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पेड़ों की स्मार्ट देखभाल Trevive के साथ: गुरुग्राम के युवा अबीर रोहन ने बनाया IoT-बेस्ड ट्री हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम

गुरुग्राम के द श्रीराम स्कूल, मौलसरी के 12वीं क्लास के स्टूडेंट अबीर रोहन गोसाईं ने एक अनूठा ट्री हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम डेवलप किया है. रोहन का आविष्कार ट्रिवाइव (Trevive) एक IoT-आधारित तकनीक है, जो पेड़ों के स्वास्थ्य (ट्री हेल्थ) की निगरानी करता है.

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09 Jul 2025
( Updated: 10 Dec 2025
02:43 AM )
पेड़ों की स्मार्ट देखभाल Trevive के साथ: गुरुग्राम के युवा अबीर रोहन ने बनाया IoT-बेस्ड ट्री हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम
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क्लाइमेट चेंज, वनों की अंधाधुंध कटाई और लगातार खराब होती मिट्टी की गुणवत्ता जैसी चुनौतियों से आज हमारा पर्यावरण जूझ रहा है. इन तमाम चुनौतियों के बीच गुरुग्राम के द श्रीराम स्कूल, मौलसरी के 12वीं क्लास के स्टूडेंट अबीर रोहन गोसाईं ने एक अनूठा ट्री हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम डेवलप किया है. रोहन का आविष्कार ट्रिवाइव (Trevive) एक IoT-आधारित तकनीक है, जो पेड़ों के स्वास्थ्य (ट्री हेल्थ) की निगरानी करती है. Trevive, पेड़-पौधों की देखभाल में डेटा-संचालित जानकारी के जरिए उनके स्वास्थ्य की जानकारी देती है, जिससे उन्हें किसी भी नुकसान से बचाया जा सकता है.

क्या है Trevive?

Trevive एक छोटी, किफायती, बहुत स्केलेबल डिवाइस है, जो पेड़ों की हेल्थ की रियल टाइम में मॉनिटरिंग करती है. इसका इस्तेमाल छोटे किसानों, रि-फॉरेस्टेशन टीम, शहरी बागवानी करने वालों के लिए बेहद कारगर साबित हो रहा है. सेंसर बेस्ड यह टूल मिट्टी के मुख्य मापदंड, जैसे हवा का तापमान, नमी, आद्रता, pH लेवल, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी और पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम) की जांच करता है.

तकनीकी विशेषताएं

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Trevie में 7:1 सॉइल सेंसर लगा है, जो जरूरी स्टैंडर्ड की जांच करता है. यह डेटा ब्लूटूथ लो एनर्जी (BLE) के जरिए मल्टी-लैंग्वेज मोबाइल ऐप में भेजा जाता है, जो Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है. ये ऐप वॉइस इनेबल है और इसे इस्तेमाल करने वाले यूजर को पर्यावरण की स्थिति की सटीक जानकारी देता है. एनर्जी की कम खपत के लिए इसमें हर दस मिनट में डेटा सैंपलिंग करने वाला स्पाइक फिल्टर एल्गोरिदम भी है.

डेटा से एक्शन तक
Trevive की खासियत यह है कि यह रॉ डेटा को समझे जा सकने वाले सुझावों में बदल देता है. यूजर्स को सही समय पर इस डिवाइस के जरिए अलर्ट और सलाह मिलती है, जिससे वे पेड़ों की सेहत सुधारने के लिए तुरंत कदम उठा सकते हैं. इस तरह यह स्मार्ट कृषि और पर्यावरण बचाने को बढ़ावा देता है.

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ट्रिवाइव के प्रभाव और परिणाम

ट्रिवाइव के पायलट फेज के दौरान, इसे भारत के कई क्षेत्रों में लगाया गया, जहां इसने 2,240 से अधिक पेड़ों की निगरानी की है. इसके नतीजे शानदार रहे हैं.

    - इस सिस्टम की मदद से पेड़ों की सेहत में 35% सुधार हुआ

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    - 740 से अधिक पेड़ सूखेपन से बचाए गए

    - 92% गंभीर केस में अलर्ट मिलने के 48 घंटे के भीतर पेड़ों को बचाने के लिए एक्शन लिया गया

    - इस पायलट प्रोजेक्ट ने लगभग 12 टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोकने में मदद की. एक स्वस्थ पेड़ सालाना लगभग 48 पाउंड CO₂ अवशोषित करता है 

डिजाइन, सेफ्टी और इनोवेशन

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Trevive की डिजाइन और सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम पर एक डिजाइन पेटेंट और तीन भारतीय कॉपीराइट्स हैं. यह सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाव के लिए एक प्लेटफॉर्म है, जो लोगों को सक्रिय भागीदार बनाता है. अबीर रोहन का यह आविष्कार पेड़ों की देखभाल को सरल, सटीक और प्रभावशाली बनाकर पर्यावरण बचाव में एक नई क्रांति ला रहा है.

पर्यावरण की रक्षा, वैश्विक लक्ष्यों के साथ

Trevive सिर्फ एक तकनीकी खोज नहीं, बल्कि एक वैश्विक सोच का हिस्सा है. यह ऐप संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण से जुड़े लक्ष्य-सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 15 (Life on Land) के बिल्कुल अनुरूप है, जिसका मकसद धरती पर जीवन, जंगल, जैव विविधता और इकोसिस्टम को बचाना और मजबूत करना है. यह ऐप खासतौर पर उन किसानों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संस्थाओं के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है जो पेड़-पौधों, जमीन और हरियाली से जुड़े काम करते हैं. ‘ट्रिवाइव’ के जरिए वे अपने पेड़ों की बेहतर निगरानी कर सकेंगे, जिससे पर्यावरण को बचाने की कोशिशें और मजबूत होंगी.

वैश्विक क्षमता और युवा-नेतृत्व वाला इनोवेशन

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Trevive वर्तमान की गंभीर पारिस्थितिक चुनौतियों के जवाब में एक युवा नेतृत्व वाले आविष्कार का सशक्त उदाहरण है. अबीर ने टेक्नोलॉजी को हथियार बनाकर पर्यावरण की चिंता का हल ढूंढ निकाला है. पेड़ों की सेहत, पानी की जरूरत, तापमान, नमी जैसे कई पहलुओं की जानकारी यह ऐप रियल टाइम में देता है. अबीर की यह पहल सिर्फ गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी काम आ सकती है. पेड़ों की देखभाल अब न तो मुश्किल रहेगी और न ही अनदेखी होगी. ट्रिवाइव ऐप के जरिए अब पर्यावरण बचाने की ये लड़ाई एक संगठित और वैज्ञानिक आंदोलन बन रही है.

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