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भारत की फ़ार्मा कंपनियों का अमेरिकी बाज़ार में धमाल, तेज़ी से हो रहा विस्तार, रिपोर्ट में खुलासा

भारतीय फार्मा कंपनियां वर्तमान में 145 अरब डॉलर वैल्यू के अमेरिकी ऑन्कोलॉजी जेनेरिक्स बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं. यह बाजार सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. यह जानकारी नई रिपोर्ट में दी गई.

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भारत और अमेरिका के बीच अच्छे व्यापारिक रिश्ते रहे हैं. खासकर, फार्मास्युटिकल में भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़ा है. भारत यूएस को 47% जेनेरिक मेडिसिन की सप्लाई कॢरता है और यह अमेरिका के हेल्थकेयर सिस्टम का एक महत्वपूर्ण पार्टनर है. भारतीय फार्मा कंपनियां वर्तमान में 145 अरब डॉलर वैल्यू के अमेरिकी ऑन्कोलॉजी जेनेरिक्स बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं. यह बाजार सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. यह जानकारी नई रिपोर्ट में दी गई.


दवाओं की एंट्री में हो रही लगातार वृद्धि

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हाल के महीनों में कई भारतीय दवा कंपनियों ने कैंसर दवाओं के जेनेरिक वर्जन के लिए यूएस फूड और ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) से एप्रूवल प्राप्त किया है, जिससे अमेरिकी बाजार में कॉम्पलेक्स जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं की एंट्री में लगातार वृद्धि हुई है.

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रिपोर्ट में कहा गया कि ऑन्कोलॉजी वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते सेगमेंटों में से एक है और भारतीय कंपनियां किफायती मैन्युफैक्चरिंग, तकनीकी विशेषज्ञता और बढ़ती नियामक मंजूरी के जरिए इस उच्च-मूल्य वाले क्षेत्र में प्रवेश करने की तैयारी कर रही हैं.


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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह पारंपरिक जेनेरिक दवाओं से अधिक कॉम्पलेक्स फॉर्मूलेशन की ओर बदलाव और भारतीय फार्मा कंपनियों की विकसित होती क्षमताओं को दिखाता है.

वैश्विक बाजारों में सफलता मिलने के कारण भारतीय फार्मा सेक्टर में विदेशी निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है.

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फार्मास्यूटिकल्स डिपार्टमेंट के अनुसार, भारत के फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच 11,888 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ था.

इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2025 के दौरान ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स के लिए 7,246.40 करोड़ रुपये के 13 एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे कुल एफडीआई 19,134.4 करोड़ रुपये हो गई.


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केंद्र की पीएलआई स्कीम का योगदान

इस सेक्टर में एफडीआई बढ़ने की वजह केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम को माना जा रहा है. इसका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और निर्यात को बढ़ाना है. फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर के लिए 15,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ 2021 में शुरू की गई यह योजना कॉम्पलेक्स जेनरिक, बायोफार्मास्युटिकल्स और एंटी कैंसर दवाओं जैसे हाई-वैल्यू उत्पादों पर केंद्रित है.

इस योजना का एक अच्छा परिणाम यह है कि इसमें शुरुआती निवेश लक्ष्य से अधिक निवेश हुआ है. प्रस्तावित निवेश 3,938.57 करोड़ रुपये था, जबकि 2024 के अंत तक वास्तविक निवेश 4,253.92 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

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इतना ही नहीं आंध्र प्रदेश में पेनिसिलिन जी यूनिट और हिमाचल प्रदेश में क्लावुलैनिक एसिड सुविधा जैसे प्रोजेक्ट पीएलआई के प्रमुख लाभार्थियों में से हैं, जिनसे आयात लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है.


दवाईयों पर भी लगेगा टैरिफ: ट्रंप

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जैसा की आपसी जानते है कि 2 अप्रेल से भारत समेत कई देशों पर अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगा दिया है. इसी कड़ी में दवाइयों पर भी टैरिफ़ लगाया जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अब फार्मा पर बड़ा टैरिफ लगाया जाएगा. उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि हम एक जरूरी कदम उठाने जा रहे हैं. जब हम दवाइयों पर भी टैरिफ लगाएंगे, तो विदेशी कंपनियां अमेरिका में दवा बनाने के लिए वापस लौटेंगी, क्योंकि यूएस सबसे बड़ा मार्केट है. ट्रंप ने कहा कि दवाओं पर टैरिफ से फार्मा कंपनियों पर दबाव पड़ेगा, जिससे वे चीन जैसे देशों से अपना कारोबार हटाकर अमेरिका में फैक्ट्रियां लगाएंगी. बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा दवाइयां चीन, भारत और यूरोप में बनती हैं.

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