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महाकुंभ में दूसरी बार ‘भगदड़’ ? योगी के ख़िलाफ़ रची जा रही साज़िश ?

28 जनवरी की रात को महाकुंभ में भगदड़ मचने की ख़बर देख हर कोई हैरान रह गया था, लेकिन क्या उसके बाद एक बार फिर वहां भगदड़ मची है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि योगी सरकार को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है ? क्या है सच आइये इस रिपोर्ट के ज़रिये समझते हैं।

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दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम महाकुंभ दिव्य और भव्य तरीके से आयोजित हो रहा था, लेकिन मौनी अमावस्या पर होने वाले अमृत स्नान से ठीक कुछ घंटे पहले सामने आई भगदड़ की ख़बरों ने श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश के कोने-कोने में बैठे लोगों का दिल पसीज दिया था। 28 जनवरी की रात 2 बजे से लेकर 3.30 बजे तक ऐसी भगदड़ मची थी, जिसने कई लोगों को घायल किया था, जबकि कुछ लोगों के मौत की ख़बर भी सामने आई थी। राहत की बात ये रही कि वक़्त रहते प्रशासन ने मोर्चा संभाला, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने बारीकी से इस पर नज़र बनाए रखी और स्थिति को कंट्रोल कर लिया था।

हालातों को ठीक करने की जद्दोजहद के बीच ख़बर आई कि महाकुंभ में दूसरी बार भगदड़ मची है। अब इसकी सच्चाई क्या है? क्या वाक़ई दूसरी बार भगदड़ मची? क्या दूसरी भगदड़ को छुपाया गया? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की पुष्टि तो हम नहीं करते, लेकिन पूरी तरह से इन्हें नकारा भी नहीं किया जा सकता, लेकिन जिन कपड़ों को ट्रॉली में भर-भरकर ले जाता हुआ नज़रा दिखाया गया, क्या वो उन लोगों के कपड़े थे जिनके भगदड़ में मारे जाने की बात कही गई?

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क्या जो लोग नहाने आते हैं, वो अपने साथ लाए कपड़े अकसर नहीं छोड़ जाते? ख़ासकर अगर भगदड़ जैसी स्थिति हुई हो, तो क्या किसी का बैग, किसी का थैला, किसी के कपड़े नहीं छूटे होंगे, लेकिन मरने वालों के कपड़े उतारकर तो किसी ने ट्रॉली में नहीं भर दिए होंगे? वैसे दूसरी भगदड़ का दावा झूंसी इलाक़े में होने का दावा किया जा रहा है। एक तरफ़ ये दावा है, तो वहीं दूसरी तरफ़ ये भी बात सच है कि 28 करोड़ लोगों ने इतना सब कुछ होने के बाद स्नान भी किया है।

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मतलब 28 करोड़ लोग अगर स्नान कर अपने घर सकुशल लौट रहे हैं, तो इसे भी बड़ी कामयाबी मानिए। खैर, वापस अपने मूल सवाल पर आते हैं, क्या वाक़ई झूंसी के पास भगदड़ हुई? क्या वाक़ई 7-8 ट्रॉली कपड़े जूते-चप्पल हटाए गए।रास्ते बंद हुए, लोग कुचलते गए, मौत कितनी पता नहीं? कुछ न्यूज़ पोर्टल की हेडलाइन तो यही बता रही है।

इन सब से थोड़ा अलग हटकर आप सोचिए, क्या ऐसी बातें फैलाकर सीधा सीधा योगी के ख़िलाफ़ साज़िश रचने की बू नहीं आ रही? क्या सीएम योगी को टार्गेट नहीं किया जा रहा? वो योगी जो इस दिव्य भव्य महाकुंभ के लिए पिछले 1-1.5 साल से लगे हुए थे।आप सोचिए, कितनी तेज़ी दिखाई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी का इस्तीफ़ा मांगने में? उन्होंने साफ़ कहा कि

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"ये मौजूदा सरकार की बहुत बड़ी विफलता है। ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। सरकार को खुद ही हट जाना चाहिए या फिर जिम्मेदार लोगों को इस मामले में दखल देना चाहिए। ये ऐसी दुखद घटना है जिसने सनातनियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। आने वाले दिनों में रोजाना लाखों करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे। अगर इस घटना को लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में इससे बड़ी घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामले में बेहद सख्त कार्रवाई जरूरी है।"

