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सरकारी योजनाओं की ताकत से वैश्विक मंच पर चमक रहा भारतीय फार्मा क्षेत्र

सरकार की नीतियों और योजनाओं ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिनमें जनऔषधि योजना (PMBJP) और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना प्रमुख हैं .

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Indian Pharma Sector: भारत का फार्मा सेक्टर पिछले 10 वर्षों में किफायती, इनोवेटिव और इन्क्लूसिव (समावेशी) विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुका है. इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर भी इसने अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. सरकार की नीतियों और योजनाओं ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिनमें जनऔषधि योजना (PMBJP) और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना प्रमुख हैं. इन योजनाओं से भारत के फार्मा उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिली है, और यह वृद्धि आने वाले वर्षों में भी जारी रहने की संभावना है.

आगामी वर्षों में 7.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान

भारत के फार्मा सेक्टर में आने वाले वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2025) में लगभग 7.8 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है. फिच ग्रुप के इंडिया रेटिंग्स के विशेषज्ञों का अनुमान है कि मजबूत मांग और नए उत्पादों के कारण यह वृद्धि होगी. यह वृद्धि न केवल घरेलू बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत के फार्मा उद्योग को एक नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगी.

वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति

भारत का फार्मा उद्योग वैश्विक स्तर पर अपने उत्पादन और आपूर्ति के मामले में काफी प्रमुख बन चुका है. मात्रा के मामले में यह तीसरे स्थान पर और मूल्य के मामले में 14वें स्थान पर है। भारत अब दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन चुका है और वैश्विक आपूर्ति में इसकी हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है. भारत किफायती टीकों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी है, और यह वैश्विक टीका आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

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सरकारी योजनाओं का प्रभाव

भारत सरकार की स्मार्ट योजनाओं ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है. प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के तहत देशभर में 15,479 जन औषधि केंद्रों का संचालन हो रहा है. इन केंद्रों पर ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 80 प्रतिशत कम कीमत पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हैं, जिससे गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को सस्ती दवाइयां मिल रही हैं.

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इसके अलावा, फार्मास्युटिकल्स के लिए 15,000 करोड़ रुपए की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत कैंसर, मधुमेह और अन्य लाइफस्टाइल से संबंधित दवाओं का उत्पादन भारत में बढ़ाने के लिए 55 परियोजनाओं को सरकार मदद दे रही है. इस योजना से भारत में दवाओं का उत्पादन अधिक सस्ता और प्रभावी हो रहा है. इसके साथ ही, 6,940 करोड़ रुपए की एक और PLI योजना पेनिसिलिन जी जैसे कच्चे माल के उत्पादन पर केंद्रित है, जिससे आयात की जरूरत कम हो रही है.

वैश्विक आपूर्ति में भारत की भूमिका

भारत का फार्मा सेक्टर वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है. भारत यूनिसेफ के 55-60 प्रतिशत टीके की आपूर्ति करता है. डब्ल्यूएचओ के डीपीटी (डिप्थीरिया, काली खांसी और टेटनस) वैक्सीन की 99 प्रतिशत, बीसीजी की 52 प्रतिशत और खसरे की 45 प्रतिशत मांग को भारत पूरा करता है. इसके अलावा, बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (BCG) जैसी महत्वपूर्ण वैक्सीन्स का भी भारत प्रमुख आपूर्तिकर्ता है.

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निवेश और विदेशी निवेशकों का विश्वास

भारत का फार्मा सेक्टर विदेशी निवेशकों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र बन चुका है. अकेले 2023-24 में विदेशी निवेशकों ने इस क्षेत्र में 12,822 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो भारत की बढ़ती फार्मा क्षमता को दर्शाता है. सरकार चिकित्सा उपकरणों और ग्रीनफील्ड फार्मा परियोजनाओं में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश का स्वागत करती है, जिससे वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश करने के लिए प्रेरित हो रही हैं.

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