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'पाकिस्तान तो भारत की पत्नी हो गई...', ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान हनुमान बेनीवाल ने कही ऐसी बात, ठहाकों से गूंज उठा सदन

ऑपरेशन सिंदूर पर सोमवार को लोकसभा में लंबी चर्चा चली. इस दौरान राजस्थान के नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने कुछ ऐसी बातें कहीं जिसको लेकर सदन में खूब ठहाके लगे.

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29 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
07:37 AM )
'पाकिस्तान तो भारत की पत्नी हो गई...', ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान हनुमान बेनीवाल ने कही ऐसी बात, ठहाकों से गूंज उठा सदन
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हनुमान बेनीवाल ने संसद में 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान अब भारत की पत्नी हो गई है. बेनीवाल ने पूछा कि आखिर आतंकवादी पहलगाम तक पहुंचे कैसे और वहां इतने पर्यटकों के होने के बावूजद सुरक्षा क्यों नहीं थी? उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि पीओके कब वापस लिया जाएगा?

पहलगाम तक कैसे पहुंचे आतंकवादी? 

बेनीवाल ने केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, "अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहलगाम नहीं है. वहां तक आतंकवादी कैसे पहुंच गए? वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? पूरा देश उस दिन रोया था. मोदी जी को बार-बार कह रहा था कि अब कब जागोगे, आप तो कह रहे थे पीओके पर कब्जा कर लेंगे. आपको 303, 350 सीटें दी, अबकी बार भी एनडीए को 300 के पार कराया. आखिर कब करोगे, 2014, 19 और 24 में यह बात आपने कही".

पाकिस्तान भारत की पत्नी - बेनीवाल

बेनीवाल ने कहा, "22 अप्रैल को यह घटना घटी और 8 मई की रात को 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत हुई, ये दो दिन चला आपने कहा कि पाकिस्तान घुटनों के बल आ गया. देश की मीडिया ने कहा कि कराची पोर्ट पर कब्जा कर लिया, इस्लामाबाद में झंडा फहराने वाले हैं. लगा कि हो गया काम. आपने नाम भी सिंदूर रखा. ऐसा लग रहा था भारत पाकिस्तान की मांग में सिंदूर भर रहा है. सिंदूर का मतलब यह होता है कि हमारे हिंदू धर्म के अंदर कि महिलाएं सिंदूर पति को मानती हैं और मांग भरती है. सिंदूर तो भर दिया भारत ने तो पाकिस्तान तो भारत की पत्नी हो गई, बस विदाई बाकी है, लेकर आ जाओ." बेनीवाल के इस बात को सुनते ही संसद में ठहाके गूंज उठे. पक्ष और विपक्ष के सभी सांसद जोर से हंस पड़े.

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इसके बाद दूसरा मौका तब आया जब बेनीवाल की बात पर सभी ठहाके लगाने लगे जब उन्होंने कहा कि साढ़े 10-11 बजे रात में भाषण होने की वजह से यह अखबार में नहीं छप पाएगा और सोशल मीडिया से ही काम चलाना पड़ेगा. बेनीवाल अक्सर अपने भाषणों में इस तरह की हल्की-फुल्की बातों का जिक्र करते हैं जिससे सदन का माहौल बदल जाता है. 

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