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हर महीने सोना, बस सोना! आखिर क्यों इतना गोल्ड खरीद रहा है चीन?
China Buying Gold: अब जब चीन इतने बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहा है, तो यह साफ है कि वह डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और अपने रिजर्व को मजबूत बनाना चाहता है. आने वाले समय में चीन और ज्यादा सोना खरीद सकता है ताकि वह आर्थिक रूप से और मजबूत बन सके.
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China Buying Gold: चीन का सेंट्रल बैंक यानी The People’s Bank of China लगातार बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहा है. अगस्त 2025 में यह सिलसिला लगातार सातवें महीने भी जारी रहा. इसका मतलब है कि चीन पिछले कई महीनों से अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने में जुटा हुआ है. अब चीन के पास 253.8 अरब डॉलर के बराबर का सोना जमा हो चुका है, जो कि उसके कुल विदेशी रिजर्व का 7.6% हिस्सा है. सिर्फ साल 2025 में ही चीन ने अब तक 21 टन सोना खरीदा है. अगर पिछली सालों की बात करें, तो 2024 में 44 टन और 2023 में 225 टन सोना खरीदा गया था. चीन का अगला टारगेट है कि उसका गोल्ड रिजर्व 5,000 टन तक पहुंच जाए.
चीन बनना चाहता है दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन का सपना है कि वह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी इकोनॉमी बने. लेकिन इसके लिए उसे सिर्फ टेक्नोलॉजी या व्यापार ही नहीं, बल्कि अपने सोने के भंडार को भी बढ़ाना होगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर चीन को अमेरिका को पीछे छोड़ना है, तो उसके पास कम से कम 8,000 टन से ज्यादा सोना होना चाहिए. हालांकि, अभी चीन इस लक्ष्य से काफी पीछे है. मौजूदा समय में चीन के पास सिर्फ 2,300.4 टन सोना है.
पहले भी 2009 में, चाइना गोल्ड एसोसिएशन के एक बड़े अधिकारी होऊ हुइमिन ने कहा था कि चीन को कम से कम 5,000 टन सोना रखना चाहिए. अगर वह इस आंकड़े तक पहुंचता है, तो वह अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड होल्डर बन सकता है.
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किस देश के पास कितना सोना है?
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अब एक नजर डालते हैं कि दुनिया के कौन-कौन से देशों के पास कितना सोना जमा है:
अमेरिका – सबसे ऊपर है, जिसके पास 8,133.5 टन सोना है. यह देश दशकों से दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बना हुआ है.
जर्मनी – दूसरे नंबर पर है, जिसके पास 3,350 टन सोना है. यह जर्मनी के कुल रिजर्व का 78% हिस्सा है.
इटली – तीसरे नंबर पर है, जिसके पास 2,452 टन (75%) सोना है.
रूस – चौथे स्थान पर है, जिसके पास 2,330 टन सोना है.
चीन – पांचवें नंबर पर है, 2,300 टन के करीब सोना है, जो धीरे-धीरे बढ़ रहा है.
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इनके बाद जो देश आते हैं:
स्विट्जरलैंड – 1,040 टन (कुल रिजर्व का 11%)
भारत – 880 टन (13%)
जापान – 846 टन
तुर्की – 637 टन
नीदरलैंड – 613 टन
पोलैंड – 515 टन
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चीन का अगला कदम क्या हो सकता है?
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अब जब चीन इतने बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहा है, तो यह साफ है कि वह डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और अपने रिजर्व को मजबूत बनाना चाहता है. आने वाले समय में चीन और ज्यादा सोना खरीद सकता है ताकि वह आर्थिक रूप से और मजबूत बन सके.