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देशविरोधी पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती, ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने वाले आरोपी को मिली जमानत, लेकिन माननी होंगी ये कड़ी शर्तें

पहलगाम हमले के बाद, विवादास्पद ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों पर आरोपी को जमानत दे दी है. जानिए क्या है पूरा मामल?

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27 Feb 2026
( Updated: 27 Feb 2026
02:13 PM )
देशविरोधी पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती, ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने वाले आरोपी को मिली जमानत, लेकिन माननी होंगी ये कड़ी शर्तें
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पहलगाम हमले के तुरंत बाद इंस्टाग्राम पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' पोस्ट करने के आरोपी को जमानत दे दी. इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे. पुलिस ने इस मामले में आरोपी फैजान को एटा जिले के जलेसर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था. अपराध की प्रकृति और रिकॉर्ड में मौजूद चीजों को देखते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल-जज बेंच ने आरोपी फैजान को रिहा करने का आदेश दिया.

कोर्ट में वकील ने क्या दिया तर्क?

कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी फैजान के वकील एनआई जाफरी ने पक्ष रखा और बीएनएस के सेक्शन 152 का हवाला देते हुए कहा, "आरोपी ने भारत के लिए कोई अपमानजनक या बेइज्जती वाली बात पोस्ट नहीं की थी”. तर्क दिया गया कि सिर्फ किसी दुश्मन देश का समर्थन करना ही सेक्शन 152 बीएनएस के दायरे में नहीं आता है. यह मामला सेक्शन 196 बीएनएस के तहत आ सकता है, जिसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट कर सकता है और जिसमें अधिक से अधिक तीन से पांच साल की सजा हो सकती है.

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इस शर्त पर आरोपी को मिली जमानत

हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने आरोपी फैजान की जमानत याचिका का विरोध किया. पुलिस की दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी. जस्टिस देशवाल ने निर्देश दिया कि आरोपी फैजान सोशल मीडिया पर कोई भी आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड नहीं करेगा, जो देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ हो.

अदालत ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा. हाईकोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि मुकदमे की कार्यवाही में सहयोग करेगा, और रिहाई के बाद किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा. आदेश में साफ किया गया कि शर्तों का कोई भी उल्लंघन होने की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है.

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क्या था पूरा मामला?

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आपको पता है कि पहलगाम हमले में किस तरह से आतंकियों ने 26 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. जिसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया और पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के ठिकानों का सफाया किया. उत्तर प्रदेश के रहने वाले फैजान पर आरोप था कि उसने पहलगाम हमले के तुरंत बाद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का स्टेटस लगाया था और हमले का समर्थन करने वाली सामग्री पोस्ट की थी. फैजान के इस पोस्ट को देश की अखंडता के खिलाफ ओर समाज में नफरत फैलाने वाला माना गया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और उस पर कई धाराओं के तहत मकदमा दर्ज किया गया था. 

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