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J&K पुलिस ने बड़ी साजिश का किया पर्दाफाश... दिल्ली से सटे फरीदाबाद में डॉक्टर के घर से 350 किलो RDX और 2 AK-47 बरामद

हरियाणा के फरीदाबाद में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक डॉक्टर के किराए के घर से 300 किलो आरडीएक्स, दो AK-47 राइफल और 84 कारतूस बरामद किए हैं. यह कार्रवाई अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) से जुड़ी जांच के तहत हुई. आरोपी डॉक्टर अदील अहमद राथर, जो पहले GMC अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट रह चुका है, को गिरफ्तार किया गया है.

J&K पुलिस ने बड़ी साजिश का किया पर्दाफाश... दिल्ली से सटे फरीदाबाद में डॉक्टर के घर से 350 किलो RDX और 2 AK-47 बरामद
Source: Social Media
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देश की राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद में एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों को हिला दिया. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर यहां एक डॉक्टर के किराए के घर पर छापा मारा, जहां से भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद किए गए. पुलिस को मौके से करीब 300 किलो आरडीएक्स, दो एके-47 राइफल, 84 कारतूस और कई केमिकल मिले हैं. यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी. फिलहाल इस मामले की जांच कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं क्योंकि बरामद आरडीएक्स की मात्रा किसी बड़े आतंकी षड्यंत्र की ओर इशारा करती है.

जम्मू पुलिस का बड़ा ऑपरेशन 

अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष टीम ने फरीदाबाद पुलिस के सहयोग से यह ऑपरेशन चलाया. जिस डॉक्टर के घर से विस्फोटक मिले, उसने कुछ महीनों पहले यह कमरा किराए पर लिया था. शुरुआती जांच में पता चला है कि यह मामला अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) नामक आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है. यह वही संगठन है, जिसे 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर ज़ाकिर मूसा ने बनाया था. इस संगठन का मकसद कश्मीर में शरिया कानून लागू कर एक इस्लामिक राज्य की स्थापना करना और भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ना था. पुलिस सूत्रों का कहना है कि अब तक तीन डॉक्टर इस संगठन से जुड़े पाए गए हैं. इनमें से दो डॉक्टरों अदील अहमद राथर (अनंतनाग निवासी) और मुज़म्मिल शकील (पुलवामा निवासी) को सहारनपुर और फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीसरा डॉक्टर अभी फरार बताया जा रहा है.

GMC अनंतनाग में नौकरी कर चुका था अदील राथर

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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य आरोपी अदील अहमद राथर जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रह चुका है. कुछ हफ्ते पहले ही GMC में उसके निजी लॉकर से एक AK-47 राइफल बरामद की गई थी. यह कार्रवाई जॉइंट इंटरोगेशन सेंटर (JIC) अनंतनाग की मदद से की गई थी. पुलिस के अनुसार, अदील ने 24 अक्टूबर 2024 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, और उसके बाद से ही वह रडार पर था. जांच एजेंसियों का मानना है कि अदील और उसके सहयोगी डॉक्टर, आतंकवादी संगठन AGH के नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में लगे हुए थे.

कहां से आया 300 किलो आरडीएक्स?

पुलिस द्वारा इस खुलासे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक फरीदाबाद जैसे शहर तक कैसे पहुंच गया. पुलिस इस दिशा में गंभीरता से जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में कई राज्यों में फैले नेटवर्क के संकेत मिले हैं. एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन डॉक्टरों की आतंकियों से कितनी गहरी साठगांठ थी और यह नेटवर्क किन-किन राज्यों में फैला हुआ है. पुलिस को शक है कि आरडीएक्स की सप्लाई जम्मू-कश्मीर से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के रास्ते भेजी गई होगी. सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में अंतरराज्यीय मॉड्यूल के होने की संभावना से भी इंकार नहीं कर रही हैं.

जांच में जुटी कई एजेंसियां

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इस केस की गंभीरता को देखते हुए एनआईए और इंटेलिजेंस ब्यूरो भी जांच में शामिल हो गए हैं. फरीदाबाद पुलिस ने डॉक्टर के किराए के मकान को सील कर दिया है और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस लगातार गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी साझा कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल विस्फोटक बरामदगी का नहीं, बल्कि एक बड़े आतंकी नेटवर्क के पुनर्जीवित होने का संकेत है. सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर सतर्क हैं कि कहीं डॉक्टरों की आड़ में देश के भीतर से ही आतंकी संगठन अपनी जड़ें न फैला रहे हों.

देशभर में हाई अलर्ट

इस घटना के बाद हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है. रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जांच तेज कर दी गई है. अधिकारी मानते हैं कि अगर यह विस्फोटक किसी आतंकी हमले के लिए इस्तेमाल होता, तो नुकसान की कल्पना भी डरावनी होती. फिलहाल सभी आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और पूछताछ जारी है. जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं.

बताते चलें कि यह मामला न केवल आतंकी नेटवर्क की भयावहता को उजागर करता है, बल्कि इस बात की चेतावनी भी देता है कि अब आतंकवादियों की रणनीति बदल चुकी है. वे अब बंदूकधारियों के बजाय शिक्षित और प्रशिक्षित लोगों की मदद से अपने मंसूबों को पूरा करने की कोशिश में हैं.

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