×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

उत्तर प्रदेश के 5 ऐसे शक्तिपीठ, जहां दर्शन मात्र से मिलता है मनचाहा आशीर्वाद Navratri special 2025

22 सितंबर से नवरात्रि का त्यौहार शुरू हो चुका है. मां दुर्गा के भक्त मंदिरों और अलग-अलग शक्तिपीठों में पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं. ऐसे में आज आपको उत्तर प्रदेश में स्थित ऐसे 5 शक्तिपीठों के बारे में पता चलेगा जिसमें नवरात्रि के दौरान पूजा-अर्चना करने से मनचाहा प्राप्त होता है.

Author
23 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:20 AM )
उत्तर प्रदेश के 5 ऐसे शक्तिपीठ, जहां दर्शन मात्र से मिलता है मनचाहा आशीर्वाद Navratri special 2025
AI Image
Advertisement

हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का आरंभ 22 सितंबर से हो गया है. यह पर्व शक्ति की उपासना और साधना का महापर्व है. इस अवसर पर देवी मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है. उत्तर प्रदेश में मां दुर्गा के कई प्राचीन और सिद्ध मंदिर स्थित हैं. विशेष रूप से यहां के पांच शक्तिपीठ अत्यंत पूजनीय माने जाते हैं, जिनका उल्लेख देवी पुराण में भी मिलता है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं इन 5 शक्तिपीठों के बारे में…

उत्तर प्रदेश में स्थित पहला शक्तिपीठ

श्री उमा शक्तिपीठ : वृंदावन में भूतेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित यह शक्तिपीठ 'उमा देवी मंदिर' के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहां माता सती के केश और चूड़ामणि गिरे थे. यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां वर्षभर भक्त दर्शन के लिए आते हैं. लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और बढ़ जाती है.

उत्तर प्रदेश में स्थित दूसरा शक्तिपीठ कौन सा है?

Advertisement

रामगिरि शक्तिपीठ : चित्रकूट के रामगिरि स्थान पर स्थित इस शक्तिपीठ का पौराणिक महत्व है। मान्यता है कि यहां सती का दायां वक्ष गिरा था। यहां माता को शिवानी नाम से पूजा जाता है। नवरात्रि में इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.

विशालाक्षी शक्तिपीठ भी मौजूद है यूपी में

विशालाक्षी शक्तिपीठ : वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट के पास स्थित विशालाक्षी शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। यहां माता सती की मणिकर्णिका गिरी थी और वे विशालाक्षी एवं मणिकर्णी रूप में प्रसिद्ध हुईं. वाराणसी का धार्मिक महत्व इस शक्तिपीठ से और भी बढ़ जाता है.

चौथा शक्तिपीठ कितनी मान्यता रखता है?

पंचसागर शक्तिपीठ : इस शक्तिपीठ का वास्तविक स्थान स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है, किंतु मान्यता है कि यहां माता की निचली दाढ़ गिरी थी। इस कारण यह स्थान वाराही शक्ति के रूप में जाना जाता है. नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है. मान्यताओं के अनुसार यहां भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति होती है.

Advertisement

पांचवां शक्तिपीठ क्यों है भक्तों के लिए खास?

प्रयाग शक्तिपीठ : संगम तट पर स्थित प्रयाग शक्तिपीठ का महत्व अत्यधिक है. मान्यता है कि यहां सती की हस्तांगुलि गिरी थी. प्रयागराज में तीन मंदिर ललितादेवी, कल्याणी देवी और अलोपीदेवी धाम को शक्तिपीठ माना जाता है. संगम स्नान और इन मंदिरों के दर्शन-पूजन को मोक्षदायक माना जाता है.

यह भी पढ़ें

उत्तर प्रदेश के ये पांच शक्तिपीठ न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा भी हैं. शारदीय नवरात्रि जैसे पर्व इन स्थानों की महिमा को और बढ़ा देते हैं. यहां दर्शन और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें शक्ति व शांति की प्राप्ति होती है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें