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सबसे लंबा भाषण... इंदिरा गांधी भी रह गईं पीछे! लाल किले की प्राचीर से भाषण देते ही PM मोदी ने बनाए कई रिकॉर्ड, जानें कैसे रचा नया कीर्तिमान

Independence Day 2025 Highlights: स्वतंत्रता दिवस 2025 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से 103 मिनट का भाषण देकर अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ा. इससे पहले 2024 में उनका भाषण 98 मिनट का था. 2015 में पीएम मोदी ने 88 मिनट का भाषण देकर नेहरू के 72 मिनट के रिकॉर्ड को तोड़ा था और तब से कई बार अपना रिकॉर्ड आगे बढ़ाया है. इसके साथ ही पीएम मोदी लाल किले से सबसे ज्यादा बार झंडा फहराने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बन गए है.

सबसे लंबा भाषण... इंदिरा गांधी भी रह गईं पीछे! लाल किले की प्राचीर से भाषण देते ही PM मोदी ने बनाए कई रिकॉर्ड, जानें कैसे रचा नया कीर्तिमान
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देश ने 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस का ऐतिहासिक उत्सव पूरे जोश और गर्व के साथ मनाया. दिल्ली के लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया. इस बार उनका भाषण न केवल संदेशों से भरपूर रहा बल्कि समय सीमा के मामले में भी एक नया कीर्तिमान बना गया. पीएम मोदी ने 103 मिनट से अधिक समय तक देश को संबोधित किया और इस तरह उन्होंने अपने ही बनाए पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. इसके साथ ही उन्होंने लाल किले से सबसे ज़्यादा झंडा फहराने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बन गए है. 

खुद का ही रिकॉर्ड तोड़ा

प्रधानमंत्री मोदी का यह नया रिकॉर्ड पहले के आंकड़ों को पीछे छोड़ता है. साल 2024 में उन्होंने लाल किले से 98 मिनट का भाषण दिया था. जो तब तक का सबसे लंबा भाषण माना गया. उससे पहले, 2015 में पीएम मोदी ने 88 मिनट का भाषण देकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के 72 मिनट के रिकॉर्ड को तोड़ा था. तब यह चर्चा का विषय बना था कि आज़ादी के बाद पहली बार कोई प्रधानमंत्री इतनी लंबी अवधि तक लाल किले से राष्ट्र को संबोधित कर रहा है. समय के साथ पीएम मोदी ने अपने ही रिकॉर्ड कई बार तोड़े और इस साल 103 मिनट से अधिक बोलकर नया इतिहास रच दिया.

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रिकॉर्ड्स के मामले में भी आगे

लाल किले से भाषण देना केवल एक परंपरा नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के लिए राष्ट्र के सामने अपनी दृष्टि और योजनाओं को साझा करने का सबसे बड़ा मंच है. पीएम मोदी ने इस मंच का इस्तेमाल हर बार मजबूती से किया है. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका सबसे छोटा भाषण भी 65 मिनट का रहा, जो उस समय के हिसाब से भी अन्य प्रधानमंत्रियों से लंबा था. वहीं, अगर सबसे छोटे भाषण की बात करें तो यह रिकॉर्ड जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नाम है, जिन्होंने महज 14 मिनट में अपना संबोधन समाप्त किया था. उनके बाद अटल बिहारी वाजपेयी का 25 मिनट और डॉ. मनमोहन सिंह का 32 मिनट का भाषण सबसे छोटा माना जाता है.

लगातार 12वीं बार तिरंगा फहराने का गौरव

इस स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने एक और खास रिकॉर्ड अपने नाम किया. उन्होंने लाल किले पर लगातार 12वीं बार तिरंगा फहराया. यह उपलब्धि अब तक केवल दो प्रधानमंत्रियों ने हासिल की है. सबसे पहले जवाहर लाल नेहरू ने लगातार 17 बार लाल किले से तिरंगा फहराया था. इंदिरा गांधी के नाम यह उपलब्धि 11 बार तक रही. इस साल पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़कर खुद को इस सूची में दूसरे स्थान पर स्थापित कर लिया.

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देश के नाम महत्वपूर्ण संदेश

इस बार का भाषण लंबा जरूर था, लेकिन इसके हर हिस्से में देश के लिए कुछ नया संदेश और विज़न शामिल था. पीएम मोदी ने अपनी सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और आने वाले वर्षों के लिए रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने गरीब कल्याण, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, महिला सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी. भाषण में उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के विचार को दोहराते हुए हर नागरिक से इसमें योगदान देने की अपील भी की.

लंबे भाषणों की परंपरा और राजनीति

स्वतंत्रता दिवस पर लंबे भाषण देना हमेशा से चर्चा का विषय रहा है. जहां कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री की गहन दृष्टि और संकल्प का प्रतीक मानते हैं, वहीं आलोचक इसे समय प्रबंधन का सवाल भी बनाते हैं. लेकिन यह सच है कि लंबा भाषण प्रधानमंत्री को अपने विज़न को विस्तार से समझाने और जनता के बीच अपनी योजनाओं को मजबूती से प्रस्तुत करने का अवसर देता है. पीएम मोदी के भाषणों का अंदाज जोशीला और भावनात्मक होता है, जिससे यह सिर्फ आंकड़ों और योजनाओं का विवरण भर नहीं बल्कि एक प्रेरक संदेश भी बन जाता है.

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जनता की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर सोशल मीडिया पर इस बार के भाषण को लेकर खूब प्रतिक्रियाएं आईं. कुछ ने इसे प्रधानमंत्री के नेतृत्व और ऊर्जा का प्रमाण बताया तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में इसे "सहनशक्ति का टेस्ट" कह दिया. हालांकि, अधिकांश लोगों ने भाषण में शामिल विजन और योजनाओं को सकारात्मक रूप से लिया. कई लोगों ने पीएम मोदी के लगातार रिकॉर्ड तोड़ने के जज़्बे की तारीफ की.

भविष्य की झलक

बताते चलें कि हर साल 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से होने वाला संबोधन केवल एक परंपरा नहीं बल्कि यह देश की दिशा और दशा का आईना होता है. पीएम मोदी का यह नया रिकॉर्ड आने वाले वर्षों में एक मानक की तरह देखा जाएगा. अब देखना होगा कि क्या वह भविष्य में खुद का यह रिकॉर्ड फिर तोड़ेंगे या यह आंकड़ा लंबे समय तक कायम रहेगा.

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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साबित किया है कि चाहे भाषण की लंबाई हो या तिरंगा फहराने की निरंतरता, वे रिकॉर्ड बनाने और तोड़ने में माहिर हैं. 103 मिनट से अधिक का भाषण और लगातार 12वीं बार तिरंगा फहराना न केवल उनकी सफल राजनीतिक यात्रा की उपलब्धि है बल्कि यह उनके नेतृत्व की निरंतरता और जनता के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता का भी प्रमाण भी है. 

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