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सत्य साईं के परम भक्त हैं निकोलस मादुरो, राष्ट्रपति बनने से पहले थे बस ड्राइवर, किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं इनका जीवन

निकोलस मादुरो का जीवन किसी फिल्मी पटकथा कम नहीं है. निकोलस को अमेरिका ने गिरफ़्तार कर लिया है. वहीं, गिरफ़्तारी के बाद इनकी एक तस्वीर सत्य साईं बाबा के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. कहा जा रहा है कि निकोलस सत्य साईं के परम भक्त हैं.

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04 Jan 2026
( Updated: 04 Jan 2026
07:55 AM )
सत्य साईं के परम भक्त हैं निकोलस मादुरो, राष्ट्रपति बनने से पहले थे बस ड्राइवर, किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं इनका जीवन
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शनिवार की सुबह काराकास में अचानक बारूद की गंध जैसे ही फैली वेनेजुएला के नागरिकों को समझ आ गया कि कोई बड़ी घटना घट चुकी है. अफवाहें तेजी से फैलीं कि अमेरिकी फौजों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले गई हैं. वहीं, जब ये पता चला कि मादुरो सत्य साईं बाबा के परम भक्त हैं, तो इनकी चर्चा और भी तेज हो गई. 

किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं निकोलस मादुरो का संघर्ष

सत्य साईं बाबा के अनुयायी निकोलस मादुरो की जीवन गाथा किसी उपन्यास या फिल्मी कहानी से कम रोचक नहीं है. 23 नवंबर 1962 को काराकास के एक सामान्य परिवार में पैदा हुए मादुरो ने कभी उच्च शिक्षा पूरी नहीं की. हाई स्कूल खत्म करने के बाद रोजी-रोटी के लिए उन्होंने बस ड्राइवर की नौकरी शुरू कर दी. इसी दौर में उन्होंने ट्रांजिट वर्कर्स यूनियन की स्थापना की. बस चलाते हुए उन्होंने राजनीति के रास्ते भी तलाश लिए. क्यूबा में प्राप्त राजनीतिक प्रशिक्षण ने उन्हें स्वर्गीय नेता ह्यूगो शावेज का सबसे विश्वसनीय सहयोगी बना दिया. शावेज की छत्रछाया में मादुरो ने विदेश मंत्री और उप-राष्ट्रपति तक का सफ़र तय किया. आख़िरकार, साल 2013 में वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति बन गए.

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सत्य साईं के परम भक्त हैं भक्त मादुरो

मादुरो के व्यक्तित्व का सबसे चौंकाने वाला पहलू उनका सत्य साईं बाबा का परम भक्त होना और भारत के प्रति श्रद्धा है. जानकारी के मुताबिक़ मादुरी और उनकी पत्नी सीलीया फ्लोरेंस भारतीय आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा के परम अनुयायी रहे हैं. साल 2005 में मादुरो विशेषकर बाबा सत्य साईं के प्रवचन सुनने के लिए आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी स्थित प्रशांति निलयम आए थे. यहां तक कि मादुरो के ऑफ़िस में भी सत्य साईं बाबा की विशाल तस्वीर लगी रहती थी. मादुरो ने वेनेजुएला में साईं संगठनों को विशेष रूप से वो सारी सुविधाएं दी जो किसी भी दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संस्थान को नसीब नहीं थी. साल 2011 में जब बाबा का निधन हुआ तो मादुरो ने वेनेजुएला में राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया था. 

विवादों से घिरा रहा मादुरो का राजनीतिक जीवन

निकोलस मादुरो का शासन कई विवादों से जुड़ा रहा. वे एक तरफ ‘सुप्रीम हैप्पीनेस मिनिस्ट्री’ जैसे मजेदार नाम वाला विभाग बनाते थे और दिवंगत नेता ह्यूगो चावेज की आत्मा से छोटी चिड़िया के रूप में बात करने का दावा करते थे. वहीं दूसरी तरफ, उन पर विपक्ष के प्रदर्शनों को बहुत क्रूर तरीके से दबाने के आरोप लगते थे. उनके शासनकाल में वेनेजुएला में बहुत तेजी से महंगाई बढ़ी, और दवाइयों की भयंकर कमी हो गई. 

मादुरो को तानाशाह कहता था विपक्ष

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वेनेजुएला की राजनीति में विपक्ष मादुरो को तानाशाह कहता था, क्योंकि वे संसद को नजरअंदाज करके सिर्फ अपने आदेशों से देश चलाते थे. वे गद्दाफी और मुगाबे जैसे विवादित नेताओं के करीबी माने जाते थे. मदुरो भारतीय गुरु सत्य साईं बाबा के बड़े भक्त थे. वे और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस साल 2005 में भारत आकर साईं बाबा से मिले थे और उनके उपदेश जैसे ‘सबको प्रेम करो’ को मानते थे.

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