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प्रयागराज पहुंचे सीएम योगी ने साधु-संतों के शिविरों में परखे इंतजाम

सीएम योगी गुरुवार को प्रयागराज पहुंचे स्वयं सनातन संस्कृति के ध्वज वाहक, 13 अखाड़ों के शिविर में पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले धर्म ध्वजा को प्रणाम किया। इसके बाद संतगणों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगने वाले दिव्य महाकुंभ का श्रद्धालुओं का इंतज़ार ख़त्म होने वाला है, महाकुंभ के लिए अब कुछ ही दिनों का समय बचा है। ऐसे में इस धार्मिक आयोजन में पहुंचने वाले श्रद्धालु की सुविधा में कोई कमी न रहे इसकी लिए जो तैयारियां चल रही है वो अंतिम चरण में है। ख़ुद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ज़मीनी निरीक्षण पर हर एक चीज़ का जायज़ा ले रहे है। इसी क्रम में सीएम योगी गुरुवार को प्रयागराज पहुंचे स्वयं सनातन संस्कृति के ध्वज वाहक, 13 अखाड़ों के शिविर में पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले धर्म ध्वजा को प्रणाम किया। इसके बाद संतगणों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।



पूज्य संतो से है कुंभ कि दिव्यता 

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रयागराज महाकुंभ को सनातन के ध्वजवाहक सभी 13 अखाड़ों का आशीर्वाद प्राप्त है, खाक-चौक परंपरा, दंडीबाड़ा, आचार्यबाड़ा परंपरा तथा तीर्थ पुरोहितों की शुभकामनाएं भी हमारे साथ हैं, ऐसे में यह सुव्यवस्थित आयोजन का एक वैश्विक मानक बनने जा रहा है। उन्होंने कहा है कि महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता पूज्य संतों से ही है। राज्य सरकार और मेला प्रशासन संतगणों की सभी अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। मानव सभ्यता और सनातन संस्कृति के सबसे बड़े वैश्विक सम्मेलन महाकुंभ की तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को प्रयागराज के दौरे पर थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी स्वयं सनातन संस्कृति के ध्वज वाहक, 13 अखाड़ों के शिविर में पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले धर्म ध्वजा को प्रणाम किया। इसके बाद संतगणों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।



प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर को अपने बीच पाकर साधु-संत प्रफुल्लित नजर आए। उन्होंने सीएम योगी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्प वर्षा कर स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री खाक चौक शिविर, 13 अखाड़ों के शिविर के साथ ही दंडीबाड़ा के शिविर में साधु-संतों से मिलने पहुंचे तो उन्हें पुष्पगुच्छ और माला पहनाकर आसन पर बिठाया गया। इस दौरान बटुक संन्यासियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण भी किया। सीएम योगी पूज्य संतों के बीच जाकर भी बैठे और संतों की ओर से उन्हें भगवा अंगवस्त्र भी प्रदान किया गया, जबकि कुछ जगहों पर उन्हें स्मृति चिन्ह और महाकुंभ का आमंत्रण भी दिया गया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने उनका तिलक किया और प्रसाद भी ग्रहण कराया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अखाड़ों के ईष्ट देवों की भी आराधना की। साधु-संत और श्रद्धालु उनके साथ फोटो खिंचवाने को आतुर दिखे। महाकुंभ के सबसे बड़े आकर्षण और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व त्यागने वाले नाग, बैरागी, उदासीन और अवधूत संतों से मिल कर मुख्यमंत्री ने उनका कुशल-क्षेम पूछा और व्यवस्थाओं का स्वतः निरीक्षण भी किया। मेला प्राधिकरण की ओर से साधु-संतों के अखाड़ों, शिविरों के लिए किए गए इंतजाम का जायजा लिया और अखाड़ों के प्रतिनिधि संतों से बात कर मेला प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं और उनकी संतुष्टि के बारे में पूछा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संतगणों की आवश्यकताओं को शीर्ष वरीयता देते हुए पूरा किया जाए।



मुख्यमंत्री ने खाक चौक के शिविर में पहुंचकर 5-5 मिनट और सेक्टर-18 में बने दंड स्वामियों के दंडीबाड़ा शिविर का भ्रमण और अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने सेक्टर-19 में स्थित अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा शिविर का भी भ्रमण किया। मुख्यमंत्री ने मेला प्राधिकरण के अधिकारियों को साधु-संतों की आवश्यकताओं और महाकुंभ की परंपरा के निर्वहन में पूरी तरह सहयोग करने के दिशा निर्देश दिए। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी ने सेक्टर 23 स्थित जजेज कॉलोनी पहुंचकर व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। व्यवस्थाओं से संतुष्ट दिखे मुख्यमंत्री ने कहा कि स्नान पर्व की तिथियों को छोड़कर शेष सभी दिनों में गणमान्य जनों के लिए नियत प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने मेला अधिकारी व पुलिस प्रशासन को महाकुंभ मेले में आने वाले न्यायाधीशों और न्यायमूर्तियों की सुरक्षा व्यवस्था का पूरा इंतजाम करने को भी कहा। उन्होंने जजेज कॉलोनी में लगे अस्थायी आवास टेंटों और उनके लिए शौचालयों समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। सेक्टर-23 से जजेज कॉलोनी के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री का काफिला अरैल घाट पहुंचा। जहां से वो मोटर बोट द्वारा वीआईपी घाट पर उतर कर अक्षयवट मार्ग से पांटून पुल के माध्यम से संगम लोअर मार्ग होते हुए महावीर मार्ग स्थित खाक चौक पहुंचे। यहां से अखाड़ों, दंडीबाड़ा और आचार्यबाड़ा के शिविरों में गए।
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