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मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक, ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी भारत की पहली रोड-कम-रेल टनल, कनेक्टिविटी और सिक्योरिटी के लिए खास!

मोदी कैबिनेट ने असम में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रोड-कम-रेल टनल को मंजूरी दे दी है. ये दुनिया की दूसरी और भारत की इस प्रकार की पहली अंडरवाटर टनल होगी. ये ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी, जिसकी लंबाई 15.79 किलोमीटर होगी.

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15 Feb 2026
( Updated: 15 Feb 2026
12:00 PM )
मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक, ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी भारत की पहली रोड-कम-रेल टनल, कनेक्टिविटी और सिक्योरिटी के लिए खास!
अंडरवाटर टनल (सांकेतिक तस्वीर)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली अंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल परियोजना को मंजूरी दे दी है. 18,662 करोड़ रुपए की कुल पूंजी लागत से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर विकसित की जाने वाली यह 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना एनएच-15 पर गोहपुर से नुमालीगढ़ (एनएच-715) तक तैयार की जाएगी.

ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी रोड-कम-रेल टनल!

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सबसे अहम हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली 15.79 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जिसे सड़क और रेल दोनों यातायात के लिए डिजाइन किया गया है. इसे भारत की पहली और दुनिया की दूसरी अंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल बताया जा रहा है.

वर्तमान में एनएच-715 पर स्थित नुमालीगढ़ और एनएच-15 पर स्थित गोहपुर के बीच की दूरी लगभग 240 किलोमीटर है, जो एनएच-52 पर सिलघाट के पास कालियाभोमरा सड़क पुल से होकर गुजरती है. यह मार्ग नुमालीगढ़, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बिश्वनाथ कस्बे से होकर जाता है और इसे तय करने में करीब छह घंटे का समय लगता है. बढ़ते यातायात दबाव, भौगोलिक चुनौतियों और लंबी दूरी के कारण लोगों और माल की आवाजाही में कठिनाइयां आती हैं. इन समस्याओं के समाधान के लिए ब्रह्मपुत्र के नीचे 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हरित परिवहन परियोजना विकसित करने का प्रस्ताव लाया गया है, जो यात्रा समय में भारी कमी लाएगी और संपर्क को अधिक सुगम बनाएगी.

यह परियोजना दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों-एनएच-15 और एनएच-715—को आपस में जोड़ेगी और दो रेलवे लाइनों से भी जुड़ेगी. गोहपुर की ओर यह एनएफआर के रंगिया डिवीजन के अंतर्गत रंगिया-मुकोंगसेलेक रेलवे खंड से जुड़ेगी, जबकि नुमालीगढ़ की ओर यह एनएफआर के तिनसुकिया डिवीजन के अंतर्गत फुरकटिंग-मारियानी लूप लाइन खंड से संपर्क स्थापित करेगी. इस तरह सड़क और रेल नेटवर्क का एकीकृत ढांचा तैयार होगा, जिससे बहु-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी.

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परियोजना 11 आर्थिक केंद्रों, 3 सामाजिक केंद्रों, 2 पर्यटन केंद्रों और 8 लॉजिस्टिक्स केंद्रों से जुड़कर क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगी. इसके अलावा 4 प्रमुख रेलवे स्टेशनों, 2 हवाई अड्डों और 2 अंतर्देशीय जलमार्गों से बेहतर संपर्क सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे इंटर-स्टेट फ्रेट मूवमेंट अधिक तेज और प्रभावी होगा. उद्योगों और सेवा क्षेत्र को अपने सप्लाई रूट अनुकूलित करने, लागत घटाने और व्यापक पूर्वोत्तर बाजार में संचालन बढ़ाने का अवसर मिलेगा.

पूर्वोत्तर को मोदी सरकार की बड़ी सौगात!

सीसीईए के अनुसार इस परियोजना से असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा. माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी. सरकार का अनुमान है कि यह परियोजना लगभग 80 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए आय और आजीविका के नए अवसर खुलेंगे. आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक, व्यापारिक और सेवा गतिविधियों का विस्तार होगा, जिससे समग्र क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.

असम को अंडरवाटर टनल पर क्या बोले हिमंत बिस्वा सरमा!

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाली नुमालीगढ़ टनल रेल आवागमन की सुविधा वाली दुनिया की दूसरी अंडरवॉटर टनल होगी. उन्होंने इसे पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स के लिए ‘गेम-चेंजर’ करार दिया.

बाढ़ से भी अछूता अंडरवाटर टनल!

मुख्यमंत्री के अनुसार यह टनल बाढ़ के दौरान भी साल भर निर्बाध संपर्क बनाए रखने में सक्षम होगी और आपातकालीन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में अहम भूमिका निभाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि रेल परिचालन को सपोर्ट करने की इसकी क्षमता इसे तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है और यह परियोजना असम को पूर्वोत्तर के एक प्रमुख कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी.

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रणनीतिक दृष्टिकोण से यह परियोजना प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करेगी, व्यापार और औद्योगिक विकास के नए द्वार खोलेगी और रक्षा लॉजिस्टिक्स को भी मजबूत बनाएगी. केंद्र के समर्थन से असम में तेज गति से हो रहे बुनियादी ढांचा विकास का यह एक बड़ा उदाहरण है, जो पूर्वोत्तर भारत को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.

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