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CIBIL 750+, फिर भी लोन क्यों नहीं मिल रहा? जानिए आखिर क्या है असली वजह?

क्रेडिट कार्ड की लिमिट का केवल 30% उपयोग करें, इससे आपका CIBIL स्कोर लगातार बेहतर बना रहता है.
लोन की EMI हमेशा समय पर भरें और बिना जरूरत के बार-बार लोन या कार्ड के लिए आवेदन न करें.

Image Source: Social Media
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CIBIL Score: आजकल जब भी कोई बैंक से लोन लेना चाहता है, तो सबसे पहले बैंक उसका CIBIL स्कोर चेक करता है. अगर स्कोर ठीक न हो, तो लोन मिलने में काफी दिक्कतें आ सकती हैं. हालांकि, बिना CIBIL स्कोर भी लोन मिल सकता है, लेकिन तब बैंक आपके पुराने रिकॉर्ड, नौकरी, इनकम और पेमेंट हिस्ट्री को बहुत ध्यान से देखता है. अगर आपका CIBIL स्कोर अच्छा हो, तो लोन जल्दी मंजूर होता है और ब्याज भी कम लगता है. इसलिए CIBIL स्कोर को बढ़िया रखना बहुत मायने रखता है.

क्या होता है CIBIL स्कोर?

CIBIL स्कोर को हम क्रेडिट स्कोर भी कहते हैं. यह एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो 300 से 900 के बीच होता है. यह स्कोर बताता है कि आपने अब तक क्रेडिट कार्ड या लोन का इस्तेमाल कैसे किया है, आपने समय पर EMI भरी है या नहीं, और आप कितने जिम्मेदार तरीके से पैसे का मैनेजमेंट करते हैं. इसमें 300 सबसे खराब और 900 सबसे बढ़िया माना जाता है. अगर आपका स्कोर अच्छा है, जैसे 750 या उससे ज्यादा, तो बैंक को भरोसा हो जाता है कि आप समय पर लोन चुका पाएंगे. लेकिन कई बार 750 स्कोर होने पर भी बैंक लोन नहीं देता. इसके पीछे कुछ खास वजहें होती हैं.

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750 स्कोर होते हुए भी लोन क्यों रिजेक्ट होता है?

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कई लोग सोचते हैं कि 750 का CIBIL स्कोर है, तो लोन तुरंत मिल जाएगा. लेकिन सच्चाई यह है कि बैंक केवल क्रेडिट स्कोर नहीं देखता, वह आपकी आमदनी, खर्च, EMI और आर्थिक स्थिति को भी समझता है. अगर बैंक को लगता है कि आप पहले से ज्यादा कर्ज में हैं या आपकी नौकरी स्थिर नहीं है, तो वह लोन देने से मना कर सकता है. इसलिए सिर्फ CIBIL स्कोर अच्छा होने से बात पूरी नहीं बनती, बाकी चीजें भी मायने रखती हैं.


1. डेब्ट-टू-इनकम रेश्यो (DTI) – 

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लोन रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह
DTI यानी आपका कितना पैसा हर महीने EMI में जा रहा है और कितनी आपकी कुल इनकम है. बैंक चाहता है कि आपकी मंथली इनकम का 40% से ज्यादा EMI में न जाए. मान लें आपकी सैलरी 1 लाख है और 45,000 रुपये EMI में जाता ह. इसका मतलब आपका DTI 45% है। भले ही आपका CIBIL स्कोर 750 हो, फिर भी बैंक कहेगा कि आप पहले से ज्यादा कर्जदार हैं और नए लोन को संभाल नहीं पाएंगे. DTI ज्यादा होने पर बैंक को डर रहता है कि अगला EMI आप मिस कर सकते हैं, इसलिए वह लोन देने से बचता है.


2. बार-बार लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करना

यदि आप कम समय में 3–4 बार लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक को लगता है कि आप आर्थिक परेशानी में हैं और पैसों की बहुत जरूरत है. इससे बैंक का भरोसा कम होता है और आपकी रिक्वेस्ट रिजेक्ट की जा सकती है.
इसके अलावा, जो लोग बार-बार नौकरी बदलते हैं, उन्हें बैंक जोखिम वाला ग्राहक मानता है और उन्हें लोन देने में हिचकिचाता है.

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कैसे बढ़ाएँ लोन मिलने की संभावना?


अगर आप चाहते हैं कि आपका लोन आसानी से मंजूर हो जाए, तो आपको अपनी वित्तीय आदतों में थोड़े बदलाव करने होंगे.
आपका DTI हमेशा 40% से कम होना चाहिए. कोशिश करें कि EMI आपकी आय के हिसाब से संतुलित हो.
एक ही नौकरी में लंबे समय तक टिके रहें, इससे बैंक को भरोसा होता है कि आपकी आय स्थिर है.
क्रेडिट कार्ड की लिमिट का केवल 30% उपयोग करें, इससे आपका CIBIL स्कोर लगातार बेहतर बना रहता है.
लोन की EMI हमेशा समय पर भरें और बिना जरूरत के बार-बार लोन या कार्ड के लिए आवेदन न करें.
इन सारी आदतों से बैंक को लगेगा कि आप पैसे को जिम्मेदारी से संभालते हैं और आपको लोन देने में कोई खतरा नहीं है.
 

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