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'भारत दुनिया का ग्रोथ इंजन...', IMF ने भी माना भारतीय अर्थव्यवस्था का लोहा, GDP ग्रोथ को लेकर कह दी बड़ी बात!

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है. IMF ने साल 2025 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3% कर दिया है. वहीं IMF संचार विभाग की निदेशक जूली कोज़ैक ने कहा है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन है.

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भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है. दुनियाभर की एजेंसियों ने ना सिर्फ भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है बल्कि भारत को दुनिया के विकास का ग्रोथ इंजन तक करार दिया है. वहीं देश की विकास यात्रा को लेकर वैश्विक, आर्थिक और मॉनिटरी संगठनों का भरोसा लगातार मजबूत होता जा रहा है. 

IMF की आईएमएफ की संचार विभाग की निदेशक जूली कोज़ैक ने बीते दिनों भारत की तेजी से बढ़ती इकोनॉमी के बारे में कहा था कि भारत ग्लोबल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है, भले ही व्यापक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल में अनिश्चितता छाई हुई हो. इतना ही नहीं कोज़ैक ने  ये भी कहा कि 'हमने भारत में देखा है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन है'
 
IMF ने बढ़ाया भारत के विकास दर का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी एक बार फिर भारत की आर्थिक मजबूती का लोहा माना है और साल 2025 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले के अनुमान से 0.7 प्रतिशत अधिक है. IMF के अनुसार, साल के दूसरे हिस्से में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन, खासकर तीसरी तिमाही के मजबूत नतीजे और चौथी तिमाही की तेज रफ्तार ने इस संशोधन में अहम भूमिका निभाई है. इससे साफ है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है.

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भारत दुनिया का ग्रोथ इंजन बना रहेगा: IMF

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IMF का मानना है कि 2026 और 2027 में भारत की विकास दर घटकर 6.4 प्रतिशत रह सकती है, लेकिन इसके बावजूद भारत उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास का प्रमुख इंजन बना रहेगा. आईएमएफ के मुताबिक, इसी अवधि में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की औसत विकास दर 4 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहने की संभावना है. एशियाई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को तकनीक आधारित निवेश और वैश्विक व्यापार से फायदा मिल रहा है, भले ही दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आर्थिक रफ्तार एक जैसी न हो.

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वैश्विक आर्थिक विकास दर 3.3% के पास रहने का अनुमान

वैश्विक परिदृश्य की बात करें तो आईएमएफ ने अनुमान जताया है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास दर 3.3 प्रतिशत पर स्थिर रह सकती है. व्यापार तनाव में कमी, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों में बढ़ता निवेश इसमें सहायक होगा. भारत के लिए राहत की बात यह भी है कि 2025 में महंगाई में गिरावट के बाद मुद्रास्फीति दर फिर से तय लक्ष्य के करीब आ सकती है, जिससे घरेलू मांग को मजबूती मिलेगी. हालांकि आईएमएफ ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर एआई से मिलने वाले फायदे उम्मीद से कम रहे या वैश्विक वित्तीय हालात सख्त हुए, तो इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है.

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत: NSE

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वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की रिपोर्ट भी इसी तस्वीर को मजबूत करती है. NSE के अनुसार, भारत 2025 में करीब 7.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा. मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता, बढ़ता निवेश और पूंजी बाजार में रिकॉर्ड फंड जुटाना इसकी बड़ी वजहें हैं. स्थिर घरेलू मांग और सरकारी खर्च के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि वैश्विक समकक्षों से कहीं आगे रही है. महंगाई आरबीआई के दायरे में रहने से रेपो रेट में 125 आधार अंकों की कटौती का रास्ता भी खुला.

विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर के पास

पूंजी बाजार में भारत की मजबूती साफ दिखती है. मजबूत सर्विसेज निर्यात के चलते विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर के आसपास बना हुआ है. 2025 में एनएसई पर कंपनियों ने 19.6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसमें से बड़ी हिस्सेदारी डेट मार्केट से आई, जबकि इक्विटी मार्केट से भी रिकॉर्ड फंड जुटाया गया. आईपीओ के मोर्चे पर भी भारत ने वैश्विक नेतृत्व किया, जहां 220 आईपीओ के जरिए 1.78 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए. निवेशकों की भागीदारी बढ़कर 12.5 करोड़ यूनिक निवेशकों और 24 करोड़ से अधिक क्लाइंट अकाउंट्स तक पहुंच गई है.

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आपको बताएं कि आईएमएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिए थे कि भारत के हालिया तिमाही प्रदर्शन को देखते हुए विकास दर का अनुमान और बढ़ सकता है और हुआ भी वैसा ही. तीसरी तिमाही के मजबूत आंकड़ों ने वैश्विक संस्थानों का भरोसा और पुख्ता किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू खपत, नीतिगत स्थिरता और वित्तीय अनुशासन भारत को मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं.

2030 तक मिडिल इनकम कंट्री की श्रेणी में शामिल हो सकता है भारत: SBI रिसर्च

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इसके अलावा एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2030 तक प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंचाकर अपर मिडिल इनकम कंट्री की श्रेणी में शामिल हो सकता है. भारत ने 2009 में पहली बार 1,000 डॉलर, 2019 में 2,000 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा पार किया था और 2026 तक 3,000 डॉलर तक पहुंचने की राह पर है. एसबीआई का अनुमान है कि भारत अगले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रति व्यक्ति आय में औसतन 7.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की जरूरत होगी, जबकि पिछले दो दशकों में यह दर इससे भी बेहतर रही है.

कुल मिलाकर आईएमएफ, एनएसई और एसबीआई की रिपोर्टें एक ही बात कहती हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बीच भारत न केवल मजबूती से खड़ा है, बल्कि आने वाले वर्षों में भी वैश्विक विकास का प्रमुख स्तंभ बना रहने की पूरी क्षमता रखता है. आर्थिक सुधार, मजबूत घरेलू मांग, निवेशकों का भरोसा और नीतिगत स्थिरता भारत की विकास गाथा को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं.

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