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14 साल बाद भी अधूरा सपना, फर्नहिल के खरीदारों ने तिरंगा तो फहराया, पर घर नहीं मिला

फ्लैट बायर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष अबरोल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले साल 15 अगस्त को लोग अपने-अपने घर में होंगे और बच्चों के साथ झंडा फहराएंगे, गीत गाएंगे, नाच-गाना होगा और वो दिन सच में एक आज़ादी का दिन होगा.

Image Credit: Business
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गुरुग्राम के सेक्टर 91 में एक खाली ज़मीन है, जिसके चारों तरफ 15 ऊँची इमारतें हैं  कुछ पूरी बनी हुई हैं, तो कुछ अब भी अधूरी पड़ी हैं. इसी जगह पर इस साल 15 अगस्त को करीब 600 परिवारों के लोग इकट्ठा हुए. इन लोगों ने 2011 में यहां “फर्नहिल ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट” में अपने-अपने फ्लैट बुक किए थे, लेकिन आज तक उन्हें घर नहीं मिला. लोगों ने तिरंगा फहराया, राष्ट्रगान गाया, लेकिन मन में दुख और नाराज़गी साफ झलक रही थी. 14-15 साल हो गए, लेकिन इनका सपना अभी भी अधूरा है.

एक वायुसेना अधिकारी की उम्मीद और संघर्ष

इस कार्यक्रम में शामिल हुए रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल एस.एस. चौहान ने बताया कि उन्होंने यह घर इसलिए बुक किया था ताकि रिटायरमेंट के बाद शांति से और खुली हवा में रह सकें. उनका पुराना घर सुषांत लोक-1 में था, लेकिन वहां धीरे-धीरे चार मंज़िला इमारतें बन गईं और रोशनी व हवा बंद हो गई. उन्होंने फर्नहिल में घर लिया, लेकिन 2021 तक भी वह तैयार नहीं हुआ। वे बोले, “यह बहुत लंबी और तकलीफदेह लड़ाई रही है”

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शुरुआत तो बड़ी, लेकिन अंत अधूरा

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यह प्रोजेक्ट अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने शुरू किया था. इसमें 712 फ्लैट, 28 विला और 9 दुकानें बननी थीं। लोगों ने लगभग 274 करोड़ रुपये दे दिए, और उन्हें भरोसा था कि 2018 तक घर मिल जाएगा. लेकिन समय के साथ यह प्रोजेक्ट फँसता चला गया. कई खरीदारों का कहना है कि बिल्डर ने बिना ज़रूरी सरकारी मंजूरी के फ्लैट बेच दिए, दस्तावेज़ नहीं दिए, और पैसे वापस भी नहीं किए. ऊपर से एग्रीमेंट में ऐसे क्लॉज़ थे कि खरीदार कोर्ट में भी आसानी से न्याय नहीं पा सके.

कानूनी लड़ाई और नई राह की तलाश

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जब काफी इंतजार और प्रयासों के बाद भी कुछ नहीं हुआ, तो 2021 में खरीदारों ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) का सहारा लिया। फिर नवंबर 2022 में अंसल ग्रुप के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency Process) शुरू की गई. जनवरी 2023 में ये तय हुआ कि अब यह कानूनी कार्रवाई सिर्फ फर्नहिल प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी, जिससे समाधान पर सीधा फोकस हो. इसके बाद मार्च 2023 में एक नया बिल्डर तलाशने के लिए आवेदन मंगाए गए। अंसल ने इसका विरोध नहीं किया और प्रोजेक्ट एक नई कंपनी को सौंप दिया गया.

नई कंपनी, नई उम्मीद

इस स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में ‘रिज़ोल्यूशन प्रोफेशनल’ जे.के. ग्रोवर ने बताया कि हरियाणा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने नई कंपनी को निर्माण फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है. उन्होंने कहा कि सिर्फ तीन दिन पहले यह मंजूरी मिली है और अब 15 दिनों के भीतर वे बताएंगे कि बाकी के टावर कब तक पूरे होंगे और फ्लैट्स कब तक दिए जाएंगे. अच्छी बात ये है कि दो टावर 95% तक बन चुके हैं और इन्हें सबसे पहले दिया जाएगा.

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अब भी अधूरी उम्मीदें और सवाल

हालांकि कुछ लोग राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन ज़्यादातर खरीदारों को अब भी सिस्टम पर भरोसा नहीं है. एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, “राम जी के वनवास से भी लंबा इंतजार कर लिया, लेकिन अब लगता है कुछ नहीं होगा, सब धोखा है.” कई लोग ऐसे भी हैं जिनके माता-पिता ने ये फ्लैट बुक किए थे, लेकिन अब वो इस दुनिया में नहीं रहे. मनीष वर्मा ने बताया कि उनके पिता ने 2011 में फ्लैट बुक किया था और अब तक 48 लाख रुपये जमा कर चुके हैं, लेकिन ट्रिब्यूनल में समय पर दावा नहीं कर सके. फिर भी उन्हें उम्मीद है कि कुछ राहत जरूर मिलेगी.

अगले साल घर में तिरंगा

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फ्लैट बायर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष अबरोल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले साल 15 अगस्त को लोग अपने-अपने घर में होंगे और बच्चों के साथ झंडा फहराएंगे, गीत गाएंगे, नाच-गाना होगा और वो दिन सच में एक आज़ादी का दिन होगा.

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