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UP के कई जिलों में बनेंगे मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय, प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक आधुनिक सुविधाओं से होंगे लैस
Model Composite School: न स्कूलों में बच्चों को प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई एक ही परिसर में मिलेगी. इससे बच्चों और अभिभावकों को अलग-अलग स्कूल ढूंढने की परेशानी नहीं होगी और छात्रों को लगातार एक ही माहौल में पढ़ने का मौका मिलेगा.
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Model Composite School: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. सरकार का उद्देश्य है कि बच्चों को अच्छी और आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल मिलें, ताकि वे बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें. इसी दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कई जिलों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय बनाने का फैसला लिया है. इन स्कूलों में बच्चों को प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई एक ही परिसर में मिलेगी. इससे बच्चों और अभिभावकों को अलग-अलग स्कूल ढूंढने की परेशानी नहीं होगी और छात्रों को लगातार एक ही माहौल में पढ़ने का मौका मिलेगा.
कई जिलों में निर्माण को मिली मंजूरी
प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि राज्य के कई जिलों में इन विद्यालयों के निर्माण की अनुमति दे दी गई है. इनमें लखनऊ के मलिहाबाद, बहराइच, चंदौली, मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी, फतेहपुर, गाजियाबाद, कानपुर देहात, वाराणसी, कौशांबी, फर्रुखाबाद, अमेठी और उन्नाव जैसे जिले शामिल हैं. सरकार ने इन स्कूलों के निर्माण के लिए शासनादेश जारी कर दिया है और निर्माण शुरू करने के लिए पहली किस्त की धनराशि भी संबंधित संस्थाओं को दे दी गई है. इससे जल्द ही इन परियोजनाओं पर काम तेजी से शुरू होने की उम्मीद है.
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हर विद्यालय पर 23 से 28 करोड़ रुपये खर्च
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सरकार ने इन मॉडल स्कूलों के निर्माण के लिए अच्छी-खासी रकम तय की है. हर विद्यालय के निर्माण पर लगभग 23 से 28 करोड़ रुपये तक खर्च किए जाएंगे. इतनी बड़ी लागत इसलिए रखी गई है ताकि स्कूलों में बच्चों के लिए आधुनिक और अच्छी सुविधाएं तैयार की जा सकें. सरकार चाहती है कि ये स्कूल सिर्फ सामान्य स्कूल न हों, बल्कि ऐसे मॉडल स्कूल हों जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ बेहतर माहौल और जरूरी संसाधन भी मिलें.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्कूल
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मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों में बच्चों के लिए कई तरह की आधुनिक सुविधाएं तैयार की जाएंगी. यहां स्मार्ट और अच्छी कक्षाएं, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, खेल के मैदान और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन बनाए जाएंगे. इससे खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों को फायदा होगा, जिन्हें अक्सर शहरों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पातीं. एक ही परिसर में इतनी सुविधाएं मिलने से बच्चों को बेहतर तरीके से सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
सरकार का लक्ष्य – हर बच्चे को बेहतर शिक्षा
मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के हर बच्चे को अच्छा शैक्षिक वातावरण मिले. सरकार चाहती है कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक शिक्षा से जुड़ें और अपने भविष्य को बेहतर बना सकें. मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के बनने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और बच्चों को आगे पढ़ाई और करियर के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे. अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्कूलों का निर्माण तय समय में और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए.
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कई संस्थाएं मिलकर करेंगी निर्माण
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इन विद्यालयों का निर्माण अलग-अलग सरकारी संस्थाओं के माध्यम से कराया जाएगा. इनमें उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, लोक निर्माण विभाग (PWD), कंसल्टेंसी एंड डिजाइन सर्विसेज (उ.प्र. जल निगम), उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम और आवास एवं विकास परिषद जैसी संस्थाएं शामिल हैं. निर्माण के दौरान यह ध्यान रखा जाएगा कि काम सही मानकों के अनुसार हो, गुणवत्ता अच्छी हो और स्कूल समय पर बनकर तैयार हो जाएं, ताकि जल्द से जल्द बच्चों को इनका लाभ मिल सके.