×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

'उदयपुर फाइल्स’ पर रोक की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचे मौलाना मदनी, आखिर कौन सी सच्चाई के सामने आने का सता रहा डर!

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने 'उदयपुर फाइल्स' फिल्म पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट, मुंबई हाईकोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. उन्होंने कहा कि यह फिल्म समाज में भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ है.

Author
06 Jul 2025
( Updated: 09 Dec 2025
09:12 PM )
'उदयपुर फाइल्स’ पर रोक की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचे मौलाना मदनी, आखिर कौन सी सच्चाई के सामने आने का सता रहा डर!
Advertisement

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने 'उदयपुर फाइल्स' फिल्म पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट, मुंबई हाईकोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. यह फिल्म 11 जुलाई को रिलीज होने वाली है. फिल्म की कहानी उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या, ज्ञानवापी विवाद, और नूपुर शर्मा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आधारित बताई जा रही है. याचिका में आशंका जताई गई है कि फिल्म से सामाजिक तनाव और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है, इसलिए इसकी रिलीज पर रोक लगाई जाए.

'उदयपुर फाइल्स' पर जमीअत उलेमा-ए-हिंद का ऐतराज़, फिल्म को बताया नफरती
जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने 'उदयपुर फाइल्स' फिल्म को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है. संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यह फिल्म समाज में भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ है. उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म के ट्रेलर में अशोभनीय और भड़काऊ टिप्पणियां की गई हैं, जो देश की अमन-शांति को प्रभावित कर सकती हैं.मौलाना मदनी का कहना है कि फिल्म एक विशेष वर्ग और धार्मिक शैक्षणिक संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाने की साज़िश का हिस्सा लगती है. उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि सेंसर बोर्ड ने ऐसी फिल्म को पास कैसे कर दिया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म के पीछे कुछ ऐसी ताक़तें सक्रिय हैं जो देश की बहुसंख्यक आबादी के बीच एक विशेष समुदाय के प्रति नफ़रत फैलाना चाहती हैं.

सांप्रदायिक सौहार्द को नुक़सान पहुंचा सकता है- मौलाना मदनी
मौलाना मदनी ने कहा कि फिल्म का 2 मिनट 53 सेकंड का जो ट्रेलर जारी किया गया है, वह ऐसे डायलॉग्स और दृश्यों से भरा है जो देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुक़सान पहुंचा सकते हैं. फिल्म में 2022 में उदयपुर में हुई एक घटना को आधार बनाया गया है. लेकिन ट्रेलर से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि फिल्म का मकसद एक विशेष धार्मिक समुदाय को नकारात्मक और पक्षपाती रूप में पेश करना है, जो उस समुदाय के लोगों के सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. हमने इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए क़ानूनी लड़ाई का रास्ता चुना है और सेंसर बोर्ड को भी इसमें एक पक्षकार बनाया है, क्योंकि उसका अपराध उन लोगों से कम नहीं है, जिन्होंने इस घृणित फिल्म को बनाया है.

Advertisement

मौलाना मदनी ने कहा कि फिल्म का 2 मिनट 53 सेकंड का जो ट्रेलर जारी किया गया है, वह ऐसे डायलॉग्स और दृश्यों से भरा है जो देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुक़सान पहुंचा सकते हैं. फिल्म में 2022 में उदयपुर में हुई एक घटना को आधार बनाया गया है. लेकिन ट्रेलर से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि फिल्म का मकसद एक विशेष धार्मिक समुदाय को नकारात्मक और पक्षपाती रूप में पेश करना है, जो उस समुदाय के लोगों के सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. हमने इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए क़ानूनी लड़ाई का रास्ता चुना है और सेंसर बोर्ड को भी इसमें एक पक्षकार बनाया है, क्योंकि उसका अपराध उन लोगों से कम नहीं है, जिन्होंने इस घृणित फिल्म को बनाया है.

'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग' 
याचिका वकील फ़ुजैल अय्यूबी ने तैयार की है. याचिका में कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग करते हुए फिल्म में ऐसे दृश्य दिखाए गए हैं, जिनका इस्लाम, मुसलमानों और देवबंद से कोई लेना-देना नहीं है. ट्रेलर से साफ़ झलकता है कि यह फिल्म मुस्लिम-विरोधी भावनाओं से प्रेरित है.

यह भी पढ़ें

बता दें आपको कि उदयपुर फाइल्स फिल्म का 2 मिनट 53 सेकंड का एक ट्रेलर सामने आया है. इसमें फिल्म की छोटी सी झलकियां दिखाई गई है. उसमें ज्ञानवापी मस्जिद जैसे मामलों का भी जिक्र किया गया है.  ये मामले वर्तमान में वाराणसी की ज़िला अदालत और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं. फिल्म को सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र जारी होने के बाद 11 जुलाई को रिलीज होने वाली है. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें