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भारत-EU ने एक दूसरे को दिया MFN का दर्जा, अमेरिका के लिए बढ़ी टेंशन, जानें क्या है इसका मतलब!
भारत और EU ने एक दूसरे को MFN स्टेटस देने का फैसला किया है. इस फैसले से ना सिर्फ भारत को 27 देशों में एक साथ लाभकारी ट्रेड एक्सेस मिलेगा बल्कि अमेरिका को काउंटर करने और उसके टैरिफ से भी बड़े पैमाने पर निजात मिलेगी.
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अमेरिका के साथ व्यापार को लेकर तनाव के बीच भारत ने अपने लिए नए रास्ते तलाशे और ईयू-ब्रिटेन, न्यूजीलैंड सहित कई देशों के साथ ट्रेड डील्स किए. जब ट्रंप ने नई दिल्ली पर 50% टैरिफ लगाया तो वो हिंदुस्तान के लिए एक आपदा में अवसर की तरह था. मोदी सरकार ने ये तय किया कि भारत एकमात्र अमेरिका के भरोसे अपनी अर्थव्यवस्था को नई चला सकता. उसका कोई भरोसा नहीं है. कुछ इसी तरह की समस्या से जूझ रहे ईयू ने भारत के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक फैसला किया और फिर किया इतिहास का सबसे बड़ा समझौता. भारत-EU ने बीते महीने लंबे समय से लटके FTA पर सहमति जताई और ट्रेड डील साइन किया, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा गया. इसी बीच एक और फैसला दोनों पक्षों ने लिया कि वो 5 साल के लिए एक-दूसरे को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा देंगे.
आपको बताएं कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने अपने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने पर एक-दूसरे को पांच वर्षों के लिए मोस्ट फेवरेट नेशन (MFN) का दर्जा देने का फैसला किया है. जारी मसौदे के अनुसार ये कदम दोनों पक्षों की व्यापारिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम माना जा रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इस समझौते के लागू होते ही दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे को 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा प्रदान करेंगी. इसका मतलब है कि दोनों पक्ष विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के प्रति बाध्य होंगे और वैश्विक नियमों से इतर कोई भी नया आयात-निर्यात प्रतिबंध नहीं लगा पाएंगे.
भारत को व्यापार और टैरिफ के मोर्चे पर बंपर फायदा
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27 देशों के इस समूह EU ने पिछले महीने नई दिल्ली के साथ यह लंबे समय से लंबित समझौता किया, जिसका उद्देश्य बढ़ते वैश्विक व्यापार तनावों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है. इस समझौते के तहत व्यापार की जाने वाली वस्तुओं के मूल्य के आधार पर 96.6% वस्तुओं पर टैरिफ समाप्त या कम किए जाएंगे. इससे 2032 तक भारत को EU के निर्यात के दोगुना होने की उम्मीद है. इस समझौते से यूरोपीय कंपनियों को लगभग 4 अरब यूरो (4.7 अरब डॉलर) की ड्यूटी बचत होगी.
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वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी एक ड्राफ्ट के अनुसार, FTA के लागू होने के बाद दोनों पक्ष पांच वर्षों के लिए एक-दूसरे को MFN दर्जा देने की योजना बना रहे हैं. इस अवधि के दौरान न तो भारत और न ही यूरोपीय संघ किसी अन्य साझेदार को इससे बेहतर टैरिफ शर्तें दे सकता है.
सरल शब्दों में, यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि यदि दोनों में से कोई भी पक्ष किसी अन्य देश के साथ नया व्यापार समझौता करता है और उसमें और बेहतर टैरिफ दरें देता है, तो वही शर्तें अपने आप अपने सभी मोस्ट फेवर्ड नेशन साझेदारों पर भी लागू होंगी. दोनों पक्षों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों से आगे जाकर किसी भी प्रकार के अतिरिक्त व्यापार प्रतिबंधों से बचने और डिजिटल व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है.
