतविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले तत्वों को करारा जवाब देने में सक्षम हैं. यह जीत उस भ्रष्ट तंत्र और खोखली राजनीति के विरुद्ध छात्रों के प्रतिरोध का प्रतीक है, जिसे एनएसयूआई और कांग्रेस पार्टी विश्वविद्यालय परिसर में थोपना चाहती थी.

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