मतलब कल तक महाकुंभ में जो ख़ुद VVIP प्रोटोकॉल लेकर घूम रहे थे, वो शंकराचार्य भी अब योगी पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया का ज़माना है भाई! लोगों ने इन्हीं शंकराचार्य की अखिलेश यादव के साथ मुलाक़ात की तस्वीर भी वायरल कर दी। सोचने वाली बात तो ये भी है कि शंकराचार्य तो योगी का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं और महाकुंभ की जनता योगी के साथ खड़ी है।

वैसे लोग कह रहे हैं कि ये शंकराचार्य तभी ठीक थे जब अखिलेश सीएम थे और यूपी पुलिस इन्हें घसीट कर ले गई थी। वापस मुद्दे पर आ जाते हैं, अगर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो को देखें, तो मानकर चलिए कि ट्रॉली में भरकर सामान उठाया जा रहा है, तो ये बताइये कैसे पता चलेगा कि किसका सामान है वो? झूंसी का बताया जा रहा है कि लोग बेहोश हो रहे हैं,फिर महिला पुलिसकर्मी वीडियो बनाकर कह रही है कि फ़ोर्स भेजिये।

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फिर वो Influencer तान्या मित्तल आपको याद होंगी,पहले तारीफ कर रही थी फिर रोते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ और चलिए प्रत्यक्षदर्शियों की मान लें जिनका कहना है कि भगदड़ मची तो फिर अधिकारी कहां थे। आपको महाकुंभ के DIG वैभव कृष्ण का बयान सुनना चाहिए। कुंभ के DIG कह रहे हैं कि

"किसी ने भी इस मामले को लेकर पुलिस से संपर्क नहीं किया। महाकुंभ में 7-8 करोड़ लोग आए हैं। किसी के साथ अगर कुछ भी घटना होती है, तो पुलिस के पास उसकी सूचना होती है या पुलिस को सूचना दी जाती है, तो पुलिस मौक़े पर पहुंचकर उसकी मदद करती है, महाकुंभ में पुलिस ने मौक़े पर पहुंचकर बहुत से लोगों की जान बचाई है और लोगों को सुरक्षित भी किया है। पुलिस के पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, जो वीडियो दिखाई जा रही है, उनकी जांच करवाई जायेगी।"

DIG कुंभ को क्या वाक़ई इस बारे में कुछ नहीं पता था? क्या किसी ने पुलिस को जानकारी नहीं दी…सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद अब तक क्या संज्ञान लिया गया? इन सब से इतर एक और वीडियो देखिए जिसमें एक पुलिस वाला खाने में राख या मिट्टी जैसा कुछ डाल रहा है। बताया जा रहा है कि कुंभ में आने वाली गाड़ियों को कुछ देर के लिए रोका गया था, उनकी मदद करने के लिए स्थानीय लोग खाना बना रहे थे ताकि कोई भूखा ना रहे तो ये पुलिसकर्मी राख डालने कैसे आ गया? हालाँकि बाद में उसको सस्पेंड कर दिया गया।

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कुल जमा बात इतनी है कि अब ये योगी और उनके भरोसेमंद अधिकारियों को भी देखना होगा कि महाकुंभ की दिव्यता में सेंध लगाने का काम राजनीति से प्रेरित कुछ अधिकारी तो नहीं कर रहे? कुछ अधिकारी क्या कर रहे हैं ये अब किसी और को नहीं ख़ुद योगी आदित्यनाथ को ही देखना होगाषक्यों ऐसे ही कुछ अधिकारियों की मनमानी की वजह से बीजेपी के हाथ से अयोध्या सीट भी निकली थी। 2027 में चुनाव है और अगर महाकुंभ में कुछ लोग ये कहेंगे कि सबकुछ शांति से चल रहा था कि लाल झंडा लेकर कुछ लोग आए और उसके बाद भगदड़ मची,तो सवाल योगी पर नहीं बल्कि विरोधियों पर उठेंगे…पहले शंकराचार्य ख़ुद VVIP ट्रीटमेंट लेंगे और अखिलेश से मुलाक़ात की तस्वीर वायरल होने के बीच योगी से इस्तीफ़ा मांगेंगे तो सवाल तो उठेंगे योगी पर नहीं बल्कि शंकराचार्य पर?

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