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व्यापार प्रवाह को आसान बनाने के लिए, नई दिल्ली और ब्रसेल्स खाद्य सुरक्षा और पौध स्वास्थ्य उपायों को WTO मानकों के अनुरूप करेंगे तथा प्रमाणन और ऑडिट प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे. इसके अलावा, बेहतर सीमा-शुल्क सहयोग और वस्तुओं की तेज़ क्लियरेंस की व्यवस्था भी की जाएगी, जो समझौते के अनुमोदन (ratification) के बाद बाध्यकारी होगी.
MFN दर्जा क्या होता है?
मोस्ट फेवर्ड नेशन या MFN दर्जा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भेदभाव से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सिद्धांत है. इस सूची में शामिल होने का मतलब है कि संबंधित देश को सबसे कम टैरिफ और सर्वोत्तम व्यापारिक शर्तें मिलेंगी. यानी उस देश के साथ वैसा ही व्यवहार करना होगा जैसा अपने सबसे पसंदीदा व्यापारिक साझेदार के साथ किया जाता है. इसलिए किसी एक देश (या EU जैसे समूह) को दी गई कोई भी व्यापारिक सुविधा अन्य सभी MFN भागीदारों को भी देनी होती है.
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यह WTO का एक मूल नियम है और आमतौर पर सदस्य देश अन्य सभी WTO सदस्यों के लिए समान व्यापार शर्तें लागू करते हैं, जब तक कि कोई विशेष अपवाद, जैसे कोई FTA, लागू न हो. FTA इस अवधारणा को और आगे ले जाता है, यह सुनिश्चित करता है कि EU या भारत यदि किसी अन्य देश को बेहतर समझौता देता है, तो वही बेहतर टैरिफ शर्तें अपने आप इन दोनों के बीच भी लागू होंगी. किसी भी तीसरे देश (या समूह) को इनमें से किसी भी पक्ष से बेहतर सौदा नहीं मिल सकता.
WTO का मूल मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) सिद्धांत यह मांग करता है कि सदस्य देश सभी अन्य सदस्यों पर समान, गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार शर्तें (जैसे टैरिफ) लागू करें, ताकि समान व्यवहार सुनिश्चित हो सके. हालांकि, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) जैसे प्राथमिक समझौतों के लिए अपवाद की अनुमति दी जाती है. EU और भारत के बीच संभावित FTA जैसे समझौते अक्सर ऐसे तंत्र शामिल करते हैं, जिनके तहत किसी तीसरे देश को दी गई बेहतर, कम टैरिफ शर्तें अपने आप संबंधित साझेदार पर भी लागू हो जाती हैं, जिससे कोई तीसरा देश उनसे बेहतर सौदा न पा सके.
MFN में क्या करना होता है, क्या फायदा होता है?
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मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) नियम: WTO के तहत, यदि कोई देश किसी एक राष्ट्र के लिए सीमा-शुल्क घटाता है, तो वही लाभ उसे सभी WTO सदस्यों को देना होता है. WTO क्षेत्रीय व्यापार समझौतों, विशेष रूप से मुक्त व्यापार क्षेत्रों (FTA) और कस्टम्स यूनियनों (CU) के लिए MFN से छूट की अनुमति देता है, बशर्ते वे लगभग पूरे व्यापार को कवर करें.
FTA: आधुनिक FTAs, विशेष रूप से भारत-EU जैसे संभावित समझौते, “सुरक्षित” समझौते की तरह काम करते हैं और अक्सर ऐसे प्रावधान रखते हैं जिनके तहत किसी अन्य देश को दी गई बेहतर शर्तें अपने आप साझेदार देश पर भी लागू हो जाती हैं.
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गैर-भेदभाव का उद्देश्य: इसका मूल लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनुचित भेदभाव को रोकना और आयातित वस्तुओं एवं सेवाओं के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है.