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New Inome Tax Bill 2025: कर निर्धारण वर्ष की जगह होगा केवल कर वर्ष, बदलाव के बारे में जानिए
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में नया आयकर बिल 2025 पेश किया। आयकर कानूनों को सरल बनाने के लिए नया कानून बनाने का एलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी 2025 के अपने बजट भाषण में किया था। जानिए क्या हुआ है बदलाव
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बहुप्रतीक्षित आयकर विधेयक 2025 पेश किया। विधेयक पेश करने के बाद, उन्होंने अध्यक्ष ओम बिरला से इसे सदन की प्रवर समिति को भेजने का अनुरोध किया। विपक्षी सदस्यों ने इसका विरोध किया, लेकिन सदन ने इसे प्रस्तुत करने के लिए ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया।
आयकर विधेयक 2025 के प्रमुख बिंदु
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विधेयक को पेश करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि मसौदा कानून को सदन की प्रवर समिति को भेजा जाए, जो अगले सत्र के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके साथ ही, उन्होंने अध्यक्ष से प्रस्तावित पैनल की संरचना और नियमों पर निर्णय लेने का भी अनुरोध किया।
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इस विधेयक का उद्देश्य आयकर कानून को सरल और समझने में आसान बनाना है। इस विधेयक में "कर निर्धारण वर्ष" और "पूर्व वर्ष" जैसे शब्दों के स्थान पर "कर वर्ष" जैसे आसान शब्दों का उपयोग किया जाएगा, जिससे कर कानून की भाषा अधिक सरल और सुलभ हो सके। इसके अतिरिक्त, पुराने और अनावश्यक प्रावधानों और स्पष्टीकरणों को हटा दिया जाएगा।
बजट भाषण में वित्त मंत्री द्वारा नए आयकर कानून की घोषणा
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को अपने बजट भाषण में आयकर कानून को सरल बनाने के लिए नए विधेयक का एलान किया था। इस विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट से भी मंजूरी मिल चुकी है। आयकर विधेयक 2025 में 536 धाराएं हैं, जो वर्तमान आयकर अधिनियम, 1961 के 298 धाराओं से अधिक हैं। यह विधेयक 23 अध्यायों में बांटा गया है और 622 पन्नों का है। इस विधेयक के पारित होने के बाद, नया आयकर कानून अधिक व्यवस्थित और सरल होगा, जो वर्तमान कानून की तुलना में कहीं अधिक समझने योग्य होगा।
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मूल्यांकन वर्ष और कर निर्धारण वर्ष की अवधारणा समाप्त
आयकर विधेयक 2025 में मूल्यांकन वर्ष (AY) और कर निर्धारण वर्ष (FY) की अवधारणाओं को समाप्त कर दिया गया है। पहले के कानून में, एक वित्तीय वर्ष में अर्जित आय के लिए कर का भुगतान अगले निर्धारण वर्ष में किया जाता था। नए विधेयक में कर वर्ष की अवधारणा होगी, जिससे आयकर प्रणाली को अधिक सरलीकृत किया जाएगा।
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पुराने आयकर कानून में कई बदलाव
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नए आयकर विधेयक में आयकर अधिनियम, 1961 की तरह ही 23 अध्याय होंगे, लेकिन 622 पन्नों का यह विधेयक पुराने अधिनियम के मुकाबले कहीं अधिक संक्षिप्त और आसान होगा। पुराने आयकर कानून में पिछले छह दशकों में किए गए कई संशोधनों को ध्यान में रखते हुए, यह नया विधेयक लाया जा रहा है। जब आयकर अधिनियम 1961 लागू हुआ था, तो वह 880 पन्नों का था, जबकि अब इस विधेयक का आकार लगभग आधा हो गया है।
आयकर प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम
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आयकर विधेयक 2025 के पारित होने के बाद यह पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा। यह नया विधेयक करदाताओं के लिए अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और समझने में आसान होगा। पुराने कानून की जटिलताओं को समाप्त करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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कराधान में सुधार की दिशा में एक नया अध्याय
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आयकर विधेयक 2025 के लागू होने से आयकर अधिनियम, 1961 के छह दशक पुराने कानून का अंत होगा और एक नई, सरल और व्यवस्थित कर प्रणाली की शुरुआत होगी। इस विधेयक में किए गए सुधार और बदलाव करदाताओं के लिए कर फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाएंगे, जिससे पारदर्शिता और बेहतर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह विधेयक भारत में आयकर प्रणाली को आधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।