×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

जानें प्रस्तावना से 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द हटाने को लेकर मोदी सरकार ने संसद में दिया क्या जवाब? RSS कर रहा था हटाने की मांग!

सरकार ने संसद में कहा कि संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्दों पर पुनर्विचार करने या उन्हें हटाने की वर्तमान में कोई योजना नहीं है. सरकार ने यह भी कहा कि उसने संविधान की प्रस्तावना से इन दोनों शब्दों को हटाने के लिए औपचारिक रूप से कोई कानूनी या संवैधानिक प्रक्रिया नहीं शुरू की है.

Author
25 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:31 AM )
जानें प्रस्तावना से 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द हटाने को लेकर मोदी सरकार ने संसद में दिया क्या जवाब? RSS कर रहा था हटाने की मांग!
Advertisement

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि हमारे मूल संविधान में सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्द नहीं थे. आपातकाल के समय इन शब्दों को भारत की प्रस्तावना में जोड़ा गया है और बाद में इन्हें निकालने की कोशिश नहीं हुई. अब इसपर सरकार ने जवाब दिया है. सरकार ने संसद में कहा कि संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्दों पर पुनर्विचार करने या उन्हें हटाने की वर्तमान में कोई योजना नहीं है. सरकार ने यह भी कहा कि उसने संविधान की प्रस्तावना से इन दोनों शब्दों को हटाने के लिए औपचारिक रूप से कोई कानूनी या संवैधानिक प्रक्रिया नहीं शुरू की है. इस बात की जानकारी कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी. उन्होंने कहा कि कुछ सार्वजनिक या राजनीतिक क्षेत्रों में इस पर चर्चा या बहस हो सकती है, लेकिन इन शब्दों के संशोधन के संबंध में सरकार द्वारा किसी औपचारिक फैसले या प्रस्ताव की घोषणा नहीं की गई है.

संविधान के प्रस्तावना में नहीं होगा बदलाव
कानून मंत्री ने ये स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों पर पुनर्विचार करने या प्रस्तावना से उन शब्दों को हटाने की वर्तमान में कोई योजना या इरादा नहीं है. मंत्री ने कहा कि प्रस्तावना में संशोधन के संबंध में किसी भी चर्चा के लिए गहन विचार-विमर्श और व्यापक सर्व-सम्मति की आवश्यकता होगी, लेकिन अब तक सरकार ने इन प्रावधानों में बदलाव करने के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं शुरू की है.
मेघवाल ने बताया कि नवंबर 2024 में, उच्चतम न्यायालय ने 1976 के संशोधन (42वां संविधान संशोधन) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को यह उल्लेख करते हुए खारिज कर दिया था कि संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति प्रस्तावना तक विस्तारित है.

यह भी पढ़ें

संविधान का अभिन्न हिस्सा है दोनों शब्द 
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संदर्भ में ‘समाजवादी’ एक कल्याणकारी राज्य (शासन) को व्यक्त करता है और निजी क्षेत्र के विकास में बाधा नहीं डालता है, वहीं ‘पंथनिरपेक्ष’ संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा है.
कुछ सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा बनाए गए माहौल के बारे में मेघवाल ने कहा कि कुछ समूह हो सकता है कि अपनी राय व्यक्त कर रहे हों, या इन शब्दों पर पुनर्विचार की वकालत कर रहे हों. उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां, मुद्दे पर सार्वजनिक विमर्श का माहौल तो बना सकती हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि सरकार के आधिकारिक रुख या कार्रवाई को प्रतिबिंबित करे.
दरअसल, आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि हमारे मूल संविधान में सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्द नहीं थे. आपातकाल के समय इन शब्दों को भारत की प्रस्तावना में जोड़ा गया है और बाद में इन्हें निकालने की कोशिश नहीं हुई. होसबाले ने कहा कि जब हमारे मूल संविधान में ये शब्द थे ही नहीं तो क्या अब इन शब्दों को हमारे संविधान में रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस पर विचार होना चाहिए.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें