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Business: महंगाई ने फिर कसा शिकंजा, रिटेल और थोक दोनों दरों में इजाफा, लेकिन कुछ चीजों ने दी राहत

WPI Inflation: अगस्त 2025 में थोक महंगाई और रिटेल महंगाई दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसका सीधा मतलब है कि अब आम जनता को खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.

Source: Pexels
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August WPI Inflation: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अगस्त महीने की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से जुड़ी रिपोर्ट जारी कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में थोक महंगाई दर बढ़कर 0.52% हो गई है, जबकि इससे पिछले महीने यानी जुलाई में यह -0.58% थी, यानी निगेटिव थी. इसका मतलब है कि पहले कीमतें घट रही थीं, लेकिन अब उनमें दोबारा बढ़ोतरी शुरू हो गई है. महंगाई बढ़ने के पीछे मुख्य वजह है खाने-पीने की चीजों, फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान (मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स), खनिज, गैर-खाद्य वस्तुएं और ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट की कीमतों में हुआ इजाफा.

इन चीजों की कीमतें हुईं महंगी

अगस्त में प्राथमिक वस्तुओं यानी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतों में बढ़त देखी गई है. प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 1.60% का उछाल आया, जो जुलाई में 188.0 था और अब अगस्त में बढ़कर 191.0 पर पहुंच गया है.
गैर-खाद्य वस्तुएं जैसे कपास, जूट आदि की कीमतें 2.92% बढ़ीं.
खनिजों की कीमतों में 2.66% की तेजी आई.
खाद्य वस्तुओं जैसे अनाज, फल-सब्जियों की कीमतें भी 1.45% बढ़ीं.

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इसके अलावा फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान (मैन्युफैक्चरर्ड प्रोडक्ट्स) की कीमतें भी जुलाई के मुकाबले 0.21% ज्यादा हुई हैं। ये वस्तुएं थोक महंगाई बास्केट का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं, इसलिए इनके दामों में थोड़ी भी बढ़ोतरी का असर पूरे इंडेक्स पर पड़ता है। टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट्स, बिजली के उपकरण, मशीनरी और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी चीजें भी महंगी हो गई हैं.

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कुछ चीजें सस्ती भी हुईं

  • हालांकि सभी चीजों की कीमतें नहीं बढ़ीं. ईंधन और बिजली की महंगाई दर 0.69% घटकर अगस्त में 143.6 रह गई है, जो जुलाई में 144.6 थी. इसका मतलब है कि...
  • इन सेक्टरों में थोड़ी राहत देखने को मिली.
  • बिजली की कीमतें लगभग 2.91% सस्ती हुई हैं.
  • खनिज तेल की कीमतों में भी 0.07% की मामूली गिरावट दर्ज की गई.
  • कोयले की कीमतें इस दौरान स्थिर रहीं.
  • कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर 0.43% रही.
  • इसके अलावा, बेस मेटल्स, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल प्रोडक्ट, कपड़े, लकड़ी के सामान और फर्नीचर जैसी चीजों के दाम भी कुछ हद तक घटे हैं.

रिटेल महंगाई में भी दिखा उछाल

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थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा यानी रिटेल महंगाई के आंकड़े भी जारी हुए हैं. अगस्त 2025 में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 2.07% हो गई, जो जुलाई में 1.55% थी। यानी अब न सिर्फ थोक बाजार में चीजें महंगी हो रही हैं, बल्कि दुकानों और बाजारों में भी आम आदमी को चीजें महंगी दामों पर मिल रही हैं.

क्या है WPI और इसका असर

WPI यानी Wholesale Price Index (थोक मूल्य सूचकांक) एक ऐसा इंडेक्स है जो फैक्ट्री, मंडी या बड़े स्तर पर चीजों के दामों को मापता है। अगर WPI बढ़ता है तो इसका मतलब होता है कि फैक्ट्रियों और थोक बाजार में चीजों के दाम बढ़ रहे हैं और इसका असर धीरे-धीरे रिटेल यानी आम जनता की जेब पर भी पड़ता है। इसलिए WPI को देश की महंगाई की स्थिति को समझने के लिए काफी अहम माना जाता है.

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महंगाई के मोर्चे पर चिंता की घंटी

अगस्त 2025 में थोक महंगाई और रिटेल महंगाई दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसका सीधा मतलब है कि अब आम जनता को खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. हालांकि कुछ चीजों की कीमतें कम हुई हैं, लेकिन महंगाई का ट्रेंड ऊपर की तरफ है, जो आने वाले समय में चिंता का कारण बन सकता है.

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