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OPS बंद करने के पीछे की असली वजह क्या है? वित्त मंत्री ने संसद में किया खुलासा
पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की उम्मीद पर भले ही सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है, लेकिन UPS जैसे नए विकल्प से कर्मचारियों को थोड़ा भरोसा और राहत जरूर मिलेगी. अब सवाल यह है कि क्या कर्मचारी इस नए विकल्प को अपनाएंगे, या OPS की मांग जारी रहेगी यह आने वाले समय में साफ होगा.
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OldPensionScheme: केंद्र सरकार ने संसद में यह साफ कर दिया है कि फिलहाल पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को वापस लाने की कोई योजना नहीं है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए OPS बहाली का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है.
क्यों बंद की गई OPS?
सरकार ने बताया कि पुरानी पेंशन स्कीम से सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता था. इसमें किसी तरह की निवेश प्रणाली नहीं थी, जिससे भविष्य में पेंशन खर्च को संभालना मुश्किल हो जाता. इसी को देखते हुए सरकार ने 1 जनवरी 2004 से OPS बंद कर दी और उसकी जगह NPS लागू की, जो एक निवेश आधारित योजना है.
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अब क्या विकल्प मिलेगा?
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OPS की मांग को देखते हुए सरकार ने अब NPS में कुछ बदलाव करते हुए एक नया विकल्प दिया है जिसका नाम है, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS).
यह स्कीम 1 अप्रैल 2025 से लागू हो चुकी है और इसका मकसद है कि NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी एक निश्चित पेंशन का भरोसा दिया जा सके.
UPS के तहत कितनी पेंशन मिलेगी?
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UPS के तहत अब कर्मचारी को रिटायरमेंट पर उसकी अंतिम 12 महीनों की औसत बेसिक सैलरी का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं:
- कर्मचारी को कम से कम 25 साल की सेवा पूरी करनी होगी.
- अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को मिलने वाली पेंशन, उसकी पेंशन का 60% होगी.
- यदि किसी कर्मचारी ने 10 साल तक सेवा दी है, तो उसे कम से कम ₹10,000 महीना पेंशन की गारंटी मिलेगी, भले ही उसका पेंशन फंड कम हो.
क्यों खास है UPS?
UPS इस तरह से तैयार किया गया है कि:
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- सरकार का वित्तीय बोझ ज्यादा न बढ़े,
- साथ ही कर्मचारियों को भविष्य में पेंशन की निश्चित राशि मिल सके.
- यह योजना NPS की आधुनिक प्रणाली और OPS की सुरक्षा दोनों का संतुलन देती है.
पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की उम्मीद पर भले ही सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है, लेकिन UPS जैसे नए विकल्प से कर्मचारियों को थोड़ा भरोसा और राहत जरूर मिलेगी. अब सवाल यह है कि क्या कर्मचारी इस नए विकल्प को अपनाएंगे, या OPS की मांग जारी रहेगी यह आने वाले समय में साफ होगा.