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कुत्ता कब काट ले, कोई नहीं जानता... आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉग लवर और विरोधी दोनों की बात सुनी जाएगी. हालिया हादसों का हवाला देते हुए कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा बताया और सुरक्षा व पशु अधिकारों के संतुलन पर जोर दिया.

कुत्ता कब काट ले, कोई नहीं जानता... आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
Supreme Court
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देश में आवारा कुत्तों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने आज फिर से सुनवाई की. सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में डॉग लवर और डॉग हेटर दोनों की बात सुनी जाएगी. कोर्ट ने कहा कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान में दो जजों को आवारा जानवरों की वजह से एक्सीडेंट हुआ है, और इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है.

दरअसल, सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि कुत्ते सड़कों पर नहीं होते, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि लगता है आपकी जानकारी पुरानी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्ता कब काटने के मूड में है और कब नहीं, यह कोई नहीं जान सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यह मामला केवल कुत्तों के अधिकार या लोगों की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि दोनों पहलुओं को संतुलित करने का है. कोर्ट ने कहा कि एक जज को पिछले हादसे में रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी और वह अभी ठीक नहीं हुए हैं. इसे गंभीरता से देखते हुए शीर्ष अदालत ने आज सभी पक्षों की बात विस्तार से सुनने का फैसला किया.

दोनों पक्षों कि सुनाना जरूरी 

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सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुत्तों के लिए पेश होने वाले और इंसानों की ओर से पेश होने वाले दोनों पक्षों को सुनना जरूरी है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या गेटेड सोसाइटी में कुत्तों के होने के लिए कोई प्रावधान होना चाहिए, जिसे RWA वोट के आधार पर तय कर सके. उनका तर्क था कि सभी लोग जानवर प्रेमी हैं, लेकिन इंसानों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. अगर कोई भैंस लाना चाहे तो क्या उसकी अनुमति दी जाएगी, क्योंकि इससे दूसरे लोगों को परेशानी हो सकती है.

कपिल सिब्बल ने क्या कहा?

शिविर में पेश सिब्बल ने अपनी दलील में कहा कि कुत्ते सिर्फ काटते ही नहीं हैं, बल्कि कभी-कभी उनका पीछा करना भी हादसों का कारण बन सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कुत्ते अक्सर कंपाउंड में रहते हैं और सड़क पर नहीं होते. सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि क्या यह सच है, क्योंकि ऐसी जानकारी पुरानी लग रही है. कोर्ट ने कहा कि बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है, और इसलिए सड़कों को कुत्तों से खाली रखने की आवश्यकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई देशभर में आवारा जानवरों की सुरक्षा और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट का यह कदम बताता है कि अब केवल कुत्तों के अधिकार पर नहीं, बल्कि उनके कारण होने वाले हादसों और लोगों की सुरक्षा पर भी बराबर ध्यान दिया जाएगा.

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बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई को देशभर के डॉग लवर और डॉग हेटर दोनों ही बड़ी गंभीरता से देख रहे हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ कानूनी रूप से नहीं, बल्कि समाज के व्यवहार और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी पड़ेगा.

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