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महाकुंभ में 13 साल की बच्ची परिवार छोड़ बन गई संन्यासी! मां-बाप ने किया पिंडदान !

13 साल की राखी से मिलिए जो अब महिला सन्यासी बन चुकी है। गुरु कौशल गिरि ने राखी की इच्छा को स्वीकार करते हुए उसे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जूना अखाड़े में प्रवेश कराया। राखी के पिता संदीप सिंह ने बताया कि 19 जनवरी को वह अपनी बेटी का पिंडदान करेंगे। इस धार्मिक संस्कार के बाद उनका बेटी से सभी सांसारिक संबंध खत्म हो जाएगा और वह पूरी तरह साध्वी बन जाएगी।

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12 सालों में एक बार होने वाले महाकुंभ की अलौकिक तस्वीरों ने देश विदेश तक लोगों को आशचर्यचकित कर दिया है। इस महाकुंभ से कई तस्वीरें सामने आ रही है जिसपर खुले आंखों विश्वास करना मुमकिन सा नहीं लग रहा है। 30-35 दिन चलने वाले महाकुंभ में सनातानियों की आस्था जुड़ी हुई है। इस महाकुमंभ ने आपको रुद्राक्ष बाबा, खड़ेश्वर नागा बाबा, दिगंबर बाबा जैसे बड़े बड़े सनातनियों से रूबरू करवाया। लेकिन अब हम आपको मिलवाने जा रहे है एक साधवी से। जिसने 13 साल की उम्र में सब मोह-माया त्याग दिया और अपना जीवन भगवान को समर्पित कर दिया। 

13 साल की 'गौरी गीरी' उर्फ 'राखी' बनी साध्वी


ये है साध्वी गौरी गीरी उर्फ राखी... जो आगरा के प्रतिषेठित कारोबारी संदीप सिंह की बेटी है। संहीप सिंह ने अपनी बेटी का आध्यात्म की तरफ झूकाव देखकर उसे जूना अखाड़े को सौंप दिया। पिता संदीप सिंह ने बताया कि 19 जनवरी को वह अपनी बेटी का पिंडदान करेंगे। इस धार्मिक संस्कार के बाद उनका बेटी से सभी संबंध खत्म हो जाएगा और वह पूरी तरह साध्वी बन जाएगी। 


ये है 'गौरी गीरी' उर्फ 'राखी' की कहानी

 
जूना अखाड़े के शिविर में रह रही राखी ने NMF को बताया, 'जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरी महाराज पिछले तीन वर्षों से भागवत कथा सत्र आयोजित करने के लिए उनके गांव में आते रहे हैं। ऐसे ही एक सत्र के दौरान मैनें गुरु दीक्षा ली। कौशल गिरी महाराज ने पिछले महीने राखी उसके माता पिता और उसकी बहन को महाकुंभ शिविर में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया था। राखी ने अपने परिवार के सामने साध्वी बनने की इच्छा जताई थी। राखी की इच्छा को भगवान की इच्छा मानते हुए परिवार वालों ने कोई आपत्ति नहीं जताई।

बता दें कि सनातन धर्म में महाकुंभ का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में शाही स्नान करने से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है। जहां कुंभ मेला हर तीन साल में लगता है, अर्धकुंभ हर 6 साल में लगता है तो वहीं महाकुंभ का शुभ संयोग 144 वर्षों में एक ही बार बनता है। ऐसा माना जा रहा है कि ये शुभ संयोग 2025 में बन रहा है। जानकारी देते चले कि महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी को पूर्णिमा से होगी और इसका समापन 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर होगा। प्रयागराज कुंभ मेले में छह शाही स्नान होंगे। महाकुंभ मेला का पहला शाही स्नान 13 जनवरी 2025 को होगा। 
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