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नोएडा का मार्क हॉस्पिटल सील, ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई

ऑक्सीजन सप्लाई में रुकावट आने से मरीजों की स्थिति बिगड़ने लगी, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों में भी अफरातफरी का माहौल रहा. घटना की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम और सीएमओ मौके पर पहुंचे. जांच के दौरान पाया गया कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन किया गया था.

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04 Nov 2025
( Updated: 10 Dec 2025
11:14 PM )
नोएडा का मार्क हॉस्पिटल सील, ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई
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नोएडा के सेक्टर-66 स्थित मार्क हॉस्पिटल में लापरवाही पर अब स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है. अस्पताल में सोमवार को दूसरी बार ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अस्पताल को सील कर दिया गया है. इसके साथ ही लाइसेंस को निरस्त कर दिया गया है.

नोएडा का मार्क हॉस्पिटल सील

जानकारी के अनुसार, सोमवार को दोबारा पाइपलाइन फटने के बाद अस्पताल के अंदर हड़कंप मच गया. कई मरीजों को तत्काल अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया. मौके पर पहुंचे परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही के चलते यह हादसा दोहराया गया. 

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 अस्पताल में हुआ सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन

ऑक्सीजन सप्लाई में रुकावट आने से मरीजों की स्थिति बिगड़ने लगी, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों में भी अफरातफरी का माहौल रहा. घटना की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम और सीएमओ मौके पर पहुंचे. जांच के दौरान पाया गया कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन किया गया था. 

सीएमओ ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल को किया सील और लाइसेंस सस्पेंड 

इसके बाद सीएमओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील करने का आदेश दिया और अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड करा दिया. स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अस्पताल के सभी उपकरणों और ऑक्सीजन आपूर्ति प्रणाली का विस्तृत ऑडिट कराया जाएगा. ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. 

विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही मरीजों की जान से खिलवाड़ के बराबर है. इस तरह की घटनाओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” 

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मरीजों के परिजनों में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गहरी नाराजगी

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स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गहरी नाराजगी है. उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई से ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं. इस हादसे ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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