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Trump के टैरिफ बखेड़े से बढ़ेगी बैंकों की टेंशन, छोटे उद्योग फंसेंगे कर्ज़ में...

Donald Trump: बीते कुछ सालों में भारत सरकार और रिजर्व बैंक ने मिलकर बैंकों के एनपीए को काफी हद तक कंट्रोल में किया है. लेकिन अमेरिकी टैरिफ की यह नई चुनौती इन कोशिशों पर पानी फेर सकती है.

Source: Bank
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Tariff Effect: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ यानी आयात शुल्क का असर अब भारत के छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) पर दिखने लगा है. भारत की घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि इन टैरिफ की वजह से कई कंपनियों की कमाई घट सकती है, जिससे उन्हें बैंकों से लिए गए कर्ज चुकाने में दिक्कत होगी. इसका सीधा असर बैंकों की सेहत पर पड़ेगा और एनपीए (NPA - Non-Performing Assets) यानी फंसे हुए कर्ज की समस्या बढ़ सकती है.

MSMEs को हो सकती है सबसे ज्यादा दिक्कत

क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि MSME (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज) सेक्टर को दिए गए कर्ज का एनपीए अगले वित्तवर्ष यानी 2025-26 के अंत तक बढ़कर 3.9% तक पहुंच सकता है, जो अभी 3.59% के आसपास है. इसका मतलब यह है कि जिन कंपनियों को बैंकों ने कर्ज दिया है, उनमें से कुछ पैसे लौटाने में नाकाम हो सकती हैं. वजह साफ है, अमेरिकी टैरिफ की वजह से उनके प्रोडक्ट्स अमेरिका में महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी बिक्री और मुनाफा दोनों घट जाएगा.

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किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

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क्रिसिल की डायरेक्टर सुभा श्री नारायणन के मुताबिक, टैरिफ का सबसे ज्यादा असर उन सेक्टर्स पर पड़ेगा जो अमेरिका को भारी मात्रा में सामान भेजते हैं. जैसे:

  • कपड़ा और परिधान उद्योग
  • कालीन और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर
  • रत्न और आभूषण (ज्वेलरी) उद्योग
  • समुद्री खाद्य पदार्थ (जैसे झींगा वगैरह)
  • रासायनिक उद्योग के कुछ हिस्से
  • इन सेक्टरों में काम करने वाली कंपनियां अमेरिका को काफी बड़ा निर्यात करती हैं, और अगर उनकी बिक्री में गिरावट आई, तो वे कर्ज लौटाने में सबसे पहले पिछड़ सकती हैं.

बैंकों का बढ़ सकता है एनपीए

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क्रिसिल का कहना है कि अभी भले ही बैंकों का एनपीए स्तर नियंत्रण में दिख रहा हो (करीब 3.59%), लेकिन अमेरिका के नए टैरिफ नियमों के चलते इसमें बढ़ोतरी हो सकती है. MSME सेक्टर बैंकिंग सिस्टम के कुल कर्ज का लगभग 17% हिस्सा है, यानी अगर इस सेक्टर में फंसा कर्ज बढ़ता है तो पूरा बैंकिंग सिस्टम दबाव में आ सकता है.

भारत पर टैरिफ क्यों लगाए गए?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ये टैरिफ अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए लगाए गए हैं. खासतौर पर भारत पर ज्यादा शुल्क इसलिए लगाया गया क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जो अमेरिका को पसंद नहीं है. इसी वजह से भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है. अब भारत से अमेरिका को जो भी चीज़ें एक्सपोर्ट होती हैं, उन पर कुल 50% टैरिफ लग गया है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. इसका सीधा असर यह है कि करीब 60 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर असर पड़ सकता है, और यह नुकसान काफी बड़ा है. अगर ये कंपनियां नुकसान में चली जाती हैं, तो उनकी लोन चुकाने की क्षमता भी कमजोर हो जाएगी, जिससे एनपीए बढ़ना तय है.

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सरकार की कोशिशें भी पड़ सकती हैं धीमी

बीते कुछ सालों में भारत सरकार और रिजर्व बैंक ने मिलकर बैंकों के एनपीए को काफी हद तक कंट्रोल में किया है. लेकिन अमेरिकी टैरिफ की यह नई चुनौती इन कोशिशों पर पानी फेर सकती है. अगर MSME सेक्टर दबाव में आता है, तो बैंकों की दिक्कतें भी बढ़ेंगी, और उसका असर पूरे इकोनॉमी पर पड़ सकता है.

अगर ये हालात लंबे समय तक बने रहे, तो भारतीय बैंकों को और सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं. लोन की शर्तें कड़ी हो सकती हैं, MSMEs को नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है, और बैंकों का मुनाफा भी घट सकता है.

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