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ऑपरेशन सिंदूर में कमाल का भारतीय सेना को इनाम, मोदी सरकार ने बढ़ा दिया रक्षा बजट, रणनीतिक तैयारी और आधुनिकीकरण पर जोर

केंद्रीय बजट 2026 में मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. कहा जा रहा है कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में सैन्य संघर्ष के दौरन अद्भुत रण कौशल का प्रदर्शन करने का सेना को इनाम दिया है. इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पीएम मोदी का आभार जताया है.

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01 Feb 2026
( Updated: 01 Feb 2026
11:21 AM )
ऑपरेशन सिंदूर में कमाल का भारतीय सेना को इनाम, मोदी सरकार ने बढ़ा दिया रक्षा बजट, रणनीतिक तैयारी और आधुनिकीकरण पर जोर
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केंद्र की मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट पेश कर दिया है. इस बार के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो ये वित्त वर्ष 2026 के ₹6.81 लाख करोड़ के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी की गई है. इस बड़े इजाफे के जरिए सरकार ने सेना की तैयारियों, आधुनिकीकरण और जवानों के कल्याण पर जोर देने का खाका पेश किया. रक्षा मंत्रालय और बजट दस्तावेजों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के रक्षा बजट में रक्षा सेवाएं (राजस्व), पूंजीगत खर्च, रक्षा पेंशन और रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले नागरिक प्रतिष्ठानों का खर्च शामिल है. पिछले बजट में ₹6.81 लाख करोड़ का रक्षा खर्च सरकार के कुल खर्च के सबसे बड़े हिस्सों में से एक था.

1. MoD (Civil)- रक्षा मंत्रालय (सिविल)

वित्त वर्ष 2025-26 में इसके लिए 28,682.97 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जो 2026-27 में घटकर 28,554.61 करोड़ रुपये रह गया है. इसमें लगभग 0.45 प्रतिशत की मामूली कमी की गई है. इसका मतलब है कि मंत्रालय के सिविल प्रशासनिक खर्चों में हल्की कटौती की गई है.

2. Defence Services (Revenue) - रक्षा सेवाएं (राजस्व व्यय)

2025-26 में रक्षा सेवाओं के राजस्व व्यय के लिए 3,11,732.30 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे 2026-27 में बढ़ाकर 3,65,478.98 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसमें 17.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सैनिकों के वेतन, भत्ते, रखरखाव, संचालन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने को दर्शाती है.

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3. Capital Outlay (Defence)- रक्षा पूंजीगत व्यय

रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलती है. 2025-26 में इसके लिए 1,80,000 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जो 2026-27 में बढ़कर 2,19,306.47 करोड़ रुपये हो गया है. इसमें 21.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसका सीधा मतलब है कि सरकार आधुनिक हथियारों, उपकरणों, रक्षा प्लेटफॉर्म, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आधुनिकीकरण पर ज्यादा जोर दे रही है.

4. Defence Pensions-रक्षा पेंशन

रक्षा पेंशन के लिए 2025-26 में 1,60,795 करोड़ रुपये रखे गए थे, जो 2026-27 में बढ़कर 1,71,338.22 करोड़ रुपये हो गए हैं. इसमें 6.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. यह बढ़ोतरी सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों के लिए पेंशन दायित्व बढ़ने को दर्शाती है.

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कुल मिलाकर देखें तो सरकार ने 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र में खासतौर पर आधुनिकीकरण और संचालन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है, जबकि सिविल प्रशासनिक खर्चों को लगभग स्थिर रखा गया है.

वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय बजट की तारीफ करते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है. 

ऑपरेशन सिंदूर में कमाल का सेना को मिला इनाम

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक संदेश में कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पेश इस शानदार बजट के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं. यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है. साथ ही, यह बजट प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त आधार देता है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं."

रक्षा मंत्री ने मोदी सरकार का जताया आभार

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उन्होंने कहा, "इस बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किए जाने पर मैं प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं. 'ऑपरेशन सिंदूर' की ऐतिहासिक सफलता के बाद आए इस बजट ने देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के हमारे संकल्प को सुदृढ़ किया है."

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस साल हमारी सेनाओं के कुल पूंजीगत व्यय के लिए 2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है. इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हमारी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण का है. इसके लिए इस साल 1.85 लाख करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है. इस वृद्धि के परिणामस्वरूप हमारी सैन्य क्षमता और अधिक सशक्त होगी.

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रक्षा मंत्री ने कहा, "भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी इस बजट में प्रमुख स्थान मिला है. पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत वर्तमान वर्ष की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करते हुए 12,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के संतुलन को मजबूत करता है."

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के रक्षा क्षेत्र के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपए की तुलना में करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है. 

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रक्षा बजट में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब हाल ही में भारत ने कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं. यह कदम सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के अनुरूप है, जिसमें देश में ही रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है.

रक्षा बजट में किस मद में कितना रुपया!

वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले पुर्जों को बनाने में लगने वाले कच्चे माल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी. इससे रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को फायदा मिलेगा.

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आत्मनिर्भरता के साथ-साथ आधुनिकता पर जोर!

इस बजट का रुख पहले से चल रही उस रणनीति को आगे बढ़ाता है, जिसमें सेना के आधुनिकीकरण, एयर डिफेंस सिस्टम और नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है. कैपेक्स में बढ़ोतरी का कारण फाइटर जेट, युद्धपोत, मिसाइल, तोप और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए ज्यादा बजट दिया जाना है.

रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए ज्यादा बजट मिलने से सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सप्लायर कंपनियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पूरे सेक्टर में ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं.

सरकारी कंपनियों को फायदा

सरकारी क्षेत्र की जिन कंपनियों को फायदा होने की संभावना है, उनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल हैं, जो सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उपकरण बनाती हैं.

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इसके अलावा मिधानी, बीईएमएल, भारत डायनामिक्स जैसी छोटी निजी कंपनियों और ड्रोन सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप्स को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. यह सब भारत में ही रक्षा उपकरणों की खरीद को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का हिस्सा है.

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