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'मोदी दीवार बनकर खड़ा है...', लाल किले से PM मोदी का ट्रंप को सीधा संदेश, कहा- किसानों के हित से कोई समझौता नहीं

Independence Day 2025 Highlights: भारत ने 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. लाल किले से संबोधन में पीएम मोदी ने बिना नाम लिए अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर पलटवार करते हुए कहा कि किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों पर कोई समझौता नहीं होगा. उन्होंने आगे कहा उनकी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए दीवार की तरह खड़ी रहेगी.

'मोदी दीवार बनकर खड़ा है...', लाल किले से PM मोदी का ट्रंप को सीधा संदेश, कहा- किसानों के हित से कोई समझौता नहीं
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भारत आज अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस पूरे जोश और देशभक्ति के माहौल में मना रहा है. सुबह से ही राजधानी दिल्ली तिरंगे की शान और देशभक्ति के गीतों से गूंज रही थी. लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 12वीं बार तिरंगा फहराकर देशवासियों को संबोधित किया. इस बार का भाषण केवल स्वतंत्रता दिवस की बधाई या विकास योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों, किसानों के अधिकारों और आत्मनिर्भरता के संकल्प का भी स्पष्ट संदेश छिपा था.

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा वार किया. हाल के दिनों में अमेरिका द्वारा भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाने और ट्रेड डील में दबाव की कोशिशों ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है. इसी पृष्ठभूमि में मोदी का यह भाषण आया, जिसमें उन्होंने साफ कहा, "भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों पर कभी कोई समझौता नहीं करेगा."

किसान, पशुपालक और मछुआरे सबसे बड़ी प्राथमिकता

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के अन्नदाता, पशुपालक और मछुआरों को भारत की रीढ़ बताया. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों से जुड़ी किसी भी हानिकारक नीति के खिलाफ सरकार दीवार बनकर खड़ी है. मोदी ने चेतावनी दी कि भारत किसी भी ऐसे व्यापारिक समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो किसानों के हितों को चोट पहुंचाए. यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन को संदेश देता है, जो पिछले कई महीनों से भारतीय कृषि बाजार में अमेरिकी डेयरी उत्पादों और अनाजों के लिए रास्ता खोलने का दबाव बना रहा था. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत इन मांगों को मान लेता, तो घरेलू किसानों और पशुपालकों को भारी नुकसान होता.

पीएम मोदी का बयान ऐसा कि कभी कट्टर विरोधी भी गरने लगे गुणगान

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पीएम मोदी के दीवार वाले बयान जिसमें उन्होंने कहा कि कुछ भी हो जाए वो, किसानों के हितों से समझौता नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि मोदी दीवार बनकर खड़ा है. उनके इस बयान की महत्ता इसी से समझी जाती है कि कभी उनके कट्टर विरोधी रहे प्रो दिलीप मंडल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी तारीफ कर दी. उन्होंने कहा कि 

"स्वतंत्रता दिवस की सबसे बड़ी घोषणा: टैरिफ आएंगे-टैरिफ जाएंगे. पर मोदी है तब तक किसानों, मछुआरों और पशुपालकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. विदेशी अनाज, दूध, मछली आए और आप बर्बाद हो जाएं, ये मोदी नहीं होने देगा. वो दीवार बनकर खड़े हैं. मोदी पर निजी हमला होगा पर वे झेल लेंगे."
 
आपको बता दें कि दिलीप मंडल की एक एक दलित चिंतक, प्रोफेसर, पत्रकार और मोदी विरोधी विचारक की पहचान रही है. उनके विरोध के स्वर इतने तीखे होते थे कि इस से सवर्ण समाज चिढ़ जाता था. वहीं उन्हें सनातन विरोधी भी कहा जाने लगा था, लेकिन वही आज जब पीएम मोदी ट्रंप के खिलाफ स्टैंड ले रहे हैं तो वो मोदी का साथ भी दे रहे हैं. 
 

PM मोदी ने दिया लकीर वाला उदाहरण

ट्रंप प्रशासन के साथ बढ़ते टैरिफ विवाद के बीच प्रधानमंत्री का यह बयान महत्वपूर्ण है. विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा था कि भारत अमेरिका को कड़ा जवाब नहीं दे रहा, लेकिन लाल किले से मोदी का यह संबोधन बता गया कि भारत अब किसी दबाव में नहीं झुकेगा. दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा, "हमें अपनी ऊर्जा किसी की लकीर छोटी करने में नहीं लगानी है, बल्कि अपनी लकीर को लंबा करना है. जब हमारी लकीर लंबी होगी, तो दुनिया भी हमें सम्मान देगी." मोदी ने अपने 25 साल के राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक स्वार्थ बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, "अगर हम स्वार्थी देशों की राह पर चल पड़े, तो कोई हमें अपने जाल में नहीं फंसा पाएगा." यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी शर्तों पर सौदे करने का इरादा रखता है, न कि दबाव में आकर.

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PM मोदी ने समझाया आत्मनिर्भरता की जरूरत 

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आत्मनिर्भरता केवल व्यापार के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की समग्र क्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक है. उन्होंने चेताते हुए कहा, "जब आत्मनिर्भरता कम होती है, तो ताकत भी कम हो जाती है. जो लोग दूसरों पर अत्यधिक निर्भर रहते हैं, वे अपनी आजादी पर सवाल खड़ा कर देते हैं." यह संदेश न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति पर केंद्रित था, बल्कि देश के युवाओं, उद्यमियों और निजी क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणा था. मोदी ने स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि भारत वैश्विक चुनौतियों का सामना खुद की ताकत से कर सके.

ट्रेड डील को लेकर अटका मामला

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आपको बता दें कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत चल रही थी. अमेरिका मक्का, सोयाबीन, सेब, बादाम और एथनॉल जैसे उत्पादों पर शुल्क कम करने के साथ ही अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की मांग कर रहा था. भारत ने इन मांगों का जोरदार विरोध किया, क्योंकि इससे भारतीय किसानों पर सीधा असर पड़ता. विशेषकर डेयरी सेक्टर में, जहां लाखों छोटे किसान और पशुपालक जीविका कमाते हैं, विदेशी उत्पादों की बाढ़ उनके बाजार को खत्म कर सकती थी. इसी कारण यह डील आज तक साइन नहीं हो पाई.

क्यों अहम है यह संदेश?

भारत दुनिया की सबसे बड़ी कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. लगभग 60% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है. ऐसे में किसानों के हितों को सुरक्षित रखना केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी जरूरी है. अमेरिका जैसे देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते जरूरी हैं, लेकिन अगर यह रिश्ते घरेलू किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो लंबे समय में यह देश की आत्मनिर्भरता को कमजोर कर देंगे. मोदी का संदेश इसी संतुलन को साधने का प्रयास है कि व्यापार भी हो, लेकिन अपने हितों की कीमत पर नहीं.

बताते चलें कि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब वैकल्पिक बाजारों और साझेदारियों की तलाश करनी होगी. दक्षिण एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भारत अपने कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए बेहतर अवसर ढूंढ सकता है. साथ ही, घरेलू स्तर पर कृषि सुधार, तकनीकी अपनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करना भी जरूरी है. ऐसे में पीएम मोदी का आत्मनिर्भरता पर जोर इसी दिशा में एक कदम है. अगर भारत अपनी उत्पादन क्षमता, नवाचार और निर्यात के क्षेत्र में खुद को मजबूत कर लेता है, तो किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना आसानी से कर सकेगा.

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