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समय की कसौटी पर खरा उतरेगा भारत... बिना नाम लिए एस जयशंकर की ट्रंप को दो टूक, कहा- विपरीत परिस्थितियों में भी हम जीतने में सक्षम

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि कोविड, संघर्षों और व्यापारिक बदलावों के बीच दुनिया अस्थिर दौर से गुजर रही है, ऐसे में आत्मनिर्भरता जरूरी है. उन्होंने बताया कि भारत ने वैश्वीकरण के दौर में भी अपनी संस्कृति और पर्यटन को संजोकर रखा है, जो देश की असली ताकत है.

समय की कसौटी पर खरा उतरेगा भारत... बिना नाम लिए एस जयशंकर की ट्रंप को दो टूक, कहा- विपरीत परिस्थितियों में भी हम जीतने में सक्षम
Image: S Jaishankar/@DrSJaishankar
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दुनिया आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां अस्थिरता और अनिश्चितता ने हर देश को प्रभावित किया है. कोविड महामारी से लेकर दुनिया भर में चल रहे कई संघर्ष और व्यापार में हो रहे बड़े बदलाव, सभी ने मिलकर वैश्विक हालात को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है. ऐसे समय में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक अहम संदेश दिया है. उन्होंने कहा, “दुनिया की अशांति से निपटने के लिए आत्मनिर्भरता की मानसिकता अपनाना ही समाधान है.”

परंपराओं के साथ आधुनिक विकास की राह

बुधवार को आयोजित ‘फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी’ के एक सम्मेलन में विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्वीकरण और शहरीकरण के इस दौर में अक्सर परंपराएं समय के साथ खो जाती हैं. लेकिन भारत ने इन्हें न सिर्फ संजोकर रखा है, बल्कि इन्हें अपनी ताकत में बदलकर पर्यटन को और भी आकर्षक बना दिया है. उन्होंने कार्यक्रम के विषय ‘अजेय भारत की भावना’ का जिक्र करते हुए कहा, “हम एक सभ्यतागत राष्ट्र हैं, जिसने समय की कसौटी पर खरा उतरते हुए अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को जीवित रखा है. ”

भारत के लोग सबसे बड़ी ताकत

जयशंकर ने साफ कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसके लोग हैं. “हमारे लोग और उनका आत्मविश्वास ही हमें दुनिया में अलग पहचान दिलाते हैं. विपरीत परिस्थितियों में भी हमने न सिर्फ डटे रहना सीखा है, बल्कि प्रगति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ना भी सीखा है.” उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने हमेशा चुनौतियों को अवसर में बदला है, चाहे वह आर्थिक संकट हो, महामारी का दौर हो या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव की स्थिति.

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उथल-पुथल भरे वैश्विक हालात

विदेश मंत्री ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, “हम निश्चित रूप से एक उथल-पुथल और अनिश्चितता भरे दौर में जी रहे हैं.” कोविड महामारी के बाद दुनिया अभी पूरी तरह संभल भी नहीं पाई थी कि कई बड़े संघर्षों ने वैश्विक शांति को हिला दिया. इनमें से कई युद्ध अब भी जारी हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. जयशंकर ने यह भी बताया कि जिन देशों के पास मजबूत घरेलू मांग है, उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है और आगे भी वे इस क्षमता के दम पर प्रगति करेंगे.

अमेरिका के टैरिफ वार का असर

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सम्मेलन के दौरान एक बड़ा आर्थिक मुद्दा भी चर्चा में रहा अमेरिका द्वारा भारत पर बढ़ाया गया टैरिफ पहले से लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ के अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत और टैरिफ लगा दिया है. अब भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लग गया है, जो अमेरिका द्वारा किसी भी देश पर लगाए गए सबसे अधिक शुल्कों में से एक है. यह अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा. हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए जो भी जरूरी होगा, वही करेगा. यह बयान भारत की दृढ़ कूटनीति और आत्मनिर्भर नीति का साफ संकेत है.

पर्यटन क्षेत्र की भूमिका

जयशंकर ने कहा कि ऐसे कठिन समय में एक मजबूत पर्यटन क्षेत्र की अहमियत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. “पर्यटन सिर्फ घूमने-फिरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बुनियादी ढांचे के विकास, उद्यमिता, रचनात्मकता, कौशल वृद्धि और रोजगार सृजन का बड़ा साधन है.” उन्होंने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश से न सिर्फ आर्थिक गतिविधियों को बल मिलता है, बल्कि लाखों लोगों को आजीविका के अवसर भी मिलते हैं. भारत का विविध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों से भरा होना पर्यटन को और खास बनाता है. यही वजह है कि भारत में पर्यटन को राष्ट्रीय विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

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आत्मनिर्भरता ही भविष्य की कुंजी

विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति में इतनी अनिश्चितता हो, तब हर देश के लिए जरूरी है कि वह आत्मनिर्भर बने. भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब अलग-थलग होना नहीं है, बल्कि अपनी क्षमताओं और संसाधनों का पूरा उपयोग कर दुनिया में मजबूत स्थिति बनाना है. भारत ने कोविड महामारी के दौरान यह साबित किया कि कठिन समय में वह न केवल अपने नागरिकों की जरूरतें पूरी कर सकता है, बल्कि दवाइयों और वैक्सीन के जरिए दूसरे देशों की भी मदद कर सकता है.

‘अजेय भारत’ का संदेश

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सम्मेलन में जयशंकर का संदेश साफ था. भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, लोग और परंपराएं हैं. इन मूल्यों को बचाकर और आधुनिक विकास की राह पर चलते हुए भारत न सिर्फ मौजूदा वैश्विक संकट का सामना कर सकता है, बल्कि दुनिया को समाधान भी दे सकता है. उन्होंने कहा, “अजेय भारत की भावना का मतलब है. हर परिस्थिति में डटे रहना, चुनौतियों को स्वीकार करना और आगे बढ़ना.”

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