×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

कांग्रेस में टकराव... राज्यसभा में भिड़े खरगे और जयराम रमेश; सोनिया ने दिया चौंकाने वाला साथ

संसद के बजट सत्र में राज्यसभा के भीतर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए. जयराम रमेश ने औद्योगिक संबंध संहिता संशोधन विधेयक को मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि विपक्ष मजबूरी में इसका समर्थन कर रहा है. लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे ने उनके बयान का खंडन किया.

कांग्रेस में टकराव... राज्यसभा में भिड़े खरगे और जयराम रमेश; सोनिया ने दिया चौंकाने वाला साथ
Mallikarjun Kharge/ Jairam Ramesh (File Photo)
Advertisement

संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद खुलकर सामने आ गए. यह घटना औद्योगिक संबंध संहिता संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान हुई, जिसने कांग्रेस पार्टी के भीतर वैचारिक मतभेद को सामने ला दिया है.

कैसे शुरू हुई बहस?

दरअसल, चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि यह विधेयक मजदूर विरोधी है, लेकिन विपक्षी दल कुछ परिस्थितियों के कारण इसे समर्थन देने के लिए मजबूर हैं. उनका यह बयान जैसे ही सदन में गूंजा, कुछ ही मिनटों बाद कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने उनके बयान का स्पष्ट खंडन कर दिया. खरगे ने दो टूक कहा कि विपक्ष इस विधेयक का समर्थन किसी भी स्थिति में नहीं करेगा. उनके इस सख्त रुख के तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया. यह दृश्य संसद में दुर्लभ माना गया, क्योंकि आमतौर पर विपक्ष एकजुट रुख पेश करता है.

Advertisement

मनसुख मांडविया ने खारिज किया विपक्ष का आरोप 

विधेयक पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि इस संशोधन के माध्यम से किसी नए प्रावधान को नहीं जोड़ा जा रहा है, बल्कि केवल तीन पुराने श्रम कानूनों को औपचारिक रूप से निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिन्हें पहले ही संहिता में समाहित किया जा चुका है. मांडविया ने यह भी स्पष्ट किया कि काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 करने का दावा भ्रामक है. उन्होंने बताया कि नई श्रम संहिताओं में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम का प्रावधान है, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों और विश्व श्रम संगठन के अनुरूप है. साथ ही न्यूनतम मजदूरी को अनिवार्य बनाया गया है, जबकि पहले यह केवल एक निर्देश के रूप में था.

सोनिया गांधी ने लेफ्ट के प्रस्ताव को दिया समर्थन 

इस घटनाक्रम के बीच संसद में एक और दिलचस्प दृश्य देखने को मिला. केरल में विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और वाम दलों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है, लेकिन संसद के भीतर दोनों दलों ने एकजुटता दिखाई. CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने श्रम कानूनों के विरोध में देशव्यापी आम हड़ताल का मुद्दा शून्यकाल में उठाया. आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने उनके प्रस्ताव का समर्थन किया और हस्ताक्षर कर अपनी सहमति जताई. आमतौर पर वह शून्यकाल के प्रस्तावों पर हस्ताक्षर नहीं करती हैं, इसलिए उनका यह कदम कई सांसदों के लिए चौंकाने वाला रहा.

Advertisement

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि संसद के इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि श्रम कानूनों को लेकर सियासत अभी और गरमाने वाली है. विपक्ष के भीतर मतभेद और बाहर एकजुटता की तस्वीर ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति में और गहराई से असर डाल सकता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें