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हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जमीयत उलेमा-ए-हिंद, भड़काऊ भाषण के आरोपों ने बढ़ाई सियासी तपिश

हिमंत बिस्वा सरमा के ‘मियां’ वाले बयान के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गया है और असम के सीएम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है.

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02 Feb 2026
( Updated: 02 Feb 2026
01:51 PM )
हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जमीयत उलेमा-ए-हिंद, भड़काऊ भाषण के आरोपों ने बढ़ाई सियासी तपिश
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हेट स्पीच देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. हेट स्पीच को लेकर यह याचिका जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हिमांत बिस्वा सरमा के खिलाफ दाखिल की है. याचिका में सीएम के बयान को नफरत फैलाने वाला और दो समुदायों के बीच बंटवारा फैलाने वाला बताया गया है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दाखिल की याचिका

याचिका में 27 जनवरी को असम के मुख्यमंत्री के द्वारा दिए गए उस बयान का जिक्र किया गया है, जिसमें 4 से 5 लाख मियां वोटर्स को चुनावी लिस्ट से खारिज करने की बात कही गई है. इसके साथ ही याचिका में आपत्तिजनक शब्द 'मियां' का भी जिक्र है. दलील ये भी दी गई है कि असम में 'मियां' शब्द मुस्लिमों के लिए अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल किया जाता है.

‘मुख्यमंत्री का बयान गैर-संवैधानिक है’

जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि असम के सीएम के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए जाएं ताकि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह के बयान आगे न दे. इससे पहले ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के 'मियां' वाली टिप्पणी पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान गैर-संवैधानिक है. इसलिए उन्हें कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है.

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‘हिमंता बिस्वा सरमा एक विवादित नाम और मुख्यमंत्री हैं’

साजिद रशीदी ने कहा, "हिमंता बिस्वा सरमा एक विवादित नाम और मुख्यमंत्री हैं, जो अक्सर गैर-संवैधानिक बयान देते हैं. देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष है और यह अनिवार्य करता है कि कोई भी मुख्यमंत्री या मंत्री किसी के प्रति बिना किसी भेदभाव के काम करने की शपथ ले. लेकिन ये खुलेआम कह रहे हैं कि अगर कोई मुस्लिम रिक्शेवाला हो तो पांच रुपए की जगह चार रुपए दो. उन्हें आर्थिक तौर पर कमजोर करो.

‘नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए’

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साजिद रशीदी ने आगे कहा, "यह मुख्यमंत्री के बयान नहीं हैं, बल्कि उस व्यक्ति के बयान हैं, जिनके दिमाग में इस्लामोफोबिया बैठ चुका है.” उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के लिए पूरी प्रजा और जनता एक होनी चाहिए. मैं चाहता हूं कि जो व्यक्ति नफरत फैलाता है, उसे कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है. राष्ट्रपति को चाहिए कि ऐसे व्यक्ति को पद से हटाएं और वहां राष्ट्रपति शासन लगाएं. उन्होंने यह भी कहा कि यह तय है कि अगली बार राज्य में इनकी सरकार नहीं आएगी. अगर मुख्यमंत्री के अंदर भी कोई नैतिकता है तो उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए.

 

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