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खेलो इंडिया ने नियमों में बदलाव कर पंजाब की यूनिवर्सिटी को पीछे धकेला? गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की

पंजाब की एक प्रमुख सरकारी यूनिवर्सिटी गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने इन बदलावों को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की है. शिकायत में कहा गया है कि अगर ऐसे नियमों के तहत प्रतियोगिताएं कराई जाती रहीं, तो खेलों की ईमानदारी और MAKA ट्रॉफी जैसी राष्ट्रीय पहचान की गरिमा दोनों को नुकसान पहुंचेगा.

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14 Jan 2026
( Updated: 14 Jan 2026
08:25 AM )
खेलो इंडिया ने नियमों में बदलाव कर पंजाब की यूनिवर्सिटी को पीछे धकेला? गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की
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देश के यूनिवर्सिटी खेलों की सबसे प्रतिष्ठित पहचान मानी जाने वाली मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स इस समय गंभीर सवालों के घेरे में हैं. आरोप हैं कि हाल के नियम बदलावों ने खेलों की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है और पंजाब सहित देश की सरकारी यूनिवर्सिटीज़ को पीछे धकेल दिया है, जबकि बीजेपी नेता की एक निजी यूनिवर्सिटी को असमान फायदा मिला है. पिछले साल भी इसी बीजेपी नेता की यूनिवर्सिटी को फायदा पहुंचाने के लिए अंतिम समय पर नियमों में बदलाव किया गया था. नियमों में बदलाव से पहले इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी के सिर्फ तीन मेडल आते थे. पिछले सेशन के दौरान इस यूनिवर्सिटी के मेडल तीन से बढ़कर 32 हो गए थे. जोकि मौजूदा सेशन में मेडल बढ़कर 42 हो गए. इसी बात को लेकर पंजाब में विवाद छिड़ गया है.

MAKA ट्रॉफी का 65 साल पुराना ढांचा बदला गया

करीब 65 साल से MAKA ट्रॉफी पूरे साल के खेल प्रदर्शन पर दी जाती रही है. इसमें इंटरनेशनल टूर्नामेंट, AIU चैंपियनशिप और अलग-अलग खेलों में निरंतर प्रदर्शन को महत्व मिलता था. लेकिन 2023–24 के सत्र में, खेल सत्र खत्म होने के बाद अचानक नियम बदल दिए गए. पहले जहां KIUG का वेटेज सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत था, उसे पीछे की तारीख से लगभग 100 प्रतिशत कर दिया गया. इसका मतलब यह हुआ कि पूरे साल का प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और AIU प्रतियोगिताएं लगभग बेअसर हो गईं. इस बदलाव का सीधा फायदा उसी यूनिवर्सिटी को मिला, जिसने KIUG में ज्यादा गोल्ड मेडल जीते थे.

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यहीं से विवाद और गहराता है. 2024–25 में कैनोइंग और कयाकिंग जैसे खेलों को अचानक खेलों इंडिया गेम्स में शामिल कर लिया गया. ये फैसले भी खेल सत्र के बीच या बाद में लिए गए, जब अधिकतर यूनिवर्सिटीज़ अपनी योजना और बजट पहले ही तय कर चुकी थीं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां इन खेलों के करीब 10 मान्य ओलंपिक इवेंट्स हैं, वहीं KIUG में इन्हें बढ़ाकर लगभग 30 इवेंट्स कर दिया गया, जिनमें कई नॉन-ओलंपिक कैटेगरी भी शामिल थीं. ये ऐसे खेल हैं जो पंजाब की यूनिवर्सिटीज़ में आम तौर पर खेले जाते हैं और ही देश की अधिकतर पब्लिक यूनिवर्सिटीज़ में. ये खेल महंगे हैं, इनके लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर और ज्यादा पैसा चाहिए, जो विदेशी संस्थानों के पास ही होता है.

एक यूनिवर्सिटी को मिला सीधा फायदा

आरोप है कि नियमों में यह फेरबदल जानबूझकर किया गया ताकि एक ऐसी यूनिवर्सिटी को फायदा मिल सके, जिसका सीधा संबंध बीजेपी से जुड़े एक नेता से बताया जा रहा है. इन्हीं खेलों में असामान्य रूप से ज्यादा इवेंट्स कराए गए, जिससे मेडल जीतने के मौके भी कई गुना बढ़ गए. इससे मेडल टेबल का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और पंजाब की यूनिवर्सिटीज़ मुकाबले से बाहर होती चली गईं.

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नए खेल, ज्यादा इवेंट्स और महंगा इंफ्रास्ट्रक्चर

मामले को और गंभीर बनाता है खिलाड़ियों की एंट्री को लेकर उठा सवाल. आरोप है कि कुछ खिलाड़ियों को तय समय सीमा के बाद भी खेलने दिया गया, जबकि उनकी एंट्री आधिकारिक सूची में मंज़ूर नहीं थी. नियमों के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए था, फिर भी इन खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और मेडल भी जीते. इससे पूरे आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं.

खिलाड़ियों की एंट्री पर भी सवाल

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यह भी सवाल उठ रहा है कि जब खेलो इंडिया जैसे आयोजनों में सरकारी पैसा लगता है, तो क्या नियम ऐसे बनाए जाने चाहिए जो कुछ चुनिंदा यूनिवर्सिटीज़ को फायदा पहुंचाएं. खेलों का मकसद बराबरी का मौका देना होता है, कि संसाधनों के आधार पर जीत तय करना.

पंजाब की एक प्रमुख सरकारी यूनिवर्सिटी गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने इन बदलावों को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की है. शिकायत में कहा गया है कि अगर ऐसे नियमों के तहत प्रतियोगिताएं कराई जाती रहीं, तो खेलों की ईमानदारी और MAKA ट्रॉफी जैसी राष्ट्रीय पहचान की गरिमा दोनों को नुकसान पहुंचेगा.

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अब नजरें युवा मामले एवं खेल मंत्रालय और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया पर हैं. सवाल साफ है क्या नियमों में किए गए इन बदलावों की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह मामला भी यूं ही दबा दिया जाएगा.

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