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योगी सरकार की नई पहल, UP में 16 साल के बच्चों का भी बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस!
UP: 16 साल के किशोरों को वाहनों के लिए लाइसेंस मिल सकता है. इससे युवाओं को सुविधा तो मिलेगी, लेकिन सड़क सुरक्षा और नियमों का सख्ती से पालन कराना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी.
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CM Yogi: यूपी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान 16 साल के किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस देने का मुद्दा चर्चा का बड़ा विषय बन गया. चित्रकूट से अनिल प्रधान ने सवाल उठाया कि जब सरकार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की योजना ला रही है, तो उन छात्राओं का क्या होगा जिनकी उम्र अभी 16 साल ही है. इस पर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि 16 साल की उम्र में सीमित श्रेणी के वाहनों के लिए लाइसेंस दिया जा सके या नहीं. लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है, क्योंकि ड्राइविंग लाइसेंस के नियम केंद्र के कानून के तहत आते हैं.
पहले 50 CC गाड़ियों के लिए मिलता था लाइसेंस
चर्चा के दौरान मंत्री ने बताया कि पहले 16 साल की उम्र में 50 सीसी तक के दोपहिया वाहनों के लिए लाइसेंस जारी किए जाते थे. लेकिन अब ऐसे वाहन बाजार में लगभग बंद हो गए हैं, इसलिए यह व्यवस्था भी खत्म हो गई. अब इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ रहा है. हल्के और कम स्पीड वाले ई-वाहन बाजार में आ रहे हैं, इसलिए सरकार फिर से इस विषय पर सोच रही है कि कम उम्र के किशोरों को सीमित क्षमता वाले वाहनों के लिए लाइसेंस दिया जा सकता है या नहीं.
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केंद्र सरकार से मांगी गई अनुमति
परिवहन मंत्री ने साफ कहा कि राज्य सरकार ने इस संबंध में केंद्र को अनुरोध भेजा है. क्योंकि ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियम केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत आते हैं, इसलिए अंतिम फैसला केंद्र सरकार ही ले सकती है. सूत्रों के अनुसार, मोटर वाहन कानून में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं. इनमें लाइसेंस की नई श्रेणियां, अनुभव के आधार पर लाइसेंस प्रणाली और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग नियम शामिल हो सकते हैं.
यह भी चर्चा है कि 1500 वॉट तक के हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 16 से 18 साल के किशोरों को लर्नर लाइसेंस देने की व्यवस्था बनाई जा सकती है. हालांकि अभी तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.
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रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना क्या है?
दरअसल, योगी सरकार ने हाल ही में बजट में ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इस योजना का मकसद मेधावी छात्राओं को स्कूटी देना है, ताकि वे आसानी से कॉलेज और अन्य जगहों पर आ-जा सकें. सरकार का कहना है कि इससे लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें सुरक्षित परिवहन की सुविधा मिलेगी.
लेकिन स्कूटी देने की घोषणा के बाद यह सवाल उठने लगा कि अगर छात्रा की उम्र 16 साल है, तो क्या उसे कानूनी तौर पर वाहन चलाने की अनुमति मिलेगी या नहीं.इसी वजह से यह मुद्दा विधानसभा में गरमाया.
आगे क्या हो सकता है?
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फिलहाल राज्य सरकार केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रही है. अगर केंद्र सरकार नियमों में बदलाव करती है और अनुमति देती है, तो 16 साल के किशोरों को सीमित क्षमता वाले वाहनों के लिए लाइसेंस मिल सकता है. इससे युवाओं को सुविधा तो मिलेगी, लेकिन सड़क सुरक्षा और नियमों का सख्ती से पालन कराना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी. यह मुद्दा सुविधा और सुरक्षा दोनों से जुड़ा है. अब सबकी नजर केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हुई है.