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F-35B: आसमान का बादशाह, जमीन पर डाले हथियार...उड़ना भी मुश्किल, केरल से कबाड़ की तरह टुकड़ों में ले जाएगा ब्रिटेन, अमेरिका भी बेबस

केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ब्रिटिश रॉयल नेवी के अत्याधुनिक F-35B फाइटर जेट को अब मरम्मत की बजाय टुकड़ों में काटकर एक सैन्य कार्गो विमान के जरिए ब्रिटेन वापस भेजे जाने की योजना बनाई गई है. इस दृश्य को देखकर ब्रिटेन के साथ-साथ अमेरिका भी सिहर उठेगा.

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03 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
02:10 AM )
F-35B: आसमान का बादशाह, जमीन पर डाले हथियार...उड़ना भी मुश्किल, केरल से कबाड़ की तरह टुकड़ों में ले जाएगा ब्रिटेन, अमेरिका भी बेबस
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केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ब्रिटिश रॉयल नेवी के अत्याधुनिक F-35B फाइटर जेट ने 14 जून को तकनीकी खराबी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग की थी. लेकिन अब तक, यानी 19 दिन बाद भी विमान की खराबी दूर नहीं की जा सकी है.
सूत्रों के अनुसार, अब इस लड़ाकू विमान को मरम्मत की बजाय टुकड़ों में काटकर एक सैन्य कार्गो विमान के जरिए ब्रिटेन वापस भेजे जाने की योजना बनाई गई है. यह फैसला तकनीकी जटिलता और मरम्मत की असुविधा को देखते हुए लिया गया है.

ठीक नहीं हो पाई तकनीकी खराबी
केरल में F-35B फिफ्थ जनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट को दुरुस्त करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन इंजीनियरिंग स्तर की गंभीर खराबी के कारण यह अब तक उड़ान भरने की स्थिति में नहीं आ सका है.
मामले से जुड़े सूत्रों ने पुष्टि की है कि विमान को फिर से ऑपरेशनल बनाने की सभी कोशिशें विफल हो चुकी हैं. अब ब्रिटिश रॉयल नेवी के पास एकमात्र विकल्प यही बचा है कि विमान को टुकड़ों में काटकर सैन्य कार्गो विमान के जरिए ब्रिटेन वापस भेजा जाए. F-35B स्टेल्थ फाइटर जेट की मरम्मत में जहां तकनीकी जटिलताएं सामने आ रही हैं, वहीं अब ब्रिटेन से इंजीनियरिंग सपोर्ट में भी देरी हो रही है. सूत्रों के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम से लगभग 30 इंजीनियरों की एक टीम के तिरुवनंतपुरम पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन वे अब तक भारत नहीं पहुंचे हैं.
इस कारण विमान की मरम्मत और उसे फिर से उड़ान योग्य बनाने की प्रक्रिया में अभी और देरी की संभावना जताई जा रही है.

अब टुकड़ों में वापस जाएगा फाइटर जेट 
विमान की मरम्मत में लगातार हो रही देरी और वापसी के लिए कोई स्पष्ट टाइमलाइन तय न होने के कारण, ब्रिटिश रक्षा अधिकारी अब वैकल्पिक योजनाओं पर काम कर रहे हैं.
सूत्रों के अनुसार, फाइटर जेट को आंशिक रूप से डिसमेंटल (टुकड़ों में अलग) कर मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए ब्रिटेन वापस भेजना अब सबसे व्यावहारिक और तात्कालिक विकल्प बनकर सामने आया है. यह फैसला तकनीकी मरम्मत में असफलता और लॉजिस्टिक चुनौतियों को देखते हुए लिया गया है.

C-17 ग्लोबमास्टर से लौटेगा F-35B 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन अब F-35B फाइटर जेट को C-17 ग्लोबमास्टर मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के ज़रिए वापस ले जाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह कदम इस प्रकार के एयरक्राफ्ट के लिए असामान्य लेकिन व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है.

विमान को आंशिक रूप से डिसमेंटल (कलपुर्जों में अलग) किया जाएगा, ताकि उसे ग्लोबमास्टर विमान में सुरक्षित रूप से लादा जा सके और ब्रिटेन वापस ले जाया जा सके.
जब F-35B फाइटर जेट अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर लौटने की तैयारी कर रहा था, तभी टेकऑफ से पहले की जांच के दौरान इसमें हाइड्रोलिक सिस्टम फेलियर का पता चला. यह समस्या बेहद गंभीर मानी जाती है, क्योंकि यह विमान की सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता को सीधे प्रभावित करती है.
रॉयल नेवी के तीन टेक्नीशियनों की एक छोटी टीम ने विमान की मौके पर ही मरम्मत की कोशिश की, लेकिन तकनीकी जटिलता के कारण वे इस खराबी को दूर करने में सफल नहीं हो सके. यही वजह है कि अब इस विमान को भारत से टुकड़ों में डिसमेंटल करके वापस ब्रिटेन ले जाने की योजना बनाई गई है.

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क्यों खास है F-35 जेट? 
फाइटर जेट को CISF की कड़ी सुरक्षा में एयरपोर्ट के बे-4 में पार्क किया गया है. शुरुआत में, रॉयल नेवी ने केरल में मॉनसून की बारिश के बावजूद, जेट को हैंगर में ले जाने के एअर इंडिया के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. बाद में, ब्रिटिश नौसेना ने जेट को हैंगर में ले जाने पर अपनी सहमति जताई. F-35 को दुनिया के सबसे महंगे और एडवांस फाइटर जेट्स में गिना जाता है. पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ यानी रडार से बचने वाले इन विमानों को मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन बनाती है. यह फाइटर जेट अपने हाईटेक स्टील्थ डिज़ाइन, रडार और डेटा फ्यूजन सिस्टम के लिए जाने जाते हैं, जो युद्ध में दुश्मन को पस्त करने की क्षमता रखते हैं. एक विमान की कीमत 110 मिलियन डॉलर यानी करीब 950 करोड़ रुपये है.

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