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जिस पर देशकरता है भरोसा
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संविधान निर्माता, सुप्रीम कोर्ट ने जिस फैसले की पैरवी की, Modi उसे लागू करने वाले है

समान नागरिक संहिता का पिच तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लाल किले के प्राचीर से साफ संकेत दे दिए कि उनकी सरकार देश में यूसीसी लाने की तरफ कदम बढ़ाने जा रही है। पीएम ने संविधान निर्माताओं, संविधान की भावना और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि देश में भेदभाव वाले कानून लागू नहीं रह सकते

संविधान निर्माता, सुप्रीम कोर्ट ने जिस फैसले की पैरवी की, Modi उसे लागू करने वाले है
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PM Narendra Modi : PM Narendra Modi ने इतिहास रचते हुए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्यारहवीं बार लाल किले की प्राचीर से देश का संबोधन किया। और जिस अंदाज में किया उसे देखकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी मुस्कुराने लगे। लेकिन विरोधियों का मत अलग है और उनका कहना है कि बैसाखी की सरकार है कितने दिन चलेगी कुछ कहा नहीं जा सकता । लेकिन जिस अंदाज में लाल किले से मोदी दहाड़े उस दहाड़ ने बता दिया कि वो उसी अंदाज में काम करेगें जिस अंदाज में करते आए है। प्रधानमंत्री ने लाल किले के बता दिया कि जिस कानून को 77 साल पहले लागू हो जाना चाहिए था, उसकी पिच मोदी ने तैयार कर ली है, और बस वो वक्त आने वाला है जब धमाका होगा।और उस धमाके की जो रोशनी होगी वो देशभर में बिखर जाएगी। मोदी के तीसरे टर्म में देश में यूसीसी लागू होकर रहेगा। ये मोदी ने साफ कर दिया है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे कानून को देश बर्दाश्त नहीं कर सकता है। जो धार्मिक आधार पर विभाजन करें।ऐसे भेदभावकारी कानूनों से देश को आजाद कराना होगा।तो मोदी के भाषण से साफ हो जाता है कि तीसरी बार में देश में यूसीसी लागू होने वाला है। संविधान निर्मातोओं का जो सपना है जिसे पिछली सरकार पूरा नहीं कर सकी, वो मोदी करने वाले है।और संविधान के मुताबिक ही करने वाले है। क्योंकि संविधान के नीति निर्देशक तत्व में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एकसमान नागरिक संहिता लागू हो। संविधान का अनुच्छेद 44 में कहा गया है, 'राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।

संविधान भी कहता है सुप्रीम कोर्ट भी 1985 से लगातार कह रहा है कि देश को समान नाजरिक कानून की जरुरत है, और मोदी का भी तीसरा ऐजेंड़ा यही है।राम मंदिर और धारा 370 के बाद मोदी इसी एजेंडे पर ध्यान लगाए हुए है। उत्तराखंड़ से शुरुआत करके हालात का जायजा ले चुके है, असम और गुजरात में भी ड्राफ्टिंग चल रही है, यूपी सरकार भी इस मुद्दे पर काम कर रही है।तो ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि कब मोदी इतिहास रचते है, कब देश को एक कानून के धागे में पिरोते है।और जिन सांप्रदायिक कानूनों की बेड़ियों में देश जकड़ा है उनसे कब निजात मिलता है। 

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