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भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक धाक... उच्च विकास दर और रिकॉर्ड निर्यात से दुनिया हैरान!

भारतीय अर्थव्यवस्था अब सिर्फ 'उभरती हुई अर्थव्यवस्था' नहीं रही, बल्कि एक स्थापित वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रही है. यह एक ऐसा दौर है जब दुनिया भारत की ओर आशा भरी नज़रों से देख रही है और भारतीय अर्थव्यवस्था की धाक वैश्विक पटल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है.

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वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था एक मज़बूत खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आई है. जहाँ दुनिया के कई देश मंदी या धीमी विकास दर की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत अपनी उच्च विकास दर और लगातार बढ़ते निर्यात के साथ अपनी आर्थिक धाक जमा रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं भी भारतीय अर्थव्यवस्था की resilience और विकास की संभावनाओं को लेकर आश्वस्त दिख रही हैं.

देश की अर्थव्यवस्था आत्मविश्वास के साथ लगातार बढ़ रही है

भारत की अर्थव्यवस्था का विकास दर वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत रहा है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक है. साथ ही, इस दौरान देश का निर्यात भी सार्वकालिक उच्चतम स्तर 824.9 बिलियन डॉलर पर रहा है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था आत्मविश्वास के साथ लगातार बढ़ रही है. 

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भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का विकास दर इसी आंकड़े के आसपास रहने की उम्मीद है. 

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संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत का विकास दर इस साल 6.3 प्रतिशत और अगले साल 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है, जबकि भारतीय उद्योग परिसंघ का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में देश का विकास दर 6.40 से 6.70 प्रतिशत के बीच रह सकता है.

अर्थव्यवस्था के अच्छे प्रदर्शन के कारण देश के निर्यात में भी तेजी से इजाफा हो रहा है. भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 824.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 778.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 6.01 प्रतिशत अधिक है. इससे पहले वित्त वर्ष 2013-14 में देश का निर्यात केवल 466.22 बिलियन डॉलर था, जो बीते एक दशक में देश के निर्यात में निरंतर प्रगति को दिखाता है.

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एक तरफ देश तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है तो वहीं महंगाई दर भी न्यूनतम स्तरों पर बनी हुई है

मई 2025 में खुदरा महंगाई दर 2.82 प्रतिशत पर रही थी, जो कि फरवरी 2019 के बाद खुदरा महंगाई का सबसे निचला स्तर है.

इसके अतिरिक्त, भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छे प्रदर्शन के कारण पूंजीगत बाजारों पर भी निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है. भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की संख्या दिसंबर 2024 तक बढ़कर 13.2 करोड़ हो गई है, जबकि 2019-20 में यह आंकड़ा 4.9 करोड़ पर था. यह बढ़ोतरी इक्विटी बाजारों में बढ़ती सार्वजनिक रुचि और देश की दीर्घकालिक क्षमता में विश्वास को दर्शाती है. अब अधिकतर लोग शेयर बाजार को केवल बड़ी कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी संपत्ति बनाने के एक जरिए के तौर पर देखते हैं. 

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भारतीय अर्थव्यवस्था अब सिर्फ 'उभरती हुई अर्थव्यवस्था' नहीं रही, बल्कि एक स्थापित वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रही है. यह एक ऐसा दौर है जब दुनिया भारत की ओर आशा भरी नज़रों से देख रही है और भारतीय अर्थव्यवस्था की धाक वैश्विक पटल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है.

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