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अगर अमेरिका में बने iPhone, तो जेब होगी खाली... 3 लाख तक पहुंचेगी कीमत!

पूरी तरह से अमेरिका में iPhone बनाना न केवल अत्यधिक महंगा है, बल्कि व्यावहारिक रूप से बहुत जटिल भी है. इसके विपरीत, भारत जैसे देशों में निर्माण करना एप्पल के लिए कहीं अधिक फायदेमंद और टिकाऊ विकल्प है. आने वाले समय में भारत एप्पल की ग्लोबल सप्लाई चेन में और भी बड़ी भूमिका निभा सकता है.

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Made in America iPhone Price:  शीर्ष तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि अगर एप्पल पूरी तरह से अमेरिका में iPhone बनाना शुरू कर दे, तो इसकी कीमत करीब $3,500 (लगभग 2.98 लाख रुपये) तक हो सकती है. इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका में एप्पल को वही सप्लाई चेन दोबारा बनानी पड़ेगी जो अभी एशिया में बहुत ही व्यवस्थित और सस्ती है. वेडबश सिक्योरिटीज के टेक्नोलॉजी रिसर्च प्रमुख डैन इवेस ने सीएनएन को बताया कि अमेरिका में iPhone बनाना एक काल्पनिक सोच है, क्योंकि वहां पर वैसी फैक्ट्रियां और संसाधन नहीं हैं जैसी चीन, वियतनाम और भारत में मौजूद हैं.

इवेस ने कहा कि अगर अमेरिका के राज्यों जैसे वेस्ट वर्जीनिया और न्यू जर्सी में फैक्ट्रियां लगाई जाएं, तो आईफोन की लागत तीन गुना तक बढ़ जाएगी. इसका मतलब है कि मौजूदा $1,000 से $1,200 की तुलना में इसकी कीमत सीधे $3,500 तक पहुंच सकती है.

अमेरिका में निर्माण पर कितना खर्च होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर एप्पल अपनी सप्लाई चेन का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा ही अमेरिका में लाना चाहे, तो भी उसे कम से कम तीन साल और 30 अरब डॉलर (लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये) खर्च करने होंगे. यह निवेश इतना बड़ा है कि कंपनी के मुनाफे पर भारी असर पड़ सकता है.

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भारत क्यों बना है एप्पल का नया मैन्युफैक्चरिंग हब?

एप्पल के सीईओ टिम कुक ने हाल ही में कहा कि अमेरिका में बिकने वाले कई आईफोन अब भारत से भेजे जाएंगे. इसका मतलब है कि भारत एप्पल की सप्लाई चेन में अब बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

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भारत में मैन्युफैक्चरिंग करना एप्पल जैसी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, क्योंकि यहां कम लागत, तेजी से विकसित हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर, और सरकार की 'मेक इन इंडिया' जैसी योजनाओं का पूरा समर्थन मिल रहा है.

अमेरिकी दबाव और भारत की भूमिका

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर आईफोन अमेरिका में नहीं बनाए गए, तो यूरोपीय यूनियन से सभी आयातों पर 50% टैक्स और एप्पल उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया जा सकता है. इसके बावजूद, जानकारों का मानना है कि भारत एप्पल के लिए सबसे बेहतर विकल्प बना रहेगा क्योंकि यहां कंपनी को बेहतर उत्पादन लागत और कुशल श्रमिक मिलते हैं.

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भारत में एप्पल की भविष्य की योजनाएं

सूत्रों के अनुसार, एप्पल भारत में अपने निवेश और विस्तार की योजनाओं को जारी रखेगी. बीते कुछ सालों में भारत एप्पल के लिए एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बन चुका है. कंपनी भारत सरकार को अपने उत्पादन को बढ़ावा देने और 'मेक इन इंडिया' में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है.

पूरी तरह से अमेरिका में iPhone बनाना न केवल अत्यधिक महंगा है, बल्कि व्यावहारिक रूप से बहुत जटिल भी है. इसके विपरीत, भारत जैसे देशों में निर्माण करना एप्पल के लिए कहीं अधिक फायदेमंद और टिकाऊ विकल्प है.  आने वाले समय में भारत एप्पल की ग्लोबल सप्लाई चेन में और भी बड़ी भूमिका निभा सकता है.

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