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'स्वदेशी की ताकत से चमक रहा भारत...', CM मोहन यादव ने बताया कैसे संस्कृति, तकनीक और पर्यटन देश को बना रहे आत्मनिर्भर

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भोपाल में स्वदेशी से स्वावलंबन संगोष्ठी में कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा स्वदेशी पर आधारित रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आज तकनीक का दौर है, लेकिन भारतीय तकनीक ने वैश्विक स्तर पर अपनी धूम बनाई है और हर देश अब स्वदेशी की अहमियत समझ रहा है.

'स्वदेशी की ताकत से चमक रहा भारत...', CM मोहन यादव ने बताया कैसे संस्कृति, तकनीक और पर्यटन देश को बना रहे आत्मनिर्भर
Mohan Yadav (File Photo)
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के कुशाभाउ ठाकरे सभागार में आयोजित स्वदेशी से स्वावलंबन संगोष्ठी में कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा से स्वदेशी की भावना पर आधारित रही है. उन्होंने कहा कि आज तकनीक का दौर है, मगर भारतीय तकनीक की दुनिया में धूम मची हुई है. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर हर देश यह समझ रहा है कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण चीज़ स्वदेशी की भावना है.

सीएम मोहन यादव ने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा, "परमात्मा की दया है कि हमारा कल्चर शुरू से ही स्वदेशी पर आधारित रहा है. आवश्यकता के अनुसार सब कुछ गांव में उपलब्ध था. आज टेक्नोलॉजी बदली है, लेकिन तब भी भारतीय टेक्नोलॉजी ने दुनिया में अपनी पहचान बनाई," 

आर्थिक समृद्धि में स्वदेशी का योगदान

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संकल्प जताया कि देश को समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए वे स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे. इसके लिए जनता में जागरूकता बढ़ाने और जनसंचार के माध्यमों से संदेश फैलाने की योजना भी तैयार है. उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की खरीद और उपयोग की आदत को बढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने की ओर बढ़ रहा है और इसके पीछे स्वदेशी जीवनशैली और भावना का बड़ा योगदान है. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में स्वदेशी की भावना ही निर्णायक रही. "आजादी की लड़ाई में गणपति जी के आगमन के बाद बाल गंगाधर तिलक ने जो संघर्ष लड़ा, वही स्वदेशी की शक्ति थी," उन्होंने बताया.

पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया है. उन्होंने उज्जैन का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले साल राज्य में अकेले 7 करोड़ लोग धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए आए. वन्यजीवों के संरक्षण और जंगलों को आबाद रखने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 1235 में महाकाल मंदिर को नुकसान पहुंचा था, लेकिन बाद में पुनर्निर्माण हुआ और यह हमारी सांस्कृतिक ताकत को बताता है.

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बता दें कि सीएम मोहन यादव ने संगोष्ठी में यह स्पष्ट किया कि स्वदेशी की भावना केवल संस्कृति का हिस्सा नहीं बल्कि भारत की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ताकत का आधार भी है. उन्होंने कहा कि जब तक हम अपने स्वदेशी संसाधनों, तकनीक और उत्पादों का सम्मान करेंगे और उनका उपयोग करेंगे, तब तक देश वास्तव में आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकता है. यह संकल्प न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने और भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की राह दिखाता है.

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