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ऑपरेशन सिंदूर की गूंज अब भी बरकरार...भारत के संयम पर अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने की प्रशंसा, शहबाज-मुनीर के लिए कड़ा संकेत
अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे पपारो ने भारत की ऑपरेशन सिंदूर कार्रवाई और दिखाए गए संयम की सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का उद्देश्य ताकत के जरिए शांति बनाए रखना है.
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पिछले साल 2025 मई में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस दृढ़ता से जवाब दिया, उसकी चर्चा आज भी वैश्विक मंचों पर सुनाई देती है. भारतीय सेना की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) कार्रवाई को एक वर्ष पूरा होने को है, लेकिन इसकी रणनीतिक और कूटनीतिक अहमियत कम नहीं हुई है. पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर की गई इस सटीक कार्रवाई ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा.
अब इस ऑपरेशन को लेकर अमेरिका की ओर से भी अहम टिप्पणी आई है. अमेरिकी सेना के हिंद-प्रशांत कमान के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे पपारो (Admiral Samuel J. Paparo) ने भारत के संयम और संतुलित रुख की खुलकर सराहना की है.
ताकत के जरिए शांति का साझा उद्देश्य
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नई दिल्ली दौरे पर आए एडमिरल पपारो ने कहा कि भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का मूल उद्देश्य ‘ताकत के जरिए शांति’ बनाए रखना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के हित कई मामलों में समान हैं और यही समानता इस रणनीतिक रिश्ते को मजबूती देती है. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना द्वारा दिखाए गए संयम की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसे अभियानों को देखकर शांतिप्रिय राष्ट्र स्वाभाविक रूप से चिंतित होते हैं, लेकिन भारत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया. यह परिपक्व सैन्य सोच का संकेत है.
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समुद्री क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
एडमिरल पपारो ने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं और आने वाले समय में यह और गहरे होंगे. सैन्य स्तर पर क्षमता निर्माण, संयुक्त अभ्यास और रणनीतिक समन्वय को और धार दी जाएगी. उनका मानना है कि मजबूत साझेदारी ही प्रभावी प्रतिरोध का आधार बनती है.
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हिंद-प्रशांत में बढ़ती आक्रामकता पर चिंता
एडमिरल पपारो ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती ‘जबरन कार्रवाई’ और ‘आक्रामकता’ पर गंभीर चिंता जताई. हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन विशेषज्ञ इसे क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता से जोड़कर देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत आबादी रहती है. वैश्विक जीडीपी का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. दुनिया की 10 सबसे बड़ी सेनाओं में से सात इसी इलाके में मौजूद हैं. ऐसे में इस क्षेत्र की स्थिरता केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक महत्व रखती है.
संप्रभुता और समुद्री स्वतंत्रता पर साझा प्रतिबद्धता
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अमेरिकी कमांडर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों संप्रभुता, नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री मार्गों की आजादी के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने भारतीय सेना के पेशेवर आचरण की सराहना की. उनका कहना था कि किसी भी सैन्य कार्रवाई में संयम और संतुलन बेहद जरूरी है और भारत ने यह दिखाया है.
सतर्कता ही सुरक्षा की कुंजी
पाकिस्तान द्वारा चीनी सैन्य उपकरणों के संभावित उपयोग को लेकर पूछे गए प्रश्न पर एडमिरल पपारो ने सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए निरंतर सतर्कता और तैयारी आवश्यक है. एक मजबूत प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना समय की मांग है.
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वैश्विक मंच पर मजबूत होती भारत की छवि
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साबित किया कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से सोचने और संतुलित कदम उठाने वाला राष्ट्र है. अमेरिका जैसे वैश्विक शक्ति केंद्र से मिली सराहना इस बात का संकेत है कि भारत की सैन्य और कूटनीतिक विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है.
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बहरहाल, एक साल बाद भी इस ऑपरेशन की गूंज यह याद दिलाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा नहीं, बल्कि वैश्विक संतुलन में सक्रिय भूमिका निभाने का नाम भी है. भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी आने वाले समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता को नई दिशा दे सकती है.