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मोदी सरकार की इस इलेक्ट्रॉनिक्स स्कीम ने किया कमाल, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बना भारत

आर्थिक मोर्चे पर साल 2025 भारत के लिए काफी सकारात्मक रहा. जहां अर्थव्यवस्था, विकास, निर्यात, खुदरा महंगाई दर के मोर्चे पर भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया वहीं, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बन गया है. उसका इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन छह गुना बढ़ गया है.

Mobile Manufacturing (File Photo)
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साल 2025 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा. इस साल कई बदलाव और कई घटनाएं हुईं, जिनका असर देश के विकास, लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और शेयर बाजार पर पड़ा. कोरोना काल में चीन में आई व्यापार की परेशानी और सप्लाई चेन को लेकर दिक्कतों ने भारत के लिए नए द्वार खोले. दुनिया की कंपनियों ने वैकल्पिक अर्थव्यवस्थाओं की तलाश की, जहां सूचनाएं खुली हों और जवाबदेही लोकतांत्रिक हो. ऐसे में भारत उसमें टॉप पर शुमार हुआ. 

इसी कड़ी में सरकार ने मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को आकर्षित करते हुए कई पॉलिसीज बनाईं और इंसेंटिव प्रदान किए, जिसका असर अब दिखना शुरू हो गया है. दरअसल भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बन गया है. साथ ही, देश के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में छह गुना की बढ़ोतरी हुई है.

अप्रैल-नवंबर अवधि में 38 प्रतिशत बढ़ा भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 

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भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-नवंबर अवधि में सालाना आधार पर 38 प्रतिशत बढ़कर 31 अरब डॉलर हो गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात बढ़ने की वजह प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम का होना है, जिसने एप्पल जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियों को भारत में अपनी आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थानांतरित करने के लिए आकर्षित किया है. चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में आईफोन का निर्यात करीब 14 अरब डॉलर रहा है, जो कि कुल इलेक्ट्रॉनिक्स की निर्यात वैल्यू का करीब 45 प्रतिशत से अधिक है. 

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इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 वर्षों में आठ गुना बढ़ा!

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) जैसी स्कीमों के कारण देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बीते 11 वर्षों में आठ गुना बढ़ा है.

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पीएलआई स्कीम ने आकर्षित किया 13,475 करोड़ रुपए का निवेश

उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए लाई गई पीएलआई स्कीम ने 13,475 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है और इससे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 9.8 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन हुआ है और मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ नौकरियों और निर्यात में बढ़त हुई है. वैष्णव ने बताया कि बीते पांच वर्षों में 1.3 लाख से ज्यादा नौकरियां इस सेक्टर में पैदा हुई हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी है.

गेम चेंजर साबित हुई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम

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उन्होंने कहा कि देश शुरू में तैयार प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रहा था, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम ने "मॉड्यूल, कंपोनेंट, सब-मॉड्यूल, कच्चे माल और उन्हें बनाने वाली मशीनों के लिए क्षमता बनाने" की तरफ बदलाव को सपोर्ट किया. पोस्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम में 249 आवेदन आए हैं, जो 1.15 लाख करोड़ रुपए के निवेश, 10.34 लाख करोड़ रुपए के उत्पादन और 1.42 लाख नौकरियां पैदा करने का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धता है, जो इंडस्ट्री के भरोसे को दिखाता है.

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से पैदा हुईं 25 लाख नौकरियां!

वैष्णव ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में हुई प्रगति के बारे में भी बताया, और कहा कि दस यूनिट्स को मंजूरी मिल गई है, जिनमें से तीन पहले से ही पायलट या शुरुआती प्रोडक्शन में हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत से फैब्स और एटीएमपी जल्द ही फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों को चिप्स सप्लाई करेंगे. केंद्रीय मंत्री ने कहा, "पिछले दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से 25 लाख नौकरियां पैदा हुईं. यह जमीनी स्तर पर असली आर्थिक विकास है."

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उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे हम सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे, रोजगार के अवसर और तेजी से बढ़ेंगे. तैयार प्रोडक्ट्स से लेकर कंपोनेंट्स तक, प्रोडक्शन बढ़ रहा है. एक्सपोर्ट बढ़ रहा है. ग्लोबल कंपनियां भरोसेमंद हैं और भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धी हैं. नौकरियां पैदा हो रही हैं. यह 'मेक इन इंडिया' की सफलता की कहानी है." 

IMF ने बढ़ाया 6.5% से 6.9% भारत के विकास का अनुमान

वहीं साल 2025 में भारत फिर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष स्थान पर रहा. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान इस वित्त वर्ष के लिए 6.7 प्रतिशत से 6.9 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत से 6.9 प्रतिशत तक बढ़ाया. इसका कारण प्रत्यक्ष आयकर छूट, उदार मौद्रिक नीति, जीएसटी सुधार और अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते हैं. आईएमएफ और आरबीआई के अनुसार, साल 2025 में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सरकारी निवेश से विकास को काफी गति मिली.

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कम रही भारत में खुदरा महंगाई दर!

इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में खुदरा महंगाई केवल 0.25 प्रतिशत रही, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से बहुत कम है. वहीं दिसंबर एमपीसी बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया. इसी के साथ इस साल चौथी बार केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को कम किया है, जिससे लोगों को लोन लेना आसान हो गया और आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा.

किस सेक्टर में रहा निर्यात मजबूत!

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इतना ही नहीं, इस वर्ष आईटी, बीपीओ, कंसल्टिंग और रिमोट हेल्थ/एजुकेशन जैसी सेवाओं का निर्यात मजबूत रहा. आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सेवा निर्यात और रेमिटेंस ने चालू खाता संतुलन बनाए रखने में मदद की, भले ही ऊर्जा की कीमतें और टैरिफ संबंधी अनिश्चितता रही. अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक 86 आईपीओ ने लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपए जुटाए, जो पिछले साल से तकरीबन दोगुना है. नई लिस्टिंग्स अधिकतर ओवरसब्सक्राइब हुईं और निफ्टी से लगभग चार गुना बेहतर रिटर्न दिया. यह घरेलू निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स और रिटेल निवेश से संभव हुआ.

हालांकि इस दौरान विदेशी निवेश अस्थिर रहे. वहीं घरेलू निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. एसआईपी, बढ़ते डीमैट अकाउंट्स और 'गिरावट पर खरीदारी' की मानसिकता ने बाजार को मजबूती प्रदान की.